
एक हजार बेटों पर जन्मी 1028 बेटियां
राकेश कुमार गौतम
चूरू. बेटियों को बचाने के लिए राजस्थान पत्रिका व विभिन्न संगठनों की ओर से चलाए जा रहे अभियान अब रंग लाने लगे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पीसीटीएस आंकड़ों (लाइव बर्थ) के मुताबिक 2018 में शिशु लिंगानुपात में सुधार करने में चूरू प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा है। पहले स्थान पर बांसवाड़ा है। वहीं दिसंबर 2018 में चूरू जिले में एक हजार बेटों पर 1028 बेटियों ने जन्म लिया। एक जनवरी 2018 से दिसंबर 2018 तक जिले में 17255 बेटे व 17115 बेटियां पैदा हुई। कुल 34370 बच्चे पैदा है। इसके मुताबिक लिंगानुपत प्रति हजार बेटों पर 992 आ गया। सुधार की गति इसी तरह रही तो जल्द ही बेटों व बेटियों की संख्या बराबर हो जाएगी। वहीं 2011 की जनगणन के मुताबिक 2018 में प्रति हजार बेटों पर 89 बेटियों की संख्या बढ़ी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनोज शर्मा ने बताया कि बालिका लिंगानुपात में हुए सुधार में पहले नंबर पर बांसवाड़ा 1003, दूसरे पर चूरू 992, तीसरे पर हनुमानगढ़ 982, चौथे स्थान पर बाड़मेर 976, पांचवे स्थान पर जालोर 966, छठे पर राजसमंद 965, सातवें पर जौधपुर 964, आठवें पर सीकर 958, नवे पर चितौडगढ़ व टोंक 956 वहीं दसवें स्थान पर धौलपुर 955 रहा है। जबकि सबसे खराब स्थिति में कोटा जिले की रही है जहां पर बालिका लिंगानुपात 901, सवाईमाधोपुर व डूंगरपुर में 905 रही है। सामाजिक कार्यकर्ता राजन चौधरी ने बताया कि गत पांच वर्ष में जन्म लेने वाले जीवित जन्म शिशुओं के आंकड़ों पर किए गए अध्ययन के अनुसार बालिका लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बेटियां अनमोल है, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान तथा पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण जागरूकता पैदा हुई है। बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी बदलाव आ रहा है लेकिन बेटियों के प्रति भेदभाव पूर्णतया समाप्त करने के लिए अभी और जागरूकता लानी होगी।
यह है प्रदेश में स्थिति
वर्ष 2017 में 13 लाख 83 हजार 99 बच्चे पैदा हुए जिनमें से सात लाख 11 हजार 551 लडके व 6 लाख 71 हजार 548 लड़कियां पैदा हुई। इसके अनुसार बालिका लिंगानुपात 943 था। इसी तरह वर्ष 2018 में जनवरी से दिसंबर तक 13 लाख 55 हजार 486 बच्चें पैदा हुए जिनमें से छह लाख 95 हजार 944 लड़के व छह लाख 59 हजार 542 लड़कियां पैदा हुई जिसके अनुसार जीवित जन्म शिशु दर बालिका लिंगानुपात 948 है। आंकड़े बताते हैं प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार हो रहा है।
शेखावाटी में 2018 में इतने बेटों पर जन्मी बेटियां
चूरू
बेटा 17255
बेटी 17115
कुल 34370
लिंगानुपात 992
सीकर
बेटा 22770
बेटी 21806
कुल 44576
लिंगानुपात 958
झुंझुनूं
बेटा 14785
बेटी 13946
कुल 28731
लिंगानुपात 943
अप्रेल 2018 से दिसंबर तक प्रति हजार बेटों पर जन्मी बेटियों की स्थिति
अप्रले में प्रति हजार बेटों पर 990
मई में प्रति हजार बेटों पर 1015
जून में प्रति हजार बेटों पर 925
जुलाई में प्रति हजार बेटों पर 930
अगस्त में प्रति हजार बेटों पर 950
सितंबर में प्रति हजार बेटों पर 930
अक्टूबर में प्रति हजार बेटों पर 1044
नवंबर में प्रति हजार बेटों पर 950
दिसंबर में प्रति हजार बेटों पर 1028
पांच साल में इतने बच्चे पैदा हुए (लाइव बर्थ)
वर्ष कुल बच्चे बालक बालिका
2013-14 38065 19602 18463
2014-15 36974 19106 17868
2015-16 36298 18604 17694
2016-17 36794 18781 18013
2017-18 35761 18067 17694
शेखावाटी में सबसे खराब स्थिति झुंझुनूं की
चाइल्ड सेक्स रेशियों में सुधार के माने में शेखावाटी में झुंझुनूं की स्थिति सबसे खराब है। यहां अभी प्रति हजार बेटों पर 57 बेटियां कम पैदा हो रही हैं।
Published on:
24 Jan 2019 12:06 pm
