
Stock Market में गिरावट देखी जा रही है। (PC: AI)
Share Market Today 13th July 2026: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने का सीधा असर आज शेयर बाजार पर देखा जा रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन आज सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 606 अंक गिरकर 76,963.35 पर खुला। शुरुआती कारोबार में सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर यह 617 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इस समय 0.75 फीसदी या 182 अंक की गिरावट के साथ 24,023 पर ट्रेड करता दिखा। शुरुआती कारोबार में मीडिया को छोड़कर सभी सेक्टर लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे।
सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो 0.89 फीसदी, निफ्टी एफएमसीजी 0.44 फीसदी, निफ्टी मेटल 0.83 फीसदी, निफ्टी फार्मा 0.44 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.51 फीसदी और निफ्टी रियल्टी 0.59 फीसदी की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा। इसके अलावा, निफ्टी हेल्थकेयर में 0.50 फीसदी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.02 फीसदी, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.33 फीसदी, निफ्टी केमिकल्स में 0.66 फीसदी और निफ्टी सीमेंट में 0.73 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।
मिडिल ईस्ट में हालात फिर बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है। ईरान ने खाड़ी देशों में अपने हमले बढ़ाए हैं, जबकि अमेरिका ने भी नए सैन्य हमले किए हैं। इससे पहले दोनों देशों के बीच बनी अस्थायी शांति से बाजार को कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। इसका सीधा असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा है।
तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस की बड़ी हिस्सेदारी गुजरती है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि यह मार्ग अभी खुला है, लेकिन अनिश्चितता ने तेल बाजार को हिला दिया। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4 फीसदी बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया। अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो भारत के आयात बिल और व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है।
तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखा। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.40 फीसदी की कमजोरी के साथ 95.70 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.32 पर बंद हुआ था। एक्सपर्ट्स के अनुसार निवेशकों की नजर अगले सप्ताह आने वाले अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की एक्टिविटीज और कच्चे तेल की चाल भी रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
बाजार की चिंता सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी तेजी से बढ़ी है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.585 फीसदी, 30 साल की यील्ड 5.082 फीसदी और 2 साल की यील्ड 4.231 फीसदी पर पहुंच गई। जब बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो कई निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड की तरफ रुख करते हैं। यही वजह है कि इक्विटी बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
भारतीय बाजार अकेला नहीं है। सोमवार को ज्यादातर एशियाई शेयर बाजार लाल निशान में कारोबार करते दिखे। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7 फीसदी से ज्यादा टूट गया। जापान का निक्की करीब 2 फीसदी फिसला, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग 1.5 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया।
बाजार में गिरावट की एक वजह निवेशकों की मुनाफावसूली भी मानी जा रही है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 1,066 अंक और निफ्टी 325 अंक चढ़े थे। ऐसे में कई निवेशकों ने बढ़त का फायदा उठाते हुए अपने शेयर बेच दिए। जब पहले से ही ग्लोबल माहौल कमजोर हो, तब ऐसी मुनाफावसूली गिरावट को और तेज कर देती है।
Updated on:
13 Jul 2026 10:17 am
Published on:
13 Jul 2026 09:42 am
