
poor women
मंतोष कुमार सिंह
छिंदवाड़ा. गरीबों के जीवन स्तर में सुधार के लिए सरकार द्वारा अनगिनत योजनाएं संचालित की जा रही हैं। फिर भी गरीबों के जीवन स्तर में खास बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 पर आधारित है। आज भी बड़ी आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है। छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में सबसे खराब स्थिति सिवनी जिले की है। यहां की 27.19 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। पेयजल के लिए ग्रामीण आबादी को प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख जाते हैं, तो इनकी परेशानी और बढ़ जाती है। झिरिया, नाला और कुएं से प्यास बुझाने की मजबूरी बन जाती है। छिंदवाड़ा में 14.93 प्रतिशत आबादी पीने के पानी से वंचित है। पातालकोट में स्थिति भयावह हो जाती है। कुएं और नदी-नाले सूख जाते हैं। लोगों को झिरिया पर निर्भर होना पड़ता है। झिरिया से भी पर्याप्त और शुद्ध पेयजल नहीं मिलता। बालाघाट की स्थिति भी बेहतर नहीं है। 24.44 प्रतिशत आबादी पीने के पानी के लिए मशक्कत कर रही है।
खाना पकाने के लिए ईंधन
छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में लगभग 40 प्रतिशत आबादी के पास खाना पकाने के लिए ईंधन नहीं है। जंगल से लकडिय़ां काटकर आदिवासी और ग्रामीण चूल्हे पर खाना पकाते हैं। उज्जवला योजना के तहत केंद्र सरकार रसोई गैस का सिलेंडर मुहैया तो करा रही है, लेकिन मुफ्त में सिलेंडर मिलने के बाद लोग रिफिल नहीं करा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह रसोई गैस सिलेंडर का महंगा होना बताया जा रहा है। छिंदवाड़ा में 29.50, बालाघाट में 39.66 और सिवनी में 42.07 प्रतिशत लोगों के पास खाना बनाने के लिए ईंधन नहीं है।
सिर ढकने के लिए छत
प्रदेश में आवासहीन लोगों के लिए मकान उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, फिर भी सभी के पास छत नहीं है। सिवनी में 41.30 प्रतिशत लोगों के पास पक्के मकान नहीं हैं। ये लोग आज भी कच्चे मकान में निवास करने के लिए मजबूर हैं। बालाघाट में 38.30 और छिंदवाड़ा में 27.29 प्रतिशत आबादी स्वयं के मकान से दूर है।
बिजली का आज भी हो रहा इंतजार
आदिवासी जिलों में बिजली की पहुंच भी शत-प्रतिशत गांवों तक नहीं हो पाई है। छिंदवाड़ा में 6.84, सिवनी में 11.22 और बालाघाट में 6.97 प्रतिशत लोग आज भी बिजली का इंतजार कर रहे हैं। इनके घर दीये और लालटेन से रोशन होते हैं। छिंदवाड़ा में 5.73, बालाघाट में 6.10 और सिवनी में 8.30 प्रतिशत आबादी के पास बैंक खाता भी नहीं है।
Published on:
03 Mar 2022 07:06 pm
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