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Special Story : आंवले की सब करते हैं पूजा, धार्मिक-वैज्ञानिक महत्व भी जान लें

सजग स्वसाधना मंडल ने अक्षय नवमी मनाई

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All amla worships, know the scientific importance

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छिंदवाड़ा/ सर्व जागृृति गण (सजग) परिषद के अन्तर्गत अखंड देश भक्ति-जन जागृृति अभियान से जुड़े लोगों ने मंगलवार को अक्षय नवमी मनाई। संस्था के संयोजक कृपाशंकर यादव ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी मंगलवार को दोपहर 12 से तीन बजे तक केंद्र सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय वानिकी अनुसंधान केन्द्र-कौशल विकास छिंदवाड़ा के पोआमा भाग-1 रोपणी-अनुसंधान एवं विस्तार वृृत सिवनी में आंवला नवमी व अक्षय नवमी को विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद परासिया रोड पर एमपीइबी कार्यालय परिसर में स्थापित हनुमान मंदिर के प्रांगण में आंवला के वृृक्ष की पूज करने के साथ रोपित किया गया।
सजग कार्यालय इएलसी हॉस्टल में तीन से चार बजे तक आंवला नवमी व अक्षय नवमी पर्व पर संगोष्ठी आयोजित कर चर्चा की गई। इसमें विभिन्न प्रबुद्धजनों ने अपने विचार व्यक्त किए। यादव ने बताया कि वर्तमान युवा पीढ़ी प्रकृति संतुलन को लेकर सजग नहीं है। समय के की आपा-धापी में सनातन संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। आंवला नवमी व अक्षय नवमी पर्व हमें प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है।
यह धार्मिक पर्व आंवला नवमी को अक्षय नवमी के रूप में मनाते हैं। आज के दिन आंवले के वृृक्ष के नीचे परिवार के सभी सदस्य भोजन करते हैं। विशेष तौर से महिलाएं वृृत रखकर आंवले के वृृक्ष का विधि-विधान से पूजन करतीं हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु ने कुष्मांडक नामक दैत्य को मारा था। आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने से पहिले तीन वनों की परिक्रमा की थी। उन्होंने बताया कि आंवले का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही स्वस्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
आंवले के वैज्ञानिक महत्व के बारे में संदर्भित किया है कि च्वनप्राश ऋषि ने आंवले को अमृृत तुल्य माना है। आंवले के घटक को अनेकों ओषधी में शामिल किया है। जैसे त्रिफला, च्वनप्राश अवलेह आदि। वैज्ञानिकों ने अनुसंधान में पाया कि आंवले में पाए जाने वाले विटामिन व मिनरल को अधिकतम तापमान पर भी गर्म करने पर गुणवक्ता समाप्त नहीं होती।
कार्यक्रम में इंजी. रोशनलाल माहोरे, रविन्द्रसिंह कुशवाह, डॉ. केएल पाल, लक्ष्मण राव दौडक़े, तिओफिल तिर्की, मुरलीधर परतेती, दयालसिंह विश्वकर्मा, मेवाराम विश्वकर्मा, शिवम यादव, रंजीता चंद्रवंशी, सरेज चंद्रवंशी, ज्योति बाई, सुन्दर बाई, देवकी बाई, शशिकांता, लक्ष्मी बाई, विजय सिंह कुसरे, महेन्द्र यादव, परशराम डेहरिया, भगत कुशवाह, राधे, सुरेश मालवी, सुन्दर ठेकेदार, मनोज यादव, दिलाप हारोड़े, गुलाब चन्द सोनी, दीपेन्द्र प्रसाद मालवी, शोभाराम बैठवार, मुरलीधर ओक्टे, अरुण जैन, अमरसिंग यादव आदि की सहभागिता रही।

यह भी जानें

बता दें कि आंवला को संस्कृत में अमरफल, आदिफल, आमलकी आदि नामों से जाना जाता है। आंवला सर्दी के मौसम में ताजा मिलता है। जनवरी-फरवरी में आंवला अपने पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। सर्दियों में ही इसका मुरब्बा, अचार, जैम आदि बनाए। आंवले में विटामिन- सी पाया जाता है। एक आंवले में विटामिन- सी की मात्रा चार नारंगी और आठ टमाटर या चार केले के बराबर मिलता है। इसीलिए यह शरीर की रोगों से लडऩे की शक्ति में महत्वपूर्ण है। विटामिन-सी की गोलियों की अपेक्षा आंवले का विटामिन-सी सरलता से पच जाता है। आंवले में पाए जाने वाले कार्बोहायड्रेटस में मुख्य है रेशेदार ‘पेक्टिन’। यह रक्तवाहिनियों के विकारों को नष्ट करने में सक्षम है। यह फल मधुरता और शीतलता के कारण पित को शान्त करता है। यह फल पितनाश्क होने के कारण पित-प्रधान रोगों की प्रधान औषधि है। कब्ज़ में आंवला रात को एक चम्मच पिसा हुआ पानी या दूध के साथ लेने से सुबह शौच साफ़ आता है। इससे आंते और पेट साफ रहता है। आंतरिक शक्ति बढऩे वाली औषधियों का प्रधान घटक आंवला ही है। आंवले में एक रसायन होता है, जिसका नाम सकसीनिक अम्ल है 7 सकसीनिक अम्ल बुढ़ापे को रोकता है और जीर्ण कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में अपना अच्छा योगदान देते है।