
बंदर की उछलकूद, शेर की दहाड़ और बच्चों का रोमांच
चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता— 101
बच्चों, कहानियां सुनने में जितना मजा आता है, उससे कई ज्यादा सुनाने में। कहानियां सुनाना भी खास तरह की प्रतिभा है। कहानियां वही सुना सकता है, जिसकी कल्पनाशीलता विस्तृत होती है। कल्पना भी इतनी हो कि कहानी रोचक बन पाए। आप भी इस रोचक प्रतिभा को अर्जित करना चाहते हैं तो कहानी कहना सीखना होगा। कहानी कहने की इसी प्रतिभा पर परिवार परिशिष्ट के 21 अक्टूबर के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़े।
चिड़ियाघर की सैर
नाम उदय शर्मा, 12 वर्ष
सोनू और खुशी भाई-बहन थे। दोनों आपस में खूब खेलते थे। एक दिन सोनू ने अपनी मां से चिड़ियाघर ले जाने के लिए कहा तो मां ने उसे शाम को उसके पापा से पूछने को कहा। शाम को पापा के ऑफिस से आने के बाद सोनू ने चिड़ियाघर चलने की बात पूछी तो पापा ने अगले रविवार को चलने को कहा इससे सोनू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रविवार के दिन सोनू और खुशी अपने मम्मी-पापा के साथ चिड़ियाघर गए। दोनों बहुत खुश थे। दोनों ने शेर, जिराफ आदि जानवरों को पास से देखा तो वे रोमांचित हो उठे। दोनों ने गुब्बारे लिए और खूब मस्ती की शाम को वो अपने मम्मी -पापा के साथ घर आ गए।
बंदर की शरारत
कान्हा माहेश्वरी, 7 वर्ष
चिड़ियाघर में एक छोटा बंदर था, जो बहुत शरारती था। उसके पास दो गुब्बारे थे। सोनू और मोनू भी चिड़ियाघर में घूमने गए थे। दोनों बहन भाई थे। उनके हाथ में भी गुब्बारे थे। बंदर ने सोचा, मैं इनका गुब्बारा छीन लूं।जैसे ही वह आगे बढ़ा,सोनू ने उसका उदास चेहरा देख लिया और वह समझ गई कि उसको गुब्बारे चाहिए। उसने बंदर को गुब्बारे दे दिए। और कहा- "नाराज मत हो, ये लो मेरा गुब्बारा यह भी ले लो"। पर किसी की चीज़ को छीन कर लेना बुरी बात है।बंदर को अपनी गलती समझ में आ गई। उस दिन से बंदर ने शरारत करना छोड़ दिया, और सबका अच्छा दोस्त बन गया।
दोस्ती का अनोखा चिड़ियाघर
लवित शर्मा, 7 वर्ष
एक सुहानी सुबह आरव और उसकी छोटी बहन रिया अपने हाथों में रंग-बिरंगे गुब्बारे थामे शहर के चिड़ियाघर पहुंचे। दोनों पहली बार वन्यजीवों को इतने करीब से देखने आए थे, इसलिए उनकी आँखों में गजब का उत्साह और चेहरे पर खिली हुई मुस्कान थी। जैसे ही वे मुख्य द्वार के पास पहुंचे, उनका स्वागत एक बेहद जादुई और सुखद दृश्य ने किया। बाड़े के उस पार खड़ा लंबा जिराफ अपनी गर्दन झुकाकर उनका अभिनंदन कर रहा था, नटखट बंदर डाल पर झूलते हुए तालियां बजा रहा था, और नन्हा हाथी अपनी सूंड उठाकर बच्चों को सलाम कर रहा था। सबसे अद्भुत बात यह थी कि जंगल का राजा शेर भी दहाड़ने के बजाय अपनी सौम्य और शांत मुस्कान बिखेर रहा था।जानवरों का यह दोस्ताना रूप देखकर रिया ने आश्चर्य से पूछा, "भैया, क्या ये खूंखार जानवर भी हमसे इतनी मोहब्बत कर सकते हैं?"आरव ने प्यार से बहन के कंधे पर हाथ रखा और कहा, "बिल्कुल रिया! अगर हमारी नीयत में डर या नफ़रत के बजाय प्रेम और सम्मान हो, तो बेज़ुबान जानवर भी हमारे स्नेह को पहचान लेते हैं।"यह सुनकर हाथी ने अपनी सूंड हिलाकर मानो सहमति जताई और बच्चों ने खुशी में अपने रंगीन गुब्बारे हवा में लहरा दिए।उस दिन दोनों भाई-बहन ने जीवन की सबसे प्रेरक सीख पाई—सच्ची ताकत किसी पर डर बैठाने में नहीं, बल्कि हर प्राणी के प्रति दया, करुणा और सौहार्द रखने में है। प्यार वह भाषा है जो इंसानों और बेज़ुबानों के बीच की हर दीवार को गिरा देती है।
चिड़ियाघर की यादगार सैर
विश्वराज सिंह शेखावत, 12 वर्ष
एक रविवार की सुबह राहुल और उसकी छोटी बहन रानी अपने माता-पिता के साथ चिड़ियाघर घूमने गए। दोनों बच्चे बहुत खुश थे। चिड़ियाघर के प्रवेश द्वार पर रंग-बिरंगे गुब्बारे और एक बड़ा-सा ‘ZOO’ का बोर्ड लगा था। सबसे पहले वे जिराफ़ के पास पहुँचे। जिराफ़ की लंबी गर्दन देखकर रानी आश्चर्यचकित रह गई। फिर उन्होंने एक प्यारे हाथी को देखा, जो अपनी सूँड़ हिला रहा था। राहुल ने खुशी से ताली बजाई। थोड़ी दूर पर एक नटखट बंदर उछल-कूद कर रहा था। वह कभी पेड़ पर चढ़ता, तो कभी अजीब-अजीब चेहरे बनाता। दोनों बच्चे उसे देखकर खूब हँसे। इसके बाद वे शेर के बाड़े के पास गए। शेर अपने घने अयाल के साथ बहुत शानदार दिखाई दे रहा था। रानी ने कहा, “भैया, यह तो जंगल का राजा है!” राहुल ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। घूमते-घूमते दोनों बच्चों ने देखा कि कुछ लोग जानवरों को खाने की चीज़ें दे रहे थे और एक बच्चा बाड़े के पास कूड़ा फेंक रहा था। राहुल ने उसे समझाया कि जानवरों को बाहर का खाना नहीं देना चाहिए और चिड़ियाघर को साफ़ रखना चाहिए। शाम को घर लौटते समय दोनों बहुत खुश थे। उन्होंने अपने माता-पिता से वादा किया कि वे हमेशा जानवरों से प्रेम करेंगे और उनकी रक्षा करेंगे।
जानवरों की अनोखी दुनिया
प्रिशा सोनी, 7 वर्ष
एक दिन मैं अपने परिवार के साथ चिड़ियाघर घूमने गया। वहाँ का नजारा बहुत सुंदर था। चारों तरफ पेड़-पौधे और अलग-अलग तरह के जानवर थे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में आ गया हूँ। सबसे पहले मैंने एक जिराफ देखा। उसकी लंबी गर्दन देखकर मैं हैरान रह गया। फिर मैंने हाथी को देखा, जो अपनी सूँड़ से पानी उछाल रहा था। यह देखकर मुझे बहुत मजा आया। एक बंदर पेड़ पर बैठकर केला खा रहा था। वह कभी इधर तो कभी उधर कूद रहा था। आगे जाकर मैंने एक शेर देखा। वह चुपचाप बैठा था, लेकिन दिखने में बहुत ताकतवर लग रहा था। वहाँ रंग-बिरंगे पक्षी भी थे। उनकी आवाज सुनकर मेरा मन खुश हो गया। मुझे सबसे अच्छा तब लगा जब मैंने छोटे-छोटे हिरणों को दौड़ते हुए देखा। मैंने अपने पापा से जानवरों के बारे में कई सवाल पूछे। उन्होंने मुझे बताया कि सभी जानवर प्रकृति का हिस्सा हैं और हमें उनकी देखभाल करनी चाहिए। उस दिन मैंने बहुत कुछ सीखा। घर लौटते समय मैंने सोचा कि जानवरों को कभी परेशान नहीं करना चाहिए। चिड़ियाघर की यह सैर मेरे लिए बहुत मजेदार और यादगार रही।
चिड़ियाघर में घूमना—फिरना
हिमांशी छबरवाल, 11 वर्ष
एक बार पिंकी और पिंटू चिड़ियाघर में घूमने जा रहे थे तो उन्होंने दुकान से कुछ रंग बिरंगे, हवा भरे हुए गुब्बारे खरीदे। जब वे जू में पहुंचे तो उन्होंने एक लाल बाल और बड़ी मुछों वाला शेर, मोटा हाथी, लम्बी पूछ का बंदर और पीला धब्बेदार जिराफ देखा। वे इन सब को देखकर बहुत खुश हुए और अपने गुब्बारे उनकी तरफ उड़ा दिए। गुब्बारों को देखकर सभी जानवर बहुत खुश हुए। पिंकी और पिंटू भी उन्हें देखकर हंसने लगे। कुछ देर वे दोनों जू में उनके साथ मस्ती करते रहे। जब वे दोनों घर जाने लगे तो जानवरों की तरफ खुशी-खुशी हाथ हिलाया और फिर चले गए।
अजूबा चिड़ियाघर
हितिषा द्विवेदी, 10 साल
एक दिन की बात है।राम अपनी छोटी बहन मोहिनी के साथ चिड़ियाघर गया।चिड़ियाघर के बाहर से राम ने मोहिनी को गैस वाले रंग बिरंगे गुब्बारे दिलाये। चिड़ियाघर में पहुँचते ही मोहिनी खुशी से चिल्लाई"भईया देखो कितने प्यारे जानवर है।" राम ने देखा की वहाँ तो सच मे बहुत प्यारे जानवर थे।राम ने मोहिनी से पूछा "मोहिनी तुम्हे कौनसा जानवर पसन्द है?" मोहिनी ने जवाब दिया "मुझे तो सभी जानवर प्यारे लगते है।" राम ने कहा "मुझे तो शेर सबसे अच्छा लगता है।"दोनों भाई-बहन ने ध्यान दिया कि वे सभी जानवर भी उन्हें देख रहे थे।मोहिनी ने राम से पूछा कि वहाँ सभी जानवरो को शेर से अलग क्यों रखा गया है?राम ने बताया कि शेर एक माँसाहारी जानवर होता है,शेर दूसरे जानवरो को नुकसान न पहुँचा पाए इसलिए उसे अलग रखा गया है।मोहिनी ने पूछा"भईया क्या मैं बंदर को बुला सकती हूँ?"राम ने कहा "नहीं बंदर बहुत शरारती होते है।मोहिनी ने पूछा कि "तो क्या मैं जिराफ और हाथी के साथ खेल सकती हूँ?"राम ने कहा "हाँ खेल तो सकती हो पर चिड़ियाघर में नहीं ,क्योंकि गार्ड हमे अंदर उनके पास जाने नही देंगे।" तभी मोहिनी ने उसके पास जो गुब्बारे थे उनमें से 4 गुब्बारे जानवरो की तरफ उड़ा दिए,जिन्हें देखकर जानवर खुश हो गए।इस तरह मोहिनी और राम ने बिना नियम तोड़े जानवरो से दोस्ती कर ली।
चिड़ियाघर जाने की इच्छा
अन्वी साहू, 7 वर्ष
अन्वी अपने छोटे भाई आरुष के साथ रविवार के दिन जल्दी उठ गयी। और अपने माता-पिता के साथ चिड़ियाघर देखने गई। वहाँ अन्वी ने चिड़ियाघर का टिकट खरीदा और अन्दर प्रवेश किया। वहाँ सबसे पहले जंगल का राजा शेर देखा,वह दहाड़ रहा था। फिर जिराफ दिखा, वह गर्दन ऊंची करके पेड़ों की पत्तियां खा रहा था। आगे चलने पर हाथी गन्ना खाता दिखाई दिया। और बंदर पेड़ों पर उछल कूद कर रहे थे। अन्वी ने बंदरों को केले खिलाए। चिड़ियाघर में कई प्रकार के जीव-जंतु थे। जैसे- भालू , हिरण, अजगर,सांप, खरगोश, कछुआ, नीलगाय,नेवला, लोमड़ी चीता आदि। अन्वी और आरुष को चिड़ियाघर में बहुत आनंद आया। शाम होते ही वापस अपने घर आ गए।
बंदर की उछलकूद
उमंग प्रजापति, 7 वर्ष
यह एक सुहानी सुबह थी चिंकी और मोनू बहुत खुश थे क्योंकि पिताजी उनको चिड़ियाघर की सैर कराने ले जा रहे थे उन्होंने रास्ते में से फल खरीदे चिड़ियाघर में हाथी बंदर जिराफ और शेर को देखकर दोनोंबहुत खुश हुए चिंकी और मोनू ने बंदरों को फल खिलाएं जानवरों को उछलते कूदते देखकर दोनों बहुत खुश हुए तथा ताली बजाने लगे उन्होंने गुब्बारे भी उड़ाये रंग-बिरंगे गुब्बारे को देखकर बंदर भी उछलने लगे चिड़ियाघर के दोस्तों से मिलकर चिंकी और मोनू बहुत खुश थे
नानी के गांव में चिड़ियाघर
तनिष्क यादव, 10 वर्ष
एक बार एक लड़का जिसका नाम पार्थ था, वह अपनी नानी के घर गया। उसने घर के पास एक चिड़ियाघर देखा। तो वह नानी से बोला, "नानी, मुझे चिड़ियाघर जाना है।" नानी ने कहा, "हम कल चलेंगे।" अगले दिन नानी और पार्थ चिड़ियाघर देखने गए। जब पार्थ चिड़ियाघर देख रहा था, तो उसे एक लड़की दिखी। पास जाकर देखा तो वह उसकी चचेरी बहन नेहा थी। पार्थ और नेहा बात कर रहे थे, तभी नानी आई और उन्हें गुब्बारे दे दिए। जब उन्होंने जानवर देखे तो उन्होंने जानवरों से दोस्ती कर ली। जब जानवरों ने नेहा के हाथ में गुब्बारे देखे तो वे डर गए। बाद में नेहा और पार्थ ने गुब्बारे फोड़ दिए तो सब जानवर उन्हें देखने लगे और उनका डर खत्म हो गया। इससे हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों की खुशी में ही हमारी खुशी है। इसके बाद कभी भी नेहा और पार्थ चिड़ियाघर में गुब्बारे नहीं ले गए। और तो और, नेहा और पार्थ ने चिड़ियाघर के मालिक से शिकायत की कि अगली बार से यहाँ कोई गुब्बारे न बेचे क्योंकि इससे जानवर डर जाते हैं। बाद में चिड़ियाघर के मालिक ने गुब्बारे बेचने से मना कर दिया।
चिड़ियाघर की यात्रा
दिव्यांश शर्मा, 9 वर्ष
एक दिन अंशु और एंजल साथ-साथ चिड़ियाघर घूमने गए। वहाँ उन्होंने एक लंबी गर्दन वाला जिराफ देखा। जिराफ बहुत सुंदर लग रहा था। पास ही एक बड़ा हाथी अपनी सूँड हिला रहा था। एक प्यारा बंदर उछल-कूद कर रहा था। उन्होंने रंग-बिरंगे गुब्बारे भी देखे। तभी उनकी नज़र एक शेर पर पड़ी, जिसके सिर पर घने बाल थे। दोनों बच्चे जानवरों को देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने सभी जानवरों को ध्यान से देखा और उनके बारे में नई-नई बातें सीखीं। उन्होंने जानवरों को परेशान नहीं किया और सफाई बनाए रखने का वादा किया। शाम को वे खुशी-खुशी घर लौट आए।
चिड़ियाघर की मज़ेदार सैर
चंचल गुर्जर, 7 वर्ष
एक दिन राहुल और उसकी छोटी बहन रानी अपने माता-पिता के साथ चिड़ियाघर घूमने गए। दोनों बच्चे बहुत खुश थे। चिड़ियाघर के बाहर एक बड़ा-सा बोर्ड लगा था, जिस पर ZOO लिखा हुआ था। अंदर जाते ही उन्होंने एक लंबा जिराफ देखा। उसकी गर्दन बहुत लंबी थी। रानी उसे देखकर बहुत खुश हुई। थोड़ी दूर जाने पर उन्हें एक बड़ा हाथी दिखाई दिया। हाथी अपनी सूँड हिला रहा था। राहुल ने हाथी को देखकर ताली बजाई। इसके बाद दोनों बच्चों ने एक शरारती बंदर देखा। बंदर पेड़ की डाल पर बैठकर उछल-कूद कर रहा था। वह कभी इधर जाता, तो कभी उधर। उसे देखकर दोनों बच्चे खूब हँसे। फिर उन्होंने एक सुंदर शेर देखा। उसके सिर पर बड़े-बड़े बाल थे। शेर को देखकर राहुल थोड़ा डर गया, लेकिन उसके पिता ने समझाया कि सभी जानवरों को दूर से देखना चाहिए और उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। रानी ने रंग-बिरंगे गुब्बारे खरीदे। दोनों बच्चों ने चिड़ियाघर में बहुत आनंद लिया। शाम को वे घर लौट आए और अपने दोस्तों को चिड़ियाघर की सारी बातें बताईं।
Updated on:
28 Oct 2026, 12:33 PM IST
Published on:
28 Oct 2026, 12:33 PM IST
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