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चूरू में पांच साल में टीबी से 167 मरीजों की मौत

भारत सरकार 202५ तक भारत को टीवी मुक्त देश बनाने के लिए मुहिम चला रही है लेकिन जिले में आज भी टीबी से प्रतिवर्ष 13 से अधिक मरीजों की मौत हो जा रही है
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चूरू में पांच साल में टीबी से 167 मरीजों की मौत

चूरू.

भारत सरकार 202५ तक भारत को टीवी मुक्त देश बनाने के लिए मुहिम चला रही है लेकिन जिले में आज भी टीबी से प्रतिवर्ष 13 से अधिक मरीजों की मौत हो जा रही है। बीते पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो चूरू में कुल 176 टीबी मरीजों की उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण रहा उपचार में लापरवाही व बहुत देर से उपचार करवाना। टीबी विश्व में मौत के टाप 10 कारणों में शामिल है। टीबी से बचने के लिए और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही 24 मार्च को विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस मनाया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2017 में विश्व में 10 मिलियन व्यक्ति टीबी से संक्रमित हुए और 1.6 मिलियन मरीजों की मौत हो गई। इस साल एक मिलियन बच्चे भी टीबी से ग्रसित हुए और 2.30 लाख बच्चों की इससे मौत हो गई। 2000 से 2017 तक 54 मिलियन रोगियों की जिंदगी को टीबी से बचाया जा चुका है। भारत में टीबी से करीब 28 लाख मरीज पीडि़त हैं। प्रतिदिन चार से छह हजार मरीज नए मिल रहे हैं। चूरू में इस साल अब तक 333 मरीज टीबी के आ चुके हैं। इसमें एमडीआर के 138 व एक्सडीआर के 6 मरीज उपचाराधीन हैं। 2018 में जिले में 2408 मरीज पंजीकृत हुए थे।

जानिए क्या है टीबी


पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डा. मोहम्मद आरिफ ने बताया कि टीबी (क्षय रोग) एक संक्रामक रोग है जो माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु से होता है। मुख्यत: यह फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह खानदानी बीमारी एवं अनुवांशिक रोग नहीं है। इसके जीवाणु हवा के माध्यम से एक मरीज से दूसरे व्यक्ति में आ जाते हैं। एमडीआर व एक्सडीआर मरीज काफी गंभीर स्थिति में होते हैं। इस श्रेणी के मरीजों में कुछ दवाएं निष्प्रभावी हो जाती हैं। इसका उपचार काफी महंगा है लेकिन सरकार निशुल्क उपलब्ध करा रही है।

टीबी के प्रकार

डा. आरिफ ने बताया कि सबसे ज्यादा टीबी फेफड़ों की होती है जिसे पल्मोनेरी टीबी कहते हैं। लेकिन यह, मुंह, गला, व यूट्रस, मूत्राशय, लीवर, किडनी आदि सहित शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। इसके अलावा एक्स्ट्रा पल्मोनेरी टीबी होती जो सरवाइकल, गर्भाशय, इन्टेस्टाइन, हड्डियों, ब्रेन, मेनिनजाइटिस टीबी होती है।

जानिए किसे अधिक खतरा
-ऐसे लोग जो फेफड़े व श्वास नली के टीबी रोगियों के साथ लम्बा समय बिताते हैं
- उन लोगों को जिनकी प्रतिरक्षण प्रणाली कमजोर हो जैसे कैंसर, जो लिम्फोमा या हॉजनिक रोग से पीडि़त होते हैं
- ऐसे लोग जो रोग प्रतिरक्षण तंत्र को प्रभावित करने वाली दवा लेते हैं जैसे कोराटिको स्टीरॉयड, साइक्लोस्पोरीन, रसायन चिकित्सा की दवाई लेते हैं
- जो एचआईवी से पीडि़त हैं

टीबी को मिटाने के लिए शुरू की योजना
सीएमएचओ डा. मनोज शर्मा ने बताया कि टीबी के मरीजों की संख्या कम नहीं होने पर सरकार ने मरीजों व निजी चिकित्स्कों के लिए निक्षय पोषण योजना शुरू की है। इसके तहत मरीजों को छह महीने कोर्स के लिए 3000 रुपए व प्रतिमाह पांच सौ रुपए दिए जाते हैं। वहीं निजी चिकित्सकों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक मरीज के रजिस्ट्रेशन कराने पर एक हजार रुपए देती है। यह राशि दो किस्तों में दी जाती है। पांच सौ रजिस्टे्रशन और पांच उपचार करने के बाद। जिले में जनवरी 2018 से फरवरी 2019 तक 1728 टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत 23 लाख 44 हजार 500 रुपए दिए जा चुके हैं।