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15 साल से पुरानी सरकारी गाड़ियों पर बड़ा फैसला, जानिए क्या

Government's Policy For Old Cars: 15 साल से ज़्यादा पुरानी सरकारी गाड़ियों पर एक बड़ा फैसला लेते हुए एक नई सरकारी पॉलिसी लागू की गई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस बात की जानकारी पिछले साल दी थी और कुछ महीनों में ही इस पर एक्शन भी लिया जाएगा। क्या है यह पॉलिसी? आइए जानते हैं।

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Old Cars to get scrapped

सर्कुलर इकोनॉमी और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले समय में कई फैसले लिए हैं। इन फैसलों का लक्ष्य देश की इकोनॉमी में सुधार के साथ ही बढ़ रहे प्रदूषण को भी कम करना है। ज़्यादा पुरानी हो गई गाड़ियों से भी प्रदूषण बढ़ता है। इसकी वजह है कि कार जितनी ज़्यादा पुरानी होती है, उनका पॉल्यूशन लेवल उतना ही ज़्यादा बढ़ता है क्योंकि उनका एमिशन यानि की उत्सर्जन लेवल भी उतना ही ज़्यादा बढ़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार ने 15 साल से ज़्यादा पुरानी सरकारी गाड़ियों के लिए नई पॉलिसी बनाई है।

क्या है नई सरकारी पॉलिसी?

नई सरकारी पॉलिसी के तहत 15 साल से ज़्यादा पुरानी सरकारी गाड़ियों को कबाड़ में बदला जाएगा। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने इस बारे में पिछले साल नवंबर में भी हिंट दिया था कि सरकार ऐसा कदम उठाने की तैयारी कर रही है।


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मोटर व्हीकल एक्ट, 2019 में किया गया संशोधन


इस काम के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय ने पिछले साल नवंबर में ही एक ड्राफ्ट भी तैयार किया था। अब सरकार की नई पॉलिसी के लिए मोटर व्हीकल एक्ट, 2019 में संशोधन करने का फैसला लिए गया है। इस संशोधन के तहत 15 साल से ज़्यादा पुरानी सरकारी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करके इनको रजिस्टर्ड स्क्रैप सेंटर्स पर कबाड़ में बदला जाएगा। इनमें रजिस्ट्रेशन को रीन्यू कराने के बाद वाली पुरानी गाड़ियाँ भी शामिल हैं।

किन गाड़ियों को किया जाएगा स्क्रैप?

मोटर व्हीकल एक्ट, 2019 में संशोधन के बाद नई पॉलिसी के तहत 15 साल से ज़्यादा पुरानी ऐसी सभी गाड़ियों को स्क्रैप यानि की कबाड़ में बदल दिया जाएगा जो केंद्र सरकार, सभी राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेशों की सरकारें, निगम, पीएसयू, राज्य परिवहन, पीएसयू और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थाओं से संबंधित हैं।

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कब से किया जाएगा स्क्रैप?


सरकारी पॉलिसी के तहत 15 साल से ज़्यादा पुरानी सरकारी गाड़ियों को 1 अप्रैल, 2023 से स्क्रैप किया जाएगा। हालांकि इसकी तैयारी पिछले साल से ही शुरू हो गई थी।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में लिया गया फैसला

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस बात बारे में बात करते हुए बताया कि भारत के प्रधानमंत्री (Indian Prime Minister) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के मार्गदर्शन में ही यह फैसला लिया गया है।


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