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Chittorgarh: चंदा जोड़कर ग्रामीणों ने भगाए मच्छर, बजट डकार गए अफसर, आरोग्य मंदिरों की कागजों में ब्रांडिंग चमकी

Rajasthan Health Scam: डूंगला ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों का एक ऐसा वायरस फैला है, जिसने मरीजों के हक के लाखों रुपए के बजट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बीसीएमओ कार्यालय ने बिना सामान की पर्याप्त सप्लाई और बिना काम पूरा किए ही बजट का भुगतान कर दिया।

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डूंगला ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार, पत्रिका फोटो

डूंगला ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार, पत्रिका फोटो

Rajasthan Health Scam: सरकारी फाइलों में दवाइयां भी आ गईं, फॉगिंग का धुआं भी उड़ गया और आरोग्य मंदिरों की ब्रांडिंग भी चमक गई। लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि यह सब केवल अफसरों की तिजोरियों तक सीमित नजर आ रहा है।
डूंगला ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों का एक ऐसा वायरस फैला है, जिसने मरीजों के हक के लाखों रुपए के बजट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बीसीएमओ कार्यालय ने बिना सामान की पर्याप्त सप्लाई और बिना काम पूरा किए ही बजट का भुगतान कर दिया।

पेमेंट की सुपरफास्ट एक्सप्रेस

आमतौर पर सरकारी फाइलों पर धूल जमती है, लेकिन यहां की गति चौंकाने वाली है। आरोप है कि 17 फरवरी को दवाओं की डिमांड भेजी गई और बिना स्टॉक पहुंचे ही 18 मार्च को करीब चार लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। जबकि मैदानी स्तर पर डॉक्टर दवाओं की कमी का रोना रोते रहे।

चंदे की फॉगिंग, सरकारी बजट 'साफ'

विभाग ने कागजों में 1.82 लाख रुपए की फॉगिंग करवा दी। लेकिन हकीकत यह रही कि जब मच्छर कम नहीं हुए, तो चिकारड़ा के ग्रामीणों ने खुद की जेब से चंदा इकट्ठा किया और निजी स्तर पर फॉगिंग मशीन बुलाई। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर बजट खर्च हुआ, तो धुआं कहां उड़ा?

ब्रांडिंग के नाम पर बैंड बजाया

आयुष्मान आरोग्य केंद्रों के रंग-रोगन और ब्रांडिंग के नाम पर 98 हजार रुपये का बिल कथित तौर पर बिना काम पूरा हुए ही ठिकाने लगा दिया गया। धरातल पर कई केंद्रों की हालत अब भी जर्जर है।

ग्रामीणों का दर्द

साहब, हम सरकारी मदद की आस में बैठे थे, लेकिन यहां तो फॉगिंग का धुआं भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। अगर हम चंदा जमा करके मशीन नहीं बुलाते, तो बीमारियां पूरे गांव को निगल जातीं।

जिम्मेदारों से पत्रिका के तीखे सवाल

  • टेंडर का सच: बिना सामान मिले भुगतान के चेक पर साइन करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?
  • डॉक्टरों की गवाही: जब डॉ. हरिओम, डॉ. पंकज, डॉ. यतिन्द्र बुढानिया और डॉ. रोहित घासल जैसे चिकित्सा अधिकारी सुविधाओं को शून्य बता रहे हैं, तो बीसीएमओ कार्यालय किसे गुमराह कर रहा है?
  • फर्जी रिपोर्ट: काम पूरा हुए बिना ही कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र किसने और किस आधार पर जारी किया?

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

इस पूरे मामले में जब बीसीएमओ डॉ. लोकेश जिंगोनिया से सवाल किया गया, तो उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सफाई पेश की। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तर पर जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
दवाइयां आ चुकी हैं और रंग-रोगन का काम भी चल रहा है, जो एक-दो दिन में फाइनल हो जाएगा। दवाइयां ब्लॉक में प्राप्त होने के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई है। भुगतान में जल्दबाजी इसलिए हुई क्योंकि मार्च क्लोजिंग के बाद बजट लैप्स हो जाता और भुगतान नहीं हो पाता।
-डॉ. लोकेश जिंगोनिया, बीसीएमओ, डूंगला

सख्त कार्रवाई होगी

मामला संज्ञान में आने के बाद मैंने जांच कमेटी गठित कर दी है। पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. ताराचंद गुप्ता, सीएमएचओ, चित्तौड़गढ़

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