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स्वाइन फ्लू की चपेट में तीन वर्षीय बालक, घर पहुंची टीम

सुजानगढ़ शहर के वार्ड 15 में तीन वर्षीय बालक को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद बुधवार को चिकित्सा महकमे की टीम ने पीडि़त के घर पहुंचकर सर्वे किया।
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स्वाइन फ्लू की चपेट में तीन वर्षीय बालक, घर पहुंची टीम


23 परिजनों को दी दवा, दो के सैंपल लिए
चूरू/ सुजानगढ़. शहर के वार्ड 15 में तीन वर्षीय बालक को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद बुधवार को चिकित्सा महकमे की टीम ने पीडि़त के घर पहुंचकर सर्वे किया। जानकारी के मुताबिक तीन वर्षीय बालक अमन को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि होने के बाद रतनगढ़ व सुजानगढ़ की चिकित्सा विभाग की टीमें उसके घर पहुंची। डा. मनस्वी के नेतृत्व में टीम सदस्य संजयकुमार व मोहम्मद शरीफ ने घर के सभी 23 सदस्यों को स्वाइन फ्लू प्रतिरोधक दवा दी। बीसीएमओ कार्यालय के टीम कार्मिक वासुदेव शर्मा ने बताया कि 25 वर्षीय गर्भवती सीमरन व नौ वर्षीय नाजमीन के सैंपल लेकर जांच के लिए बीकानेर भेजे गए हैं। चिकित्सा विभाग के मुताबिक तीन वर्षीय अमन को सर्दी-जुकाम की शिकायत होने पर परिजन उपचार के लिए उसे 24 दिसंबर को डा. प्रकाश काछवाल के पास लेकर पहुंचे।यहां चिकित्सक ने संदिग्ध डेंगू रोगी मानकर उपचार के लिए जयपुर भेज दिया। जयपुर में जेके लोन अस्पताल में भर्ती कर जांच की गई तो अमन में डेंगू की बजाय स्वाइन फ्लू रोग के लक्षण पाए गए। गौरतलब है कि तेज सर्दी के शुरू होने के साथ ही जिले में स्वाइन फ्लू अचानक सक्रिय हो गया है। बीते एक सप्ताह में तीन लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। वर्ष 2018 में अब तक 11 मरीज पॉजिटिव मिल चुके हैं। जिसमें तीन की मौत हो चुकी है। मौत के बाद चिकित्सा महकमा कम सक्रिय दिख रहा है। इसके लिए चूरू के भरतीया अस्पताल में स्वाइन फ्लू का वार्ड भी बना दिया है। इस संक्रामक रोग के अचानक बढऩे से क्षेत्र के लोगों में भय व्याप्त है। बीते कुछ वर्षों की बात करें तो 2009 में सर्वाधिक नौ मौत स्वाइन फ्लू से ही हुई थी। जबकि 2012 में छह व 2013 में कुल पांच लोगों की मौत हुई थी। चिकित्सा विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है।

विषाणु जनति रोग है स्वाइन फ्लू
चिकित्सा विभाग की मानें तो विभाग के अधिकारियों की मानें तो स्वाइन फ्लू विषाणु जनित रोग है। जो एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाने से फैलता है। चिकित्सकों के मुताबिक सर्दी, खांसी, जुखाम व बुखार से ग्रसित होने पर तत्काल अस्पातल में जाकर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक लक्षणों को ध्यान में रखते हुए समय पर उपचार लेने से इस रोग से ग्रसित होने की संभावना क्षीण हो जाती है।