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Tribal Museum: प्रदेश का सबसे बड़ा आदिवासी संग्रहालय हो रहा तैयार, जायजा लेने पहुंचे ट्राइबल पीएस

- धीमे कामकाज पर फटकार - संग्रहालय का पुराना भवन भी देखा - जीर्णोद्धार व मरम्मत कार्य भी शीघ्र पूर्ण कराने के दिए निर्देश

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Tribal Museum:

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प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग डॉ. ई.रमेश कुमार शुक्रवार को अपने अल्प प्रवास पर छिंदवाड़ा पहुंचे और नवीन निर्माणाधीन श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने नवीन संग्रहालय के कैफेटेरिया, एंट्रेंस लॉबी, पार्किंग एरिया, संग्रहालय की सभी चार गैलरी, ग्राउंड फ्लोर का वर्कशॉप हॉल, प्रथम तल का वर्कशॉप हॉल, कार्यालय कक्ष, ओपन थियेटर, शौचालय आदि की व्यवस्था देखी। साथ ही कलेक्टर कार्यालय में बैठक लेकर संग्रहालय में एसी, फायर फाइटिंग, इंटरनल और एक्सटर्नल इलेक्ट्रिकल वर्क, सीसीटीवी कैमरे आदि की व्यवस्था के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संग्रहालय के निर्माण कार्य की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और हर कार्य की अलग-अलग पूर्णता तिथि निर्धारित करते हुए 15 सितंबर 24 तक संग्रहालय के सभी कार्य हर तरीके से पूरा कराने के सख्त निर्देश दिए।
उन्होंने कार्यपालन यंत्री पीआईयू और सम्बंधित ठेकेदार को एक वाट्सऐप ग्रुप बनाकर प्रतिदिन की प्रगति के बारे फोटोग्राफ के साथ अनिवार्य रूप से अपडेट कराने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने राज्य आदिवासी संग्रहालय के पुराने भवन का भी निरीक्षण किया और सभी कक्ष देखे। उन्होंने पुराने भवन का जीर्णोद्धार कार्य भी शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह, सीईओ जिला पंचायत पार्थ जैसवाल समेत अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।

यह है आदिवासी संग्रहालय की लागत

संग्रहालय के निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हुई थी। इसमें 24.19 करोड़ रुपए सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य के लिए एवं 5.8 करोड़ वन्या को संग्रहालय की साज सज्जा के लिए स्वीकृत किए गए थे। बाद में 2022 में ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल के पत्र के बाद इसमें संशोधन कर सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य के लिए 18 करोड़ और वन्या को साज सज्जा के लिए 12 करोड़ की स्वीकृति प्रदाय की गई, जिसे अब बढ़ाकर भारत सरकार ने 15 करोड़ कर दिया गया है। इस तरह नए संग्रहालय का निर्माण लगभग 33 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है।