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जंगलों में टपक रहे महुआ फूल, एकत्र करने पहुंच रहीं आदिवासियों की टोलियां

चार माह की रोजी-रोटी जुटाने में लगे वनवासी, समर्थन मूल्य कम होने से बढ़ नहीं पा रहा बाजार मूल्य

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अप्रेल के पहले सप्ताह में जंगल में महुआ के फूल टपकने लगे हैं। पेड़ों के नीचे फूलों को एकत्र करने आदिवासियों की टोलियां पहुंचने लगी हैं। अमरवाड़ा, बटकाखापा से लेकर तामिया, देलाखारी, बम्हनी व जुन्नारदेव के वन ग्रामों के मकानों में इन्हें सूखते देखा जा सकता है। इससे आदिवासी परिवार अपने चार माह की रोजी रोटी का इंतजाम कर रहे हैं।
देखा जाए तो महुआ का समर्थन छह साल पहले वर्ष 2019 में लघु वनोपज संघ की ओर से पूरे मप्र में 35 रुपए प्रति किलो तय हुआ था। तब से लेकर अब तक सरकार ने इसकी सुधि नहीं ली है। बढ़ोतरी के अभाव में बाजार में सेठ-साहूकार इस महुआ फूल को सूखने के बाद मन मुताबिक दामों पर खरीदते हैं। इस समय हर जगह आदिवासी महुआ फूलों को एकत्र करने में जुटे हैं। अलसुबह जंगल में उनकी टोलियां निकल पड़ती है। पेड़ के नीचे पहुंचकर इन फूलों को एकत्र करती है, फिर घरों में लाकर उन्हें सुखाती हैं। सूखने के बाद बाजार में साहूकारों को बेच देती हैं।

तापमान में बढ़ोतरी से आता है महुआ फूल

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार छिंदवाड़ा-पांढुर्ना जिले का कुल क्षेत्रफल 11815 वर्ग किमी हैं। उसमें वन क्षेत्र 4608.13 वर्ग किमी में हैं। जंगलों में महुआ के पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद हैं। होली के बाद महुआ के पेड़ फूलों से लद जाते हैं। अप्रेल में जैसे ही तापमान में बढ़ोतरी होती है, वैसे ही फूल गिरने लगते हैं।

महुआ का टर्नओवर दो करोड़ से ज्यादा

देखा जाए तो बाजार में महुआ का वार्षिक टर्न ओवर दो करोड़ रुपए से अधिक है। इससे लाखों आदिवासी परिवार जुड़े हुए हैं। ये व्यवसाय जून माह तक चलता है। इस राशि से आदिवासी अपने चार माह की रोटी का इंतजाम करते हैं, तो वहीं व्यवसायी भी लाखों रुपए कमाते हैं।

छह साल में नहीं बढ़ा महुआ का समर्थन मूल्य

वर्ष 2019 में महुआ का समर्थन मूल्य 35 रुपए किलो निर्धारित किया गया था। उसके बाद राज्य सरकार ने कभी भी मूल्य में बढ़ोतरी नहीं की। इसके चलते आदिवासियों को इसका सहीं मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उनका महुआ 20-30 रुपए किलो में बाजार में बिकता आ रहा है। लघु वनोपज संघ भोपाल के पदाधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

वन विभाग के कर्मचारियों ने कम ही खरीदा

वर्ष 2022 में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पूरे जिले में करीब 80 टन महुआ की खरीदी समर्थन मूल्य पर की थी। उसके बाद महुआ वन समितियों की ओर से कम खरीदा गया। अधिकारी कह रहे हैं कि समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए बजट ट्राइफेड लघु वनोपज समितियों को उपलब्ध कराता रहा है। अक्सर बाजार मूल्य समर्थन मूल्य से अधिक रहता है।

इनका कहना है

महुआ पेड़ों से फूल टपकने लगे हैं, जिसे एकत्र करने वनवासी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। फिलहाल महुआ फूल सूखकर बाजार मेें आना शेष है। उसके बाद ही इसका मूल्य तय होगा।
पंकज शर्मा, रेंजर छिंदवाड़ा