
नियमों की पेचीदगी, उलझी शहीद आश्रितों की नौकरी
सादुलपुरïï. सरकार की अनदेखी के चलते मृत रक्षा कार्मिकों के नियमों में संशोधन नहीं होने से शहीद सैनिकों के वंचित परिवार एवं आश्रितों को आज भी नौकरी का इंतजार है। वे सरकारों की ओर देय पैकेज के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। ऐसा ही एक मामला गांव हमीरवास के शहीद हरिसिंह की वीरांगना मनभरी देवी का भी है। उसने बताया कि उनके पति नायक हरिसिंह १० मई १९६८ को शहीद हुए थे। जिसके बाद आज तक शहीद परिवार को ना तो किसी प्रकार का पैकेज दिया गया और ना ही आश्रित परिवार को कोई सहायता या नौकरी दी गई। जबकि वसुंंधरा सरकार ने तीन दिसंबर २०१८ को १९७१ के शहीदों के पुत्र, पुत्री या वीरांगना को नौकरी देने का नियम निकाला था। लेकिन वीरांगना मनभरी देवी एवं पुत्र बलवीर की आयु अधिक होने के कारण नौकरी नहीं मिल सकी। जबकि २०१८ के नियमों के अन्तर्गत ब्लड रिलेशन लागू कर दिया जाता, तो शहीद परिवार के आश्रितों को नौकरी मिल जाती है। वीरांगना मनभरीदेवी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर शहीद के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने के नियमों में विसंगतियों को दूर करने, १९७१ के शहीद सैनिकों की संतान नहीं होने पर दत्तक पुत्र को नौकरी देने, ब्लड रिलेशन को नियुक्ति प्रदान करने, कम उम्र होने के कारण पुन: विवाह करने वाली वीरांगना की संतान को नौकरी देने आदि मांग की।
इनका कहना है
&सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार १९७१ से १९९९ के बीच होने वाले शहीद के ४५ साल तक की आयु के आश्रितों को सरकारी नौकरी एवं अन्य परिलाभ देने की व्यवस्था है। चूंकि उक्त प्रकरण १९७१ के पहले से शहीद का है, ऐसे अनेक मामले न्यायालयों में लंबित हैं। ऐसे प्रकरणों में लाभ मिलने की पूरी-पूरी संभावना है।
रामकुमार कस्वा, पूर्व जिला सैनिक कल्याण अधिकारी चूरू।
&सरकार ने तीन अक्टूबर २०१८ को आदेश निकाला है। जिसके अनुसार आजादी के बाद १५ अगस्त १९४७ से ३१ दिसंबर १९७० के बीच होने वाले शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी एवं अन्य परिलाभ देने के आदेश हैं। सरकार एवं सैनिक कल्याण विभाग शहीदों के परिवारों के प्रति गंभीर है। नए आदेशों से निश्चित रूप से १९४७ से १९७० तक के बीच हुए शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी के परिलाभ देय होंगे।
कर्नल राजवीरसिंह, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी चूरू
Updated on:
21 Feb 2019 02:27 pm
Published on:
21 Feb 2019 02:27 pm
