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Sports in college: राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय खिलाडिय़ों को लेकर नही गंभीर

प्रतिभा को निखारने नहीं हो रहे प्रयास

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छिंदवाड़ा. राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय द्वारा खिलाडिय़ों के प्रतिभा को निखारने के लिए विशेष पहल नहीं की जा रही है। दरअसल खेल से जुड़े जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय को नियमित अंतराल पर कैम्प का आयोजन करना चाहिए। विश्वविद्यालय से संबद्ध सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा के कॉलेजों में 50 से अधिक स्पोट्र्स अधिकारी हैं। विश्वविद्यालय को इनके अनुभव का फायदा उठाना चाहिए। खेल शिविर आयोजित कर खिलाडिय़ों को खेलों की नई तकनीकों से रूबरू कराने से अच्छे रिजल्ट मिलते। खिलाड़ी न केवल विश्वविद्यालय के लिए बेहतर प्रदर्शन करते बल्कि प्रदेश एवं देश का भी नाम रोशन करते। उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा विभाग के खेल कैलेंडर में 11 से अधिक प्रचलित खेल शामिल हैं। इसमें कबड्डी, खो-खो, बॉलीबॉल, फुटबॉल, कुस्ती, शतरंज, क्रिकेट, बैटमिंटन, कराते, वूशु, जुडो, एथलेटिक्स सहित अन्य खेल शामिल हैं। हर वर्ष महिला-पुरुष की टीमें कॉलेज स्तरीय, जिला स्तर, संभागस्तर, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेती हैं।

इंटर यूनिवर्सिटी तक प्रतिभा दिखा रहे खिलाड़ी
सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा के कॉलेजों में अध्ययन विद्यार्थी न केवल पढ़ाई बल्कि खेल में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से खिलाडिय़ों ने अपनी प्रतिभा का लोहा राज्य स्तर एवं इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भी मनवाया है। खेल से जुड़े जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय को चाहिए कि वे इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में शामिल हुए खिलाडिय़ों को ही चयनित करे और खेल शिविर का आयोजन करके उनकी प्रतिभा को निखारने का प्रयास करे। इससे देश को भी अच्छे खिलाड़ी मिलेंगे। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में प्रदेश की आठ विश्वविद्यालय की टीम भाग लेती है। इसमें राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा भी शामिल हैं। जो टीम राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेती है वह इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भी शामिल होती है। बीते कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि अपने विश्वविद्यालय की कई खेल टीम इंटर यूनिवर्सिटी स्पर्धा में भी पहुंच रही है।

300 खिलाडिय़ों को नहीं मिली खेल सामग्री
राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय खेल को बढ़ावा देने की बात तो दूर खिलाडिय़ों को सुविधाओं पर भी ध्यान नहीं दे रही है। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2022-23 में भाग लेने वाले लगभग 300 खिलाडिय़ों को खेल सामग्री नहीं प्रदान की है। दरअसल नियम के अनुसार जिले से राज्य स्तर तक कोई खिलाड़ी विश्वविद्यालय की तरफ से खेल रहा है तो उसका पूरा खर्चा विश्वविद्यालय उठाता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय टीम भी खर्चा देती है। इसमें टीए, डीए शामिल रहता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की टीम को खेल सामग्री भी मिलती है। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2021-22 एवं 2023-24 में सभी खिलाडिय़ों को खेल सामग्री दी, लेकिन वर्ष 2022-23 के खिलाडिय़ों को अब तक नहीं मिला है।

छिंदवाड़ा के प्रचलित खेलों को भी दे सकते हैं बढ़ावा
कई ऐसे खेल हैं जो छिंदवाड़ा जिले में काफी प्रचलित हैं। कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो कुछ खेल में माहिर हैं। अगर उन्हें समय से प्रशिक्षित किया जाए तो निसंदेह वे बहुत आगे जाएंगे। खेल से जुड़े जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय को इस पर ध्यान देना चाहिए।

इनका कहना है.
पीजी कॉलेज के खेल के नोडल कॉलेज होने की वजह से कई बार खिलाडिय़ों ने शिकायत की है। हमने विश्वविद्यालय से पत्राचार भी किया है। उम्मीद है कि खिलाडिय़ों को जल्द ही खेल सामग्री मिल जाएगी। जहां तक खेल शिविर के आयोजन करने की बात हैं तो इस संबंध में विश्वविद्यालय से चर्चा करेंगे। यह एक अच्छी पहल होगी।
डॉ. सुशील पटवा, खेल अधिकारी, पीजी कॉलेज