
छतरपुर के कदारी पंचायत के सचिव को रिश्वतखोरी में सजा - demo pic
लालच बुरी बला! छतरपुर के एक सचिव के लिए यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठी। उसे महज 4 हजार रुपए के कारण अपनी जिंदगी के 3 साल काल कोठरी में बिताने होंगे। ग्राम पंचायत सचिव को रिश्वतखोरी भारी पड़ गई। प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त के बदले रिश्वत लेने के मामले में उसे दोषी ठहराते हुए तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। मामले में लोकायुक्त न्यायालय ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सचिव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई। उसे अर्थदंड भी दिया गया है।
ग्राम पंचायत कदारी के सचिव भरत वर्मा ने प्रधानमंत्री आवास योजना की शेष किस्त खाते में डालने के बदले रिश्वत ली थी।
अभियोजन के अनुसार शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था।
पंचायत सचिव भरत वर्मा की सन 2019 में आवेदक जगत यादव ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास की शेष तीस हजार रुपए की राशि खाते में डालने के बदले सचिव द्वारा पांच हजार रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है।
शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप कार्रवाई की जिसमें आरोपी सचिव भरत वर्मा चार हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। जांच के दौरान सोडियम कार्बोनेट परीक्षण में रिश्वत लेना प्रमाणित हुआ।
कोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा सभी साक्ष्य और गवाह पेश किए गए, जिन्हें न्यायालय ने स्वीकार किया। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी सचिव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
मामले में लोकायुक्त न्यायालय ने ग्राम पंचायत सचिव भरत वर्मा को रिश्वत लेने का दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त एवं प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश छतरपुर आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने कदारी के पंचायत सचिव भरत वर्मा को तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उसे पांच हजार रुपए का अर्थदंड भी दिया है।
Updated on:
06 Jan 2026 06:47 pm
Published on:
06 Jan 2026 06:46 pm
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