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Share Market Crash: बाजार खुलते ही निवेशकों को 4 लाख करोड़ का नुकसान, सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटा, जानिए इस बिकवाली के 5 बड़े कारण

Why Stock Market Fall Today: मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम एक बार फिर 100 डॉलर के पार पहुंच गये हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। निवेशकों का सेंटीमेंट डाउन है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

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Updated: 24 Jul 2026, 10:13 AM IST

Stock Market News

Stock Market आज बड़ी गिरावट के साथ खुला है। (PC: AI)

Share Market Today 24th July 2026: भारतीय शेयर बाजार आज हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बड़ी गिरावट के साथ खुला है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 683 अंक की गिरावट के साथ 75,708.19 पर खुला। शुरुआती कारोबार में 9 बजकर 28 मिनट पर यह 0.78 फीसदी या 592 अंक की गिरावट के साथ 75,799 पर ट्रेड करता दिखाई दिया। इस समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 3 शेयर हरे निशान पर और 27 शेयर लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी इस समय 0.73 फीसदी या 170 अंक की गिरावट के साथ 23,703 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में आई इस बिकवाली से निवेशकों को 4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।

सेंसेक्स के शेयरों का हाल

रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट

सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक गिरावट निफ्टी रियल्टी में 1.55 फीसदी देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.04 फीसदी, निफ्टी ऑटो में 1.10 फीसदी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेस 25/50 में 0.83 फीसदी, निफ्टी आईटी में 0.46 फीसदी, निफ्टी मीडिया में 0.14 फीसदी, निफ्टी मेटल में 0.91 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.62 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.70 फीसदी, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.90 फीसदी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेस एक्स-बैंक में 0.98 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।

क्यों आई शेयर बाजार में गिरावट?

100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल

बाजार की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। सिर्फ इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड करीब 15 फीसदी चढ़ चुका है, जबकि पिछले सप्ताह इसमें 16 फीसदी की तेजी आई थी। लगातार तीन महीने गिरावट के बाद जुलाई में अब तक इसकी कीमत लगभग 40 फीसदी बढ़ चुकी है।

तेल महंगा होने का सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ने, कंपनियों की लागत बढ़ने और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम कम करना शुरू कर दिया। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि लाल सागर में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी टैंकरों पर हमले के बाद तेल की कीमतों में आई तेज उछाल भारत के लिए चिंता का विषय बन गई है। उनका मानना है कि 100 डॉलर के आसपास पहुंचा कच्चा तेल भारत के भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ा सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव भी बाजार की चिंता बढ़ा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी सेना ने गुरुवार देर रात बताया कि उसने ईरान पर लगातार 13वीं रात सैन्य कार्रवाई पूरी की है। जब तक इस संघर्ष के खत्म होने के संकेत नहीं मिलते, तब तक वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रह सकती है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी

अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड इस महीने अब तक करीब 6.5 फीसदी बढ़कर 4.711 फीसदी पर पहुंच गई है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका के सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारत जैसे बाजारों में विदेशी निवेश घटने के रूप में दिखाई देता है। वीके विजयकुमार के मुताबिक 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 4.7 फीसदी तक पहुंचना दुनियाभर के शेयर बाजारों के लिए शॉर्ट टर्म में निगेटिव सिग्नल है।

ट्रंप की टैरिफ नीति फिर बनी चिंता

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर व्यापारिक साझेदार देशों पर टैरिफ बढ़ाने की नीति तेज कर दी है। पिछले दो हफ्तों में अमेरिका ने ब्राजील पर 25 फीसदी, कनाडा पर 50 फीसदी और जेनेरिक दवाओं पर 200 फीसदी तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसके अलावा अमेरिका ने करीब 60 देशों पर सेक्शन 301 के तहत 10 से 12.5 फीसदी तक नए टैरिफ लागू किए हैं। भारत को 10 फीसदी वाले निचले स्लैब में रखा गया है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप की यह नीति वैश्विक व्यापार की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है। साथ ही अमेरिका में महंगाई बढ़ने और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका भी बढ़ गई है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की सतर्कता बढ़ी

ऊंचे कच्चे तेल के दाम, भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और नई टैरिफ नीति ने मिलकर वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर कर दिया है। ऐसे माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका सबसे ज्यादा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ता है।