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यहां अमावस की रात में होती है मां काली की विशेष पूजा

मान्यता है कि खदान के भीतर मां काली कामगारों की सुरक्षा करती है।

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यहां अमावस की रात में होती है मां काली की विशेष पूजा

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छिंदवाड़ा. जुन्नारदेव. नगर में माता महाकाली का आगमन अमावस की काली रात में लगभग एक बजे हुआ। जहां पर युवा शक्ति मां काली पूजा समिति प्रांगण में माता महाकाली की प्रतिमा को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विराजमान किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में नगरवासी माता महाकाली की स्थापना के दौरान उपस्थित रहे। प्रतिमा विराजमान के दूसरे दिन सोमवार को पूजा पंडाल में जस गायन किया गया जिसमें जस मंडल द्वारा माता के जसों की शानदार प्रस्तुति दी गयी।

वहीं रोजना प्रात: 8.30 व रात्रि में 8 बजे आरती की जा रही है। इसके अतरिक्त नगर के वार्ड क्रमांक 7-8 आदर्श शिव गणेश मंदिर, माता काली मंदिर, तहसील रोड, दातला क्लब सहित अन्य स्थलों पर माता प्रतिमा विराजित की गई है।

मां काली की भक्ति अराधना कोयलांचल के लगभग सभी क्षेत्रों में विधि-विधान से की जा रही है। कोयलांचल क्षेत्र मे मां काली पूजा का विशेष महत्व है, प्रत्येक खदान परिसर में मां काली प्रतिमा स्थापित है । मान्यता है कि खदान के भीतर मां काली कामगारों की सुरक्षा करती है। कामगार मां काली दर्शन के बाद ही खदान के भीतर प्रवेश करते है।

परासिया क्षेत्र में विशेष रूप से ईडीसी परासिया, जाटाछापर, इकलेहरा, बडक़ुही, चांदामेटा, शिवपुरी, रावनवाड़ा, अंबाड़ा सहित अन्य स्थानों पर मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना एवं धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। बडक़ुही सहित अन्य स्थानों पर रविवार की मध्य रात्रि मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना, हवन अनुष्ठान आरती के बाद भंडारा प्रसाद वितरण किया गया।