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Tata Group की भारत में सेमीकंडक्‍टर बनाने की तैयारी

Tata Group's new plan: रतन टाटा की कंपनी टाटा ग्रुप मार्केट डिमांड और ग्लोबल सप्लाई को देखते हुए जल्द ही भारत में ‍सेमीकंडक्‍टर बनाने का काम शुरू कर सकता है। इस बात की जानकारी टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने हाल ही में दी।

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Semiconductor manufacturing

Tata Group planning to manufacture semiconductor in India

नई दिल्ली। सेमीकंडक्‍टर ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में एक बहुत ही ज़रूरी चीज़ है। पिछले कुछ सालों में भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेज़ी से बढ़े हैं। ऐसे में सेमीकंडक्‍टर की डिमांड भी बढ़ी है। पर कोरोना की वजह से सेमीकंडक्‍टर की ग्‍लोबल सप्‍लाई में परेशानी देखने को मिली है। ऐसे में टाटा ग्रुप (Tata Group) ने इस परेशानी को दूर करने के लिए एक कदम के बारे में सोचा है। टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा ग्रुप जल्द ही भारत में सेमीकंडक्‍टर मैन्‍युफैक्‍चरिंग शुरू कर सकता है। चंद्रशेखरन ने बताया कि इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स मैन्‍युफैक्‍चरिंग का ग्‍लोबल मार्केट करीब 1 लाख करोड़ डॉलर का है। इस मार्केट में टाटा ग्रुप ने एक नए बिजनेस की नींव रख दी है।

क्या होता है सेमीकंडक्‍टर?

सेमीकंडक्टर सिलिकॉन चिप होते हैं। इनका इस्तेमाल गाड़ी, कंप्यूटर और मोबाइल फोन से लेकर अन्य कई इलेक्ट्रॉनिक चीज़ों में होता है। सेमीकंडक्टर चिप की मदद से कंट्रोल और मेमोरी फंक्‍शन के काम आसानी से हो जाते हैं। वर्तमान समय में नए सेमीकंडक्टर चिप ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, नेविगेशन और हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक सिस्टम जैसे फीचर्स के साथ आ रहे हैं। इन सेमीकंडक्टर चिप की मार्केट में अच्छी डिमांड है।

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भारत के लिए एक नया और बड़ा अवसर

IMC चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍टी की AGM में एन. चंद्रशेखरन ने बताया कि सेमीकंडक्‍टर के मैन्‍युफैक्‍चरिंग के लिए ज़्यादा निवेश की ज़रूरत होती है। भारत में इस समय कोई भी कंपनी सेमीकंडक्‍टर नहीं बनाती है और इसकी ग्‍लोबल सप्‍लाई चीन पर निर्भर है। ऐसे में टाटा ग्रुप (Tata Group) के इस कदम से भारत के पास सेमीकंडक्‍टर की मैन्‍युफैक्‍चरिंग में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बनने का बहुत ही अच्‍छा अवसर है।

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रोज़गार के नए अवसर और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद

सेमीकंडक्‍टर की मैन्‍युफैक्‍चरिंग भारत में शुरू होने से रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। नए प्लांट और ऑफिस लगने से लोगों को नौकरियां मिलेंगी। साथ ही सेमीकंडक्‍टर की मैन्‍युफैक्‍चरिंग से भारत को दूसरे किसी देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती मिलेगी।

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