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Tata Group में मतभेद से निवेशकों को हुआ नुकसान, TCS और Tata Chemicals समेत कई कंपनियों के शेयर 8% तक टूटे

Tata Trusts Vs Tata Sons: टाटा ग्रुप के शेयरों में शुक्रवार को तेज गिरावट देखने को मिली। टाटा केमिकल्स करीब 8% और TCS 3.5% तक टूट गया। यह गिरावट Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए फिर नियुक्त किए जाने के फैसले के बाद टाटा ट्रस्ट के विरोध से जुड़ी है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Sep 18, 2026

Tata Stocks Crash

टाटा ग्रुप के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। (PC: AI)

Tata Group Stocks: टाटा ग्रुप के शेयरों पर शुक्रवार को दबाव साफ नजर आया। टाटा केमिकल्स के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 8% तक टूट गए। जबकि टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन करीब 5% टूट गया। देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी टीसीएस का शेयर भी करीब 3.5% गिरकर 2,118 रुपये के आसपास आ गया। टाटा मोटर्स, टाटा एलेक्सी और टाटा टेक्नोलॉजीज के शेयरों में भी करीब 3% तक की गिरावट देखने को मिली। बाजार में यह हलचल ऐसे समय हुई है, जब टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट्स का विरोध

टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया है। लेकिन इस प्रस्ताव को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा का समर्थन नहीं मिला। बोर्ड की बैठक में नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि वह चंद्रशेखरन की पांच साल के लिए दोबारा नियुक्ति के फैसले को वैध नहीं मानता।

टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि बहुमत शेयरधारक के तौर पर उसका रुख पहले से स्पष्ट है और बोर्ड की बैठक में भी यही बात दोहराई गई। ट्रस्ट के मुताबिक चार निदेशकों ने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया, जबकि नोएल टाटा ने विरोध में मतदान किया।

विवाद की जड़ में टाटा संस की लिस्टिंग

इस पूरे मामले का एक बड़ा हिस्सा टाटा संस के संभावित IPO से जुड़ा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में टाटा संस की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने खुद को प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी बनाए रखने की अनुमति मांगी थी। आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि तय आकार वाली शैडो बैंक कंपनियों पर लागू होने वाले पब्लिक होल्डिंग से जुड़े नियम टाटा संस पर भी लागू होंगे।

इसके बाद टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर चेयरमैन बनाने का फैसला किया। साथ ही कंपनी की बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई।

टाटा ट्रस्ट चाहता है टाटा संस को प्राइवेट रखना

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी करीब 66% है। सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के जरिए ट्रस्ट कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी रखता है। जुलाई 2025 में टाटा ट्रस्ट ने टाटा संस को प्राइवेट कंपनी बनाए रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था। दूसरी तरफ शापूरजी पलोनजी ग्रुप के पास टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। वह कंपनी की लिस्टिंग को निवेश की वैल्यू सामने लाने का व्यावहारिक रास्ता मानता है।

नोएल टाटा का रुख रहा है कि टाटा संस को सार्वजनिक तौर पर लिस्ट हुए बिना भी आरबीआई की शर्तें पूरी करने का रास्ता तलाशना चाहिए। इसके लिए उन्होंने टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के प्रतिनिधियों वाली एक समिति या टीम बनाने का सुझाव भी दिया था, जो नियामकीय जरूरतों को पूरा करने के विकल्पों पर विचार कर सके।

Tata Sons की AGM भी बनी अहम

अब टाटा संस की लंबित Annual General Meeting यानी AGM भी इस विवाद में महत्वपूर्ण हो गई है। चंद्रशेखरन को चेयरमैन के पद पर बने रहने के लिए एजीएम में डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त होना जरूरी है। यहां टाटा ट्रस्ट्स की बहुमत हिस्सेदारी अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, सर रतन टाटा ट्रस्ट फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के एक आदेश के कारण फैसले लेने की स्थिति में नहीं है। इसी वजह से एजीएम में कोरम की समस्या सामने आई और बैठक को टालना पड़ा।

बोर्ड में वोटिंग को लेकर भी सवाल

टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में ट्रस्ट से जुड़े डायरेक्टर्स की भूमिका को लेकर खास प्रावधान हैं। इसे 'assenting vote' कहा जाता है। इसके तहत महत्वपूर्ण फैसलों के लिए ट्रस्ट द्वारा नामित डायरेक्टर्स की सहमति अहम मानी जाती है।

फिलहाल टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट के दो नामित डायरेक्टर नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन हैं। गुरुवार को विचार किए गए दोनों प्रस्तावों पर दोनों ने अलग-अलग रुख अपनाया।

यहीं से कास्टिंग वोट का मामला सामने आया। टाटा संस के बोर्ड ने कानूनी राय के आधार पर माना कि वोट बराबर होने की स्थिति में बैठक की अध्यक्षता कर रहे व्यक्ति कास्टिंग वोट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

किन Tata कंपनियों के शेयरों पर पड़ा असर?

टाटा केमिकल्स के पास टाटा संस में 2.53% हिस्सेदारी है। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन की भी टाटा संस में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। इसके अलावा टीसीएस, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा एलेक्सी, टाटा टेक्नोलॉजीज और टाटा स्टील जैसी कंपनियां भी निवेशकों की नजर में हैं। खास बात यह है कि चंद्रशेखरन पहले टीसीएस के सीईओ रह चुके हैं। ऐसे में टाटा संस से जुड़े फैसलों का असर सिर्फ होल्डिंग कंपनी तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि ग्रुप की कई लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में भी बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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