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Big Breaking : राजस्थान के इन 13 जिलों में किसानों का ऋण नहीं होगा माफ, अब फंस गया है ये पेच

Rajasthan farmers loan waiver scheme : राजस्थान सरकार ने बजट 2018 में किसानों के 50 हजार तक के ऋण माफ करने की घोषणा की थी।

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rajasthan kisan loan

चूरू.

सरकार की ओर से की शुरू की गई फसली ऋण माफी योजना असिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए महज दिखावा साबित हो रही है। सरकार ने ऋण माफ करने के लिए गजट में सीमांत व लघु कृषकों की जो परिभाषा दी है वह सिंचित और असिंचित सभी के लिए एक समान कर दी है। जबकि अंसिचित क्षेत्र के किसानों के लिए भारत सरकार ने अलग से वर्गीकरण किया है, जिसका ओलावृष्टि, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में पालन किया जा रहा है।








ऋण माफी योजना 2018 में राजस्थान के सैकड़ों किसानों की उम्मीदों पर फिर गया पानी। 13 जिले योजना से बाहर


ऐसा नहीं करने से प्रदेश के 13 जिले चूरू, बीकानेर , नागौर, जालौर, पाली, जोधपुर , जैसलमेर , बाड़मेर, झुंझुनूं, अजमेर , डूंगरपुर, उदयपुर , बांसवाड़ा के सैकड़ों किसान योजना से बाहर हो रहे हैं। पत्रिका के पास उक्त वर्गीकरण के लिखित आदेश की प्रतियां मौजूद हैं।

जानकारी के मुताबिक राजस्थान सरकार के आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग की ओर से 11 अप्रेल 2007 को ओलावृष्टि से प्रभावित डीडीपी एवं डीपीएपी के जिलों में लघु एवं सीमांत कृषकों को कृषि अनुदान दिए जाने के लिए किसानों को परिभाषित करते हुए सिंचित और असिंचित के लिए अलग-अलग वर्गीकरण किया था।

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उक्त वर्गीकरण को राजस्थान राज्य खाद्य आयोग ने भी 31 अगस्त 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में भी लागू किया जा चुका है। उक्त दोनों आदेश विभागों के प्रमुख शासन सचिव की ओर से जारी किए गए थे। केन्द्र सरकार ने उक्त किसानों के उक्त वर्गीकरण को एक अप्रेल 1991 को डीडीपी/डीपीएपी जिलों के लिए लागू किया था।

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जानिए किस तरह भारत सरकार ने किया है किया था वर्गीकरण

जिला सीमांत लघु

सिंचित असिंचित सिंचित असिंचित
जैसलमेर/बाड़मेर 0.75 है. 5.00 है. 1.50 है. 10 है.

बीकानेर, नागौर, जालौर, पाली,
चूरू, जोधपुर 0.75 है. 3.50 है. 1.50 है. 7.00 है.
झुंझुनू, अजमेर

डूंगरपुर, उदयपुर
बांसवाड़ा 0.75 है. 1.50 है. 1.50 है. 3.00 है.

किसानों को गजट में इस तरह किया परिभाषित


राज्य सरकार ने फसली ऋण माफी योजना 2018 के गजट नोटीफिकेशन में एक हैक्टेयर भूमि तक के किसानों को सीमांत व एक से दो हैक्टेयर तक भूमि पर खेती करने वाले किसानों को लघु कृषक की श्रेणी में रखा है, जो पूरे प्रदेश के लिए लागू की गई है। असिंचित क्षेत्रों के किसानों को अलग से परिभाषित नहीं किया गया।

केन्द्र सरकार ने इसलिए किया परिभाषित


किसान नेता निर्मल प्रजापत व उमराव सहारण ने बताया कि अंसिचित क्षेत्रों के जिलों में भूमि काफी अधिक है। उक्त जिलों में पानी का अभाव व बड़े स्तर पर रेगिस्तान है। इसलिए केन्द्र सरकार ने यहां के किसानों को राहत देते हुए वर्गीकरण में एक अलग पैमाना निर्धारित किया था। वर्तमान सरकार ने आधे-अधूरे किसानों को ऋण माफी का लाभ देकर खानापूर्ति कर ली। लेकिन केन्द्र सरकार के उक्त वर्गीकरण की पालना नहीं की। यह असंचित क्षेत्र के किसानों के साथ बड़ा अन्याय है।

चूरू में 250 करोड़ रुपए होंगे माफ


ऋण माफी योजना के लिए यदि 2007 के आपदा प्रबंधन एवं 2013 के खाद्य सुरक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के आदेश को अंसिचित क्षेत्र के जिलों में लागू किया जाता है तो वर्तमान से करीब पांच गुना किसानों को इसका लाभ मिलेगा। केवल चूरू में ही 250 करोड़ रुपए माफ होंगे। लेकिन राज्य सरकार की ओर से ऋण माफी 2018 में किसानों को जिस तरह परिभाषित किया गया है उससे चूरू के केवल 50 करोड़ रुपए के ऋण माफ होंगे। ऐसे में सरकार के उक्त आदेश से करीब 200 करोड़ रुपए ऋण माफ नहीं होंगे।

इनका कहना है...


केन्द्र सरकार ने डीडीपी/डीपीएपी के जिलों के किसानों को किस तरह परिभाषित किया है। उसकी उन्हें जानकारी नहीं है। यदि केन्द्र सरकार ने इस तरह का कोई आदेश जारी किया है तो उसका अवलोकन मुख्यमंत्री से चर्चा कर उक्त जिलों के किसानों को उसका लाभ दिलवाया जाएगा।

-राजेन्द्र राठौड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री, राजस्थान