
सैटेलाइट इमेज। फोटो- (X- @Deltarains)
चेन्नई। नेपाल में भोटेकोशी नदी में गत 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या 500 के पार पहुंच गयी है जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। इस बीच तमिलनाडु इस साल उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान गंभीर मौसम व्यवधान का सामना कर सकता है। निजी मौसम ब्लॉगर हेमाचंदर ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा ‘सुपर अल नीनो’ राज्य में बारिश को तीव्र कर सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ा सकता है। उन्होंने बताया कि समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़कर 29.6 डिग्री सेल्सियस हो गया है, जो औसत से 2.75 डिग्री अधिक है।
इस वर्ष ‘सुपर अल नीनो’ असामान्य रूप से जल्दी विकसित हुआ है और नवंबर तक इसके और तीव्र होने की संभावना है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अक्टूबर से दिसंबर तक चेन्नई और आसपास के क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ की आशंका है। राज्य सरकार को पहले से ही एहतियाती कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि संभावित आपदा को कम किया जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (नोआ) के अनुसार, अल नीनो-दक्षिणी दोलन चक्र के तीन चरण होते हैं– अल नीनो (गर्म), ला नीनो (ठंडा) और न्यूट्रल। यह प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान और व्यापारिक हवाओं में बदलाव को दर्शाता है, जो वैश्विक मौसम और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। ‘अल नीनो’ शब्द का अर्थ स्पेनिश में ‘ छोटा लड़का’ है, जिसे दक्षिण अमेरिकी मछुआरों ने पहली बार दिसंबर में गर्म समुद्री धाराओं के कारण पहचाना था।
तमिलनाडु सरकार ने हाल ही राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के आदेश पर तमिलनाडु आपदा जोखिम न्यूनीकरण एजेंसी के लिए एक निगरानी समिति गठित की है। समिति का नेतृत्व राजस्व प्रशासन आयुक्त और राज्य राहत आयुक्त करेंगे। इसमें अन्ना विश्वविद्यालय, आईआईटी मद्रास और डब्ल्यूआरआई इंडिया सहित कई वैज्ञानिक शामिल हैं। यह समिति संभावित ‘सुपर अल नीनो’ के प्रभावों पर नजर रखेगी और राज्य को बाढ़ व सूखे से बचाने के उपाय सुझाएगी।
वहीं दूसरी तरफ नेपाल में बाढ़ के बीच सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के 21 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री शुक्रवार को काठमांडू से दिल्ली पहुंचे। नेपाली सेना ने उन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला था। दिल्ली पहुंचने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीर्थयात्रियों से मुलाकात की और उनके अनुभवों के बारे में जानकारी ली। नेपाल में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप एक और झील के फटने के बाद भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे बसे गांवों को खाली कराया जा रहा है। नेपाली सेना ने नदी के आसपास मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की सलाह दी है।
Updated on:
28 Aug 2026 06:27 pm
Published on:
28 Aug 2026 06:22 pm
