5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ताल छापर अभयारण्य से जुड़ी बड़ी खबर, जानिए 300 हरिणों को यहां ले जाने की तैयारी

278 हैक्टेयर जमीन अधिग्रहित, जमीन के चारों तरफ खाई खुदवाई
2 min read
Google source verification
churu patrika news

churu patrika news

चूरू.

आठ सौ हैक्टेयर में फैले विश्व विख्यात ताल छापर कृष्ण मृग अभयारण्य में बढ़ रहा हरिणों का दबाव अब जल्द ही कम होगा। हरिणों की अधिकता को देखते हुए सरकार ने करीब 22 किमी दूर जसवंतगढ़ ग्राम पंचायत की बीड़ में 278 हैक्टेयर भूमि हरिणों की शिफ्टिंग के लिए आरक्षित कर वन विभाग को आवंटित कर दी है। स्वीकृति के बाद वन विभाग ने यहां काम भी शुरू कर दिया। खाई का काम पूरा होने के बाद अंदर अब घास उगाने का काम शुरू कर दिया गया है। घास उगने के बाद ताल छापर से करीब 300 हरिण शिफ्ट किए जाएंगे।

छह किलोमीटर खाई का काम पूरा

जानकारी के मुताबिक पुराना काल कुआं के पास कसुम्बी-सुजानगढ़ कच्चे मार्ग के पास 278 हैक्टेयर भूमि के चारों तरफ करीब छह किमी लम्बी और चार फीट ऊंची खाई बनवा दी गई है। खाई के चारों तरफ करीब चार फीट गड्ढ़ा भी खुदवा दिया गया है। खाई का पूरा कराने में करीब १५ लाख रुपए लगे हैं। इसके अलावा बीड़ में स्थित झाडिय़ों को भी निकलवा दिया गया है।

ताल छापर से लाकर लगा रहे घास

अब घास उगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बीड़ में पानी रोकने के लिए मृदा एवं जल संरक्षण के तहत ट्रेंच बनाकर(क्यारियां) घास की बिजाई कर दी गई है। इसके अलावा ताल छापर में विख्यात घासों की खुदाई करवाकर मिट्टी सहित यहां लगवा दिया गया है। पांच साल तक लगातर विकसित करने का काम चलता रहेगा। लेकिन घास उगने के बाद अगले साल जनवरी व फरवरी तक हरिणों को शिफ्ट कर दिया जाएगा।

पानी के लिए बनेगा एक तालाब

हरिणों को पानी के लिए एक बड़ा तालाब बनाया जाएगा। तालाब तक पानी लाने के लिए पाइप लाइन भी डाली जाएगी। पीएचईडी से पेयजल का कनेक्शन भी लिया जाएगा।


ताल छापर में तीन गुना अधिक हरिण

ताल छापर अभयारण्य में हरिणों का घनत्व करीब तीन गुना बढ़ गया है। वन्यजीव विशेषज्ञ सूरतसिंह पूनिया ने बताया कि एक हरिण के लिए करीब एक हैक्टेयर भूमि की जरूरत होती है। इस हिसाब से छापर में जमीन की उपलब्धता के मुताबिक हरिणों की संख्या तीन गुना अधिक है। ऐसे में तीन सौ हरिणों के शिफ्ट होने से कुछ दबाव कम होगा।

बढ़ेगा पर्यटन

जसवंतगढ़ में हरिणों के शिफ्ट होने से जसवंतगढ़ में पर्यटन व्यवसाय भी बढ़ेगा। लोगों को रोजगार भी मिलेंगे और छोटे होटल व्यवसाय विकसित होंगे। क्षेत्रिय के अलावा बाहरी पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा।

अभयारण्य की वर्तमान स्थिति

वन्यजीव : संख्या
काले हरिण : 2986
चिंकारा : 113
नील गाय : 107
सियार गीदड़ : ०1
भेडिय़ा : 06
जंगली बिल्ली : 33
मरू बिल्ली : 37
मरू लोमड़ी : 85
लोमड़ी : 51
बड्र्स ऑप-प्रे : 331
मोर : 177
सांडा : 2120
खरगोश : 74
साही : 12

(वन्यजीवों के आंकड़े वन विभाग के मुताबिक)

''सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद हरिणों की शिफ्टिंग के लिए काम शुरू कर दिया गया है। हरिणों की सुरक्षा के लिए खाई बनवा दी गई है। चारे के लिए घास लगाने का काम चल रहा है। घास उगने के बाद हरिणों को शिफ्ट करने का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2017-18 में सरकार से 40 लाख रुपए भी मिले थे।''

दिलीप सिंह, सहायक वन सरंक्षक व ताल छापर अभयारण्य प्रभारी, चूरू