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हाले हिरणों के साथ जिले में रफ्तार से बढ़ रहा चिंकारा का कुनबा

विश्व विख्यात ताल छापर कृष्ण मृग अभयारण्य में हरिणों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। वहीं इधर, जिले में भी चिंकारा के कुनबे में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
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हाले हिरणों के साथ जिले में रफ्तार से बढ़ रहा चिंकारा का कुनबा

चूरू. विश्व विख्यात ताल छापर कृष्ण मृग अभयारण्य में हरिणों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। वहीं इधर, जिले में भी चिंकारा के कुनबे में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। हरिणों व चिंकार का कुनबा पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। पर्यटकों को एक साथ बड़े समूह में होने से हरिण आकर्शित करते हैं। इसके अलावा शिकार की प्रचूरता के कारण अभयारण्य में भेडिय़ों की संख्या भी इस वर्ष बढ़कर सात हो गई है। हरिणों की बढ़ती संख्या के कारण अभयारण्य का मैदान भी कम पडऩे लगा है।


जिले में चिंकारा 34 सौ के पार
गणना रिपोर्ट के मुताबिक (छापर अभयारण्य को छोड़कर) जिले में चिंकारा का कुनबा 34 सौ के पार पहुंच गया है। छापर के साथ-साथ जिले में भी वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर काले हरिण भी इस दिखे हैं। मोरों की संख्या भी बढ़ी है। लेकिन गिद्धों के कुनबे में वृद्धि नहीं होना चिंता का विषय का है। यह पर्यावरण को स्वच्छ रखने में काफी बड़ी भूमिका निभाते हैं। एसीएफ राकेश दुलार ने बताया कि चूरू तहसील में भी वन्यजीवों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनकी देख-रेख के लिए पुख्ता इंतजाम किया जा रहा है।


बढ़ रहे वन्यजीव छोटा पड़ रहा अभयारण्य
वन्य जीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन अभयारण्य का क्षेत्रफल छोटा पड़ता जा रहा है। इसके विस्तार के लिए बनी योजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकली। वन विभाग के प्रधान वन संरक्षक सहित कई अधिकारी इसके लिए आकर चले गए। अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला। जसवंतगढ़ में बीड़ में काम शुरू होकर बंद हो गया। बजट के अभाव में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।


अभयारण्य पर एक नजर
- अभयारण्य का क्षेत्रफल 800 हैक्टेयर
- कृत्रिम चारागाह, वर्षा व परंपरागत जल स्रोत
- एक रेस्क्यू सेंटर
- पेट्रोङ्क्षलग के लिए एक गाड़ी
- एक एसीएफ, नौ वृक्ष पालक, एक चौकीदार, एक बेलदार व
एक चालक के पद सृजित हैं
- प्रतिवर्ष पहुंचते हैं करीब 12 हजार पर्यटक


छापर अभयारण्य मे वन्यजीवों की स्थिति
वन्य 2019 2018 2017 2016
काले हरिण 318 0 298 6 28 77 26 73
नील गाय 109 107 106 101
चिंकारा 116 113 111 107
बड्र्स ऑप-प्रे 337 331 327 316
भेडिय़ा 07 06 05 03
जंगली बिल्ली 34 33 31 26
मरू बिल्ली 39 37 34 28
लोमड़ी 52 51 49 42
मरू लोमड़ी 8 7 8 5 34 28
मोर 207 177 159 151
सेही 13 12 11 08
जंगली ***** 53 50 48 35
सियार गिदड़ 01 01 01 01
साण्डा 12525 12120 10125 8 76 2


अभयारण्य के अलावा जिले में वन्यजीवों की स्थिति
काला हरिण 11
चिंकारा 3447
नीलगाय 18 39
बड्र्स ऑप प्रे 126
मोर 16 37
सांडा 18 19
मरू लोमड़ी 312
लोमड़ी 200
मरू बिल्ली 6 2
जंगली बिल्ली 194


इनका कहना है...
जिले में चारे-पानी की प्रचूरता व शिकारी वन्यजीवों की संख्या कम होने से वन्यजीवों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। पर्यावरण व पर्यटन की दृष्टि से काफी अच्छा है। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए पूरा ध्याय दिया जा रहा है।
बनवारी लाल शर्मा, उप वन संरक्षक, चूरू