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जसवंतगढ़ बीड़ में फिर लटका हरिणों की शिफ्टिंग का मामला

जसवंतगढ़ बीड़ में तीन सौ हरिणों को शिफ्ट करने के लिए चल रहा था काम
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जसवंतगढ़ बीड़ में फिर लटका हरिणों की शिफ्टिंग का मामला

चूरू.

विश्व विख्यात ताल छापर अभयारण्य से जसवंतगढ़ बीड़ में हरिणों को शिफ्ट करने की योजना फिर से खटाई में पड़ गई है। विभाग ने अगस्त तक आवंटित क्षेत्र की खाई बनावा दी थी। लेकिन बाद में बजट के अभाव में काम आगे नहीं बढ़ा। इसके कारण उक्त क्षेत्र हरिणों के लिए तैयार नहीं हो सका। बजट 2017-18 में सरकार ने 40 लाख रुपए आवंटित किए थे लेकिन बजट कम पड़ गया। पिछले साल सितंबर में जिला उप वन संरक्षक कार्यालय से ६६ लाख रुपए की मांग विभाग से मांग की गई थी लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला, जिससे काम रुका हुआ है।

278 हैक्टेयर भूमि पर चल रहा था कार्य


हरिणों की अधिकता को देखते हुए सरकार ने छापर से करीब २२ किमी दूर जसवंतगढ़ ग्राम पंचायत की बीड़ में 278 हैक्टेयर भूमि हरिणों की शिफ्टिंग के लिए आरक्षित कर वन विभाग को दे दी गई थी। चूरू वन विभाग ने यहां काम भी शुरू कर दिया था। पुराना काल कुआं के पास कसुम्बी-सुजानगढ़ कच्चे मार्ग के पास 278 हैक्टेयर भूमि के चारों तरफ करीब छह किमी लम्बी और चार फीट ऊंची खाई बनवा दी गई है। खाई के चारों तरफ करीब चार फीट गड्ढ़ा भी खुदवा दिया गया था। खाई को पूरा कराने में करीब १५ लाख रुपए लगे। इसके अलावा बीड़ में स्थित कंटीली झाडिय़ों को भी निकलवा दिया गया था। खाई का काम पूरा होने के बाद अंदर घास उगाने का काम शुरू कर दिया गया था। ताल छापर से घास भी लेजाकर वहां पर लगा दी गई। घास उगने के बाद जनवरी व फरवरी तक ताल छापर से करीब ३०० हरिणों को शिफ्ट करने की योजना थी।

ताल छापर में तीन गुना अधिक हरिण


ताल छापर अभयारण्य में हरिणों का घनत्व करीब तीन गुना बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक एक हरिण के लिए करीब एक हैक्टेयर भूमि की जरूरत होती है। इस हिसाब से छापर में जमीन की उपलब्धता के मुताबिक हरिणों की संख्या तीन गुना अधिक है। ऐसे में तीन सौ हरिणों के शिफ्ट होने से कुछ दबाव कम होगा। यहां हरिणों के अलावा चिंकारा व नील गाय भी हैं। ऐसे में दिनोदिन अभयारण्य में घनत्व बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यदि हरिणों को यहां से शिफ्ट नहीं किया गया तो कुछ दिनों में समस्या बढ़ जाएगी।

तो बढ़ेगा पर्यटन


जसवंतगढ़ में हरिणों के शिफ्ट होने से जसवंतगढ़ में पर्यटन व्यवसाय भी बढ़ेगा। लोगों को स्वरोजगार के लिए अवसर मिलेंगे। छोटे होटल व्यवसाय विकसित होंगे। क्षेत्रिय के अलावा बाहरी पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा।

तो कंजर्वेशन रिजर्व बनेगा जसवंतगढ़


मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक अरविन्द तोमर ने रिववार को ताल छापर अभयारण्य का निरीक्षण कर हरिणों के स्थानांतरण की कार्य प्रगति के बारे में समीक्षा की। इसके बाद वे जसवंतगढ़ में हरिणों को शिफ्ट करने के लिए तैयार किए जा रहे परिसर का अवलोकन किया। यहां पर स्थित ३५५ हैक्टेयर जमीन को और आवंटित कराने के लिए नगौर जिला कलक्टर पास आवेदन करने के चूरू डीएफओ व नागौर डीएफओ को निर्देश दिए। उक्त जमीन मिलने के बाद उक्त बीड़ को जसवतंगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया जा सकता है। इससे काफी फायदा होगा। इस मौके पर, डीएफओ बनवारी शर्मा, एसीएफ दिलीपसिंह व छापर रेंजर प्रभुदान सामौर आदि मौजूद थे।


तापडिय़ा परिवार ने आवंटन के खिलाफ कोर्ट में लगाई याचिका

वीके नागर ने बताया कि 1940 में तत्कालीन जोधपुर रियासत के महाराजा उम्मेदसिंह सिंह ने जगन्नाथ मेमोरियल ट्रस्ट को 7800 बीघा जमीन जीवनमल व सूरजमल तापडिय़ा परिवार के नाम से पट्टा दिया था। लेकिन ट्रस्ट मालिक ने जमीन नहीं लेकर गायों के लिए जमीन आरक्षित करवा दी। गोचर के बड़े हिस्से पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया। तीन हजार बीघा जमीन बची थी जिसमे से करीब 11 बीघा जिला कलक्टर व ग्राम पंचायत ने वन विभाग को आवंटित कर दी। एसडीएम व जिला कलक्टर ने कोई सुनवाई नहीं की तो उन्होंने आवंटन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। हाईकोर्ट ने छह फरवरी को जिला कलक्टर, वन विभाग व एसडीएम को नोटिस देकर आठ सप्ताह मेें जवाब मांगा है।


विभाग का दावा वन विभाग की जमीन


वहीं ताल छापर अभ्यारण्य के कार्यवाहक एसीएफ दिलीप सिंह ने बताया कि नागौर जिला प्रशासन ने उन्हे जो जमीन आवंटित की है वह जमीन वन विभाग की है। उसके आस-पास गोचर है। गोचर भूमि का उन्होंने कुछ भी नहीं लिया है। बजट मिलते ही दुबारा काम शुरू करवा दिया जाएगा।

''सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद हरिणों की शिफ्टिंग के लिए काम शुरू कर दिया गया था। जमीन के चारों तरफ खाई बनवा दी गई है। चारे के लिए घास लगाने का काम चल रहा था। घास उगने के बाद हरिणों को शिफ्ट करने की योजना थी।विभाग ने 2017-78 में 40 लाख रुपए दिए थे लेकिन बजट कम पडऩे से काम पूरा नहीं हो सका। शेष बजट की मांग की गई है। 66 लाख रुपए मांग रखे हैं। अभी तक आया भी नहीं। ''
बनवारी शर्मा, उप वन सरंक्षक, वन विभाग, चूरू