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मेडिकल कॉलेज छतरपुर: 40 एकड़ के कैंपस में 14 एकड़ में बना रहे 1050 पलंग क्षमता का अस्पताल

247 करोड़ रुपए की लागत से इस कैंपस में कुल 16 भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें कॉलेज की मुख्य बिल्डिंग, छात्रावास, गेस्ट हाउस, और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही, 1050 पलंग क्षमता का एक बड़ा अस्पताल भी इस कैंपस में स्थापित किया जाएगा।

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medical college campus

निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज कैंपस

छतरपुर. मेडिकल कॉलेज का निर्माण तेजी से चल रहा है। 247 करोड़ रुपए की लागत से इस कैंपस में कुल 16 भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें कॉलेज की मुख्य बिल्डिंग, छात्रावास, गेस्ट हाउस, और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही, 1050 पलंग क्षमता का एक बड़ा अस्पताल भी इस कैंपस में स्थापित किया जाएगा। इस अस्पताल के निर्माण के लिए भी बजट का अनुमोदन इस साल के अंत तक मिलने की संभावना जताई जा रही है।

250 छात्रों की होगी कैपेसिटी


मेडिकल कॉलेज का निर्माण गौरगाय मौजा की 40 एकड़ जमीन पर हो रहा है, जहां पर पीआईयू लोकनिर्माण विभाग द्वारा कार्य किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज का उद्देश्य प्रति बैच 250 छात्रों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए कैंपस का निर्माण करना है। कैंपस में छात्रों, स्टाफ और चिकित्सकों के लिए सुविधाजनक आवास, शिक्षा और चिकित्सा संबंधित सभी आवश्यक भवन बनाए जा रहे हैं।

इस साल पूरा हो जाएगा निर्माण


कैंपस में बनाए जा रहे भवनों में प्रमुख रूप से मुख्य बिल्डिंग, स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स, गल्र्स और बॉयज हॉस्टल, डीन रेजीडेंस, रेजीडेंट डॉक्टर हॉस्टल, इंटन्र्स हॉस्टल, प्रोफेसर क्वार्टर, गेस्ट हाउस, कमर्शियल सेंटर, और फायर फाइटिंग बिल्डिंग शामिल हैं। इन सभी भवनों का निर्माण तेज़ी से जारी है। इसके अलावा, 40 एकड़ के इस कैंपस में अस्पताल के लिए 14 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। अस्पताल का डिज़ाइन तैयार किया जा चुका है, और मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग बनाई जा रही है ताकि जगह का अधिकतम उपयोग हो सके। इस कैंपस का निर्माण कार्य 2025 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, और साथ ही अस्पताल भवन के निर्माण के लिए भी अनुमोदन मिलने की उम्मीद है।

डीन की नियुक्ति अब तक नहीं


हालांकि, इस परियोजना में एक बड़ी अड़चन डीन की नियुक्ति में देरी के कारण मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में बाधा आ रही है। कॉलेज के संचालन के लिए 1200 कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरी है, जिसमें 155 टीचिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ, और अन्य सहायक कर्मचारी शामिल हैं। इन नियुक्तियों के लिए भी प्रक्रिया को मंजूरी मिलनी जरूरी है। किसी भी देरी को देखते हुए संबंधित अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज की मान्यता और संचालन के लिए जरूरी कदम जल्द ही उठाए जाएंगे। इस परियोजना की सफलता के लिए पूरे जिले में उम्मीद जताई जा रही है, और यह मेडिकल कॉलेज छतरपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र बनेगा।