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चूरू में झींगा पालन करने वाले किसानों को बिजली विभाग का बड़ा ‘झटका’, सांसद राहुल कस्वां ने कही यह बात

खारे पानी में झींगा पालन किसानों के लिए उम्मीद बना था, लेकिन महंगी बिजली ने इसे संकट में डाल दिया है। 12 रुपए प्रति यूनिट तक बिजली दरें और भारी जुर्माने किसानों की कमर तोड़ रहे हैं।

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चूरू

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Rakesh Mishra

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अंकित साईं

Dec 29, 2025

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फाइल फोटो- पत्रिका

चूरू जिले के उन इलाकों में, जहां पानी अत्यधिक खारा है और परंपरागत खेती करना मुश्किल है। ऐसे में किसानों ने झींगा पालन को आजीविका का विकल्प बनाया है। यह उनके लिए आय का अच्छा जरिया बन रहा है, लेकिन अब महंगी बिजली ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। यहां बिजली की दरें 12 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई हैं।

झींगा पालन पर बिजली की मार

झींगा पालन में बिजली का खर्च कुल लागत का करीब 50 प्रतिशत होता है, क्योंकि तीन माह की अवधि के दौरान पानी में पर्याप्त ऑक्सीजन बनाए रखने के लिए लगातार पंप चलाने पड़ते हैं। हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में झींगा पालन को कृषि गतिविधि माना जाता है, इसलिए वहां किसानों को सस्ती बिजली मिलती है। वहीं राजस्थान में इसे खेती नहीं, बल्कि व्यावसायिक गतिविधि माना जाता है, जिस कारण यहां सबसे महंगी बिजली दरें लागू की जा रही हैं।

किसान मजबूर

कुछ किसान सस्ती बिजली का लाभ लेने का प्रयास करते हैं तो उन पर 7 से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। क्षेत्र के सांसद राहुल कस्वां ने बताया कि चूरू के कई इलाकों में केवल बारिश के भरोसे बाजरा या मूंग की एक ही फसल हो पाती है। इसके अलावा दूसरी कोई खेती संभव नहीं है। ऐसे में झींगा पालन किसानों के लिए बड़ा सहारा बना है। सरकार को इसे प्रोत्साहन देना चाहिए, लेकिन महंगी बिजली के कारण यह काम बंद होने की कगार पर है।

15-20 लाख का घाटा

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में इस तरह की गतिविधियों के लिए अलग और सस्ती बिजली दरें तय की गई हैं। इस समस्या को वे विभागों के समक्ष उठा चुके हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। महंगे जुर्माने और बिजली कनेक्शन काटे जाने से कुछ किसान अदालत का सहारा ले चुके हैं। यदि फसल नष्ट हो जाती है तो 15-20 लाख रुपए तक का निवेश डूब जाता है। मजबूरी में कई किसानों ने जुर्माना भर दिया है, जबकि अन्य सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं।

300 किसान इस काम में लगे

ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव अजिताभ शर्मा ने इस संबंध में कहा कि उन्हें फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन यदि ऐसे किसानों के लिए अलग बिजली दर तय की जा सकती है तो इस पर विचार किया जाएगा। सरकार से चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। झींगा पालन उन इलाकों में तेजी से फैल रहा है, जहां भूमि में लवणता अधिक है। करीब 300 किसान इस कार्य से जुड़े हैं और यह गतिविधि अब बीकानेर, श्रीगंगानगर और नागौर जिलों में भी विस्तार पा रही है।