
चित्रकूट. देश की अर्थ व्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित है और किसानों की विभिन्न समस्याओं व जैविक सम्पदाओं के संरक्षण संवर्धन को लेकर कृषि अनुसंधान परिषद काफी संजीदा है और इस दिशा में सतत प्रयत्नशील है। ये कहना है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्रा का। प्रख्यात समाजसेवी राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की आठवीं पुण्य तिथि पर आयोजित कृषक अधिकार संरक्षण राष्ट्रीय कार्यशाला कार्यक्रम में शिरकत करने आए कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक सहित कई कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खेती करने पर बल दिया। कार्यशाला में किसानों की आय दो गुनी करने व् उन्नत कृषि विषय पर चर्चा करते हुए अन्नदाताओं को देश के विकास का कर्णधार बताया गया। राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख द्वारा कृषि विकास के लिए किए गए विभिन्न विकासपरक प्रकल्पों पर भी चिंतन मंथन किया गया।
मैं अपने लिए नहीं अपनों के लिए हूँ: इस ध्येय वाक्य को जीवन का उद्देश्य बनाते हुए समाज के उत्थान के लिए अपना सबकुछ समर्पित करने वाले प्रख्यात समाजसेवी राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की आठवीं पुण्य तिथि पर आयोजित कृषि सम्बंधित राष्ट्रीय कार्यशाला में सम्बंधित क्षेत्र के दिग्गजों ने विभिन्न प्रकार के कृषि सुधार आधारित विचार रखे। कार्यक्रम में शिरकत करने आए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्रा ने कृषि व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की बात कही।
किसानों की सहभागिता के बिना देश का विकास सम्भव नहीं
कृषि अनुसंधान के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि किसानों की आय दो गुनी करने के लिए उनकी मेहनत का सीधा फायदा उन्हें मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा है कि कृषि विश्वविद्यालयों के छात्र गांवों में जाकर किसानों को कृषि की उन्नत विधियों के बारे में बताएं उन्हें अवगत कराएं। महानिदेशक ने कहा कि किसानों की आमदनी दुगुनी करना आज एक चुनौती का काम है और इसके लिए विश्वविद्यालयों के कुलपतियों व् गुरुजनों को अपने विद्यार्थियों के साथ मिलकर वृहद स्तर पर क्रांति लाने का काम करना होगा। बाजार के साथ किसानों को जोड़े बिना यह कार्य सम्भव नहीं।
नानाजी का जीवन अनुकरणीय
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न वक्ताओं ने राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख के जीवन को सभी के लिए अनुकरणीय बताया। नानाजी का जीवन निःस्वार्थ सेवाभाव के लिए समर्पित था। वक्ताओं ने कहा कि पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन को उनकी अकाल मृत्यु के बाद उनके सखा नानाजी देशमुख ने उनके ही नाम से आगे बढ़ाया। 1968 में दीनदयाल शोध संस्थान का जो बीजारोपण नानाजी ने किया था वह आज एक वट वृक्ष के रूप में परिवर्तित हो चुका है।
कृषकों को किया गया पुरस्कृत लगाई गई प्रदर्शनी
कार्यक्रम में उन्नतशील कृषकों को सम्मानित किया गया व् कृषि प्रदर्शनी भी लगाई गई। किसानों से जैविक विधि से खेती करने पर बल देते हुए उन्हें नानाजी के विकासपरक प्रकल्पों से सीख लेने का आह्वाहन किया गया।
Published on:
27 Feb 2018 07:59 am
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