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खतरे में आधी आबादी की सुरक्षा

मासूम बेटियां, युवतियां, महिलाएं दूषित मानसिकता वाले लोगों की शिकार
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चूरू.

जिले के कोने-कोने से दुष्कर्म की घटनाएं आए दिन सामने आ रही है। जिनमें मासूम बेटियां, युवतियां, महिलाएं दूषित मानसिकता वाले लोगों की शिकार हो रही है। ऐसे में बेटी बचाओ का नारा चूरू जिले में कारगर साबित नहीं हो रहा है। तेजी से बढ़ती ऐसी घटनाएं समाज के लिए चिंतनीय हैं। जिले में बढ़ रहे दुष्कर्म के मामले महिला सुरक्षा की पोल खोल रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि पुलिस विभाग की ओर से जारी आंकड़े स्थिति को बयां कर रहे हैं। वर्ष 2012 से 31 मई 2018 तक 533 मामले दुष्कर्म के दर्ज हुए। इनमें से 297 मामलों के चालान पुलिस ने न्यायालय में पेश किए हैं।176 मामले ऐसे थे जिन पर पुलिस ने एफआर लगा दी। वर्ष 2018 में मात्र पांच माह में दुष्कर्म के 58 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 25मामलों के चालान न्यायालय में पेश कर 34 दुष्कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।

मानसिक विक्षिप्त होते हैं दुष्कर्मी
चूरू मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग के विभागाध्यक्ष डा. अजिताभ सोनी ने कहा कि विदेशों में सैक्स एजुकेशन टोपिक पर चर्चा होती है। इसके चलते विदेशों में ऐसी घटना कम होती है। इन घटनाओं को अंजाम देने वाले लोग मानसिक विक्षिप्त होते हैं। इनको दूसरों की भावना से कोई मतलब नहीं होता है। ऐसे लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरे इससे सबक ले सकें।

वर्ष 2012 में सबसे कम मामले दर्ज
पुलिस विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2012 में दुष्कर्म के 59मामले दर्ज किए गए। इनमें 60 आरोपियों को गिर$फ्तार किया गया। वर्ष 2018 में मात्र पांच माह में 58 मामले दर्ज कर 34जनों को गिरफ्तार किया गया है। इन में 21 मामलों की जांच पुलिस कर रही है।

ये भी प्रमुख कारण
दुष्कर्म की अधिकतर घटनाओं में सामने आया है कि दुष्कर्म पीडि़ता समाज में बदनामी के डर से सामने नहीं आती है। ऐसी स्थिति में आरोपी का हौसला बढ़ जाता है। पीडि़ता को कानून की मदद लेनी चाहिए और अपराधी को सजा दिलानी चाहिए।

क्या कहते हैं आंकड़े
वर्ष दर्ज चालान एफआर
2012 59 41 12
2013 73 44 21
2014 72 45 23
2015 81 43 31
2016 92 46 40
2017 98 53 37
2018 58 25 12
कुल 533 297 176
(वर्ष 2018 के आंकड़े ३१ मई तक)

महिलाओं से दुष्कर्म किए जाने के मामले में पुलिस पीडि़त की शिकायत पर तुरंत दर्ज मामला करती है। आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच की जाती है। जल्दी से जल्दी न्यायालय में चालान पेश किए जाने की कारवाई की जाती हैताकि पीडि़त को न्याय मिल सके।

अनिल सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, चूरू