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किताबी शिक्षा के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक परंपराओं का ज्ञान जरूरी

साहवा बाजार में पड़ौसी युवा संसद कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सांसद राहुल कस्वां ने कहा कि युवाओं को अपनी किताबी शिक्षा के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक परम्पराओं को भी समाहित रखना चाहिए।
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किताबी शिक्षा के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक परंपराओं का ज्ञान जरूरी

साहवा. साहवा बाजार में पड़ौसी युवा संसद कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सांसद राहुल कस्वां ने कहा कि युवाओं को अपनी किताबी शिक्षा के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक परम्पराओं को भी समाहित रखना चाहिए। वे गुरुवार को लमोरिया धर्मशाला में नेहरू युवा केन्द्र के तत्वावधान में युवा जागृति संस्थान रैयाटुण्डा के सौजन्य से आयोजित पड़ोसी युवा संसद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कस्वां ने कहा कि आज के इस दौर में युवा केवल किताबी शिक्षा को केन्द्र बिन्दु मान कर रोजगार के अवसर तलाशने में लगा रहता है। इससे कई बार उनकी खुद की पहचान, संस्कृति व संस्कार तक खो जाते हैं, जो मूल शिक्षा के हिस्सा होते हैं। नेहरू युवा केन्द्र संगठन पूरे देश में इसी पहचान को बनाए रखते हुए शिक्षा देने व ग्रहण करने के लिए काम करता है। उन्होंने युवाओं से किताबी शिक्षा के साथ-साथ अपने समाज, क्षेत्र से जोड़े रखने वाले कार्यक्रमों में भागीदारी बराबर बनाए रखने की अपील की। इस अवसर पर सुभाषचन्द्र बोस शिक्षण समूह के सह निदेशक गुरुदत्त ढाका ने युवाओं को अंधविश्वास से दूर रह कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने सऊदी अरब की जेल में बंद चूरू व नागौर के चार युवाओं की रिहाई बाबत प्रधानमंत्री के नाम सांसद को ज्ञापन सौंपा। कार्यशाला में आयोजक संस्थान के शीशपाल महला रैयाटुण्डा, नीलकमल कस्वां, राहुल शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए। अध्यता काशीराम आर्य ने की। मंचस्थ अतिथि जगतपाल शर्मा, कैलाश पारीक, संजय शर्मा आदि ने भागीदारी निभाई। वहीं बंशीराम कस्वां, लिछमणराम सहू, घड़सीराम, अमीलाल सहारण, रामस्वरूप कस्वां, नरेश पारीक, प्रताप नाई, दयाराम जांगिड़, देवीलाल गोस्वामी, बलेन्द्र भारद्वाज आदि उपस्थित थे।