
Demand of youth: जिले में खुलने चाहिए छोटे-छोटे उद्योग धंधे, युवाओं को भी बढ़ानी होगी स्किल
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छिंदवाड़ा. जिले में विकास की रफ्तार मंद पड़ी हुई है। शिक्षा एवं रोजगार दोनों बिन्दुओं पर पर्याप्त सुविधा नहीं है। यहां स्टार्टअप की ग्रोथ काफी धीमी है, इसके साथ ही ही स्किल डेवलपमेंट की भी कमी है। यहां का युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों में पलायन कर रहा है, उसे रोका जाना बहुत जरूरी है। ये बात पत्रिका के स्थापना दिवस के अंतर्गत सोमवार को हुए स्पीक आउट कार्यक्रम के दौरान शहर के युवाओं ने कही। उनका कहना था कि सबसे पहले युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी जरूरी है। अक्सर देखने में आ रहा है कि युवा काबिल ही नहीं बन पा रहे हैं। उनमें स्किल की काफी कमी है। ऐसे में वे पढ़ाई पूरी होने के बाद भी रोजगार नहीं हासिल कर पा रहे हैं। अच्छे कॉलेजों का भी अभाव है। कई कोर्सेज यहां नहीं हैं। शहर में इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर अभी काफी ध्यान देने की जरूरत है। स्टार्टअप की बात करें तो यहां इसकी रफ्तार भी कामी धीमे है। हमारे जिले में छोटे-छोटे उद्योग धंधों के खोले जाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ऐसा होने पर बेरोजगारी की समस्या दूर हो जाएगी। जिले का युवा, जिले में ही रहकर यहां का विकास कर सकेगा।
इनका कहना है...
जिले में मक्के, संतरे, सोयाबीन सहित अन्य फसलों की उपज काफी अच्छी है। इन्हें ध्यान देते हुए हमारे यहां उद्योग धंधे खुलने चाहिए। स्टार्टअप की ग्रोथ काफी कम है। इसके लिए पर्याप्त माहौल नहीं है। युवा वर्ग के लिए शहर की बड़ी संस्थाओं को आगे आकर प्रयास करना चाहिए। इससे निश्चित तौर पर युवाओं को प्लेसमेंट उपलब्ध हो सकेगा।
आमला सिद्दकी, युवा
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शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दिया जाना बहुत जरूरी है। रोजगार की कमी के चलते युवा शहर से पलायन कर रहे हैं, यहां प्लेसमेंट नहीं मिल पाना बड़ी समस्या हो गया है। स्टार्टअप की बात करें तो यहां महज 10 प्रतिशत युवा ही इस पर ध्यान दे पाया है। इसके पीछे वजह यह है कि जिम्मेदार इस पर अच्छे से ध्यान नहीं दे रहे हैं।
अनिश सिंह ठाकुर, युवा
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मैंने इस शहर में ये देखा है कि कई बार अच्छी स्किल्स होने के बाद भी जॉब नहीं मिल पाती है। इसका कारण कहीं ना कहीं हमारी एजुकेशन प्रणाली में कमी होना भी है। कॉलेज के प्रोफेसर के साथ कोर्सेज भी अपडेट नहीं है। जिले के युवा वर्ग में काम करने की शिद्दत तो है, लेकिन उसे स्तर का काम उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
यश यादव, युवा
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छिंदवाड़ा में स्व-रोजगार की जरूरत है, बड़ी शहर में यह सोच पहले से ही काम कर रही है। यही कारण है कि वहां बड़ी संख्या में स्टार्टअप है। हमारा शहर इंडस्ट्री हब बन सकता है, लेकिन इसके लिए वैसे हालात बनाने होंगे। स्किल डेवलपमेंट के लिए यहां इन्क्यूबेटर की भी कमी है। युवाओं को भी ध्यान देने की जरूरत है।
सेजल, युवा
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हमारी शिक्षा प्रणाली में ही स्टार्टअप की जानकारी दी जानी चाहिए। इससे निश्चित तौर पर स्टार्टअप में काफी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। स्कूल-कॉलेज में स्किल्स लेबल पर बिल्कुल भी काम नहीं हो रहा है। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं के बच्चे भी अपने कॅरियर के प्रति जागरूक नहीं हैं। माता-पिता को भी ध्यान देने की जरूरत है।
अंजलि भांगरे, युवा
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शहर के युवा वर्ग में जागरुकता की भी कमी है। नौकरी के लिए वह भी प्रयास नहीं करता है। रूट लेबल पर क्लासेस में ही नौकरी की जानकारी प्रदान की जानी चाहिए। एक तरह से हमारे यहां क्वालिटी एजुकेशन की भी कमी है। कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी काम नहीं मिल रहा है। ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे युवा अपने ही गृह जिले में रहकर कार्य कर सके।
प्रीति साहू, युवा
जिले में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां पर एक साथ पांच से छह सौ विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा दे सकें। जबकि अन्य शहरों में यह व्यवस्था बहुत पहले हो चुकी है। छिंदवाड़ा में इन सुविधाओं की काफी जरूरत है। इसके अलावा स्टार्टअप कैसे शुरु करें, बजट कहां से आएगा इस पर भी युवाओं को शुरु से ही शिक्षित करना होगा।
सत्यम चौरे, युवा
जिले की कोई ऐसी विधानसभा नहीं है जहां के युवा बाहर जाकर नौकरी नहीं कर रहे हैं। 90 प्रतिशत लोग बाहर ही रोजगार के लिए जाते हैं। जबकि अब जरूरत यह है कि ऐसी व्यवस्था बने की हमें अपने ही शहर में रोजगार उपलब्ध हो सके। यह तभी संभव है जब स्टार्टअप तेज गति से हो। छोटे-छोटे उद्योग यहां खोले जाएं।
गजेन्द्र ठाकुर, युवा
Published on:
05 Mar 2024 12:36 pm
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