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अप्रैल में थोक महंगाई ने बनाया रिकॉर्ड, इन चीजों की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल

कच्चे तेल, पेट्रोल-डीजल के दाम में उछाल की वजह से अप्रैल, 2021 में थोक महंगाई अब तक के रिकॉर्ड 10.49 फीसदी तक पहुंच गई है।

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Wholesale inflation

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नई दिल्ली। महामारी कोरोना वायरस से जूझ रही जनता को महंगाई ने जोर का झटका दिया है। कच्चे तेल और विनिर्मित वस्तुओं (Manufactured Items) की बढ़ती कीमतों के कारण अप्रैल में थोक महंगाई ने एक नया रिकॉर्ड बना लिया है। तेजी से बढ़ रही थोक महंगाई पर आधारित मुद्रास्फीति (WPI) अप्रैल में 10.49 फीसद के अब तक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई। मार्च, 2021 की तुलना में इसमें करीब 7.39 फीसदी की बढ़त हुई है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मार्च महीने में थोक महंगाई सिर्फ 3.1 फीसदी थी। इसी तरह फरवरी में थोक महंगाई 4.17 फीसदी थी।

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पिछले महीने की तुलना में अधिक
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि बीते साल के अप्रैल माह की तुलना में इस साल क्रूड पेट्रोलियम, पेट्रोल, डीजल इत्यादि और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी से मुख्य रूप से अप्रैल, 2021 में सालाना आधार मुद्रास्फीति की वार्षिक दर पिछले साल के इसी महीने की तुलना में अधिक है। इस दौरान अंडा, मांस और मछली जैसी खाद्य उत्पादों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 4.92 प्रतिशत रही। इनमें प्रचूर मात्रा में प्रोटीन की उपलब्धता होती है।

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सब्जियों के दाम में गिरावट
वहीं, सब्जियों की थोक महंगाई मार्च के 5.19 फीसदी के मुकाबले -9.03 फीसदी पर रही। यहां लोगों को राहत मिली है। इनके दाम में गिरावट आई है। इस दौरान प्याज के कीमतों में 19.72 फीसदी की कमी दर्ज की है। अप्रैल में दालों की महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। यह मार्च के 13.14 फीसदी से घटकर 10.74 फीसदी पर आ गई है। अप्रैल में दूध की महंगाई मार्च के 2.65 फीसदी से घटकर 2.04 फीसदी पर रही है। जबकि फलों में यह 27.43 फीसदी रही। इसी तरह ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति अप्रैल में 20.94 प्रतिशत रही, जबकि विनिर्मित उत्पादों में यह 9.01 प्रतिशत थी।

आपको बता दें कि रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इससे पहले कहा था कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई के साथ-साथ थोक महंगाई दर में बढ़ोत्तरी लागत मूल्य पर दबाव को दिखाता है।