सरकार के आदेश पर शिक्षा निदेशालय की मनमानी भारी

वर्तमान प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक ने वर्षों पुराने सरकार के आदेश का किया उल्लंघन, तृतीय श्रेणी अध्यापक सीधी भर्ती 2016 द्वितीय लेवल अंग्रेजी में उत्तीर्ण 107 अभ्यर्थियों को नहीं दी नियुक्ति

By: Rakesh gotam

Published: 20 Jul 2018, 10:31 PM IST

 

राकेश कुमार गौतम


चूरू. राजस्थान प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक सीधी भर्ती २०१६ (संशोधित) लेवल द्वितीय अंग्रेजी विषय (दूसरे राज्यों की डिग्री) की समकक्षता को लेकर गठित समिति के निर्णय पर सवाल खड़ा हो गया है। समिति ने दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों से अंग्रेजी अनिवार्य विषय के रूप में स्नातक उत्तीण अभ्यर्थियों को उक्त पद के लिए योग्य नहीं माना। जबकि समिति को तय करना था कि अनिवार्य अंग्रेजी विषय व अंग्रेजी वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम व डिग्री समतुल्य व समकक्ष है या नहीं।


ज्ञातव्य हो कि राज्य सरकार ने 1977 में पंजाब विश्वविद्यालय की बीए में अनिवार्य अंग्रेजी को राजस्थान विश्वविद्यालय की बीए में वैकल्पिक अंग्रेजी के समकक्ष मान्यता प्रदान करने का निर्णय लिया था। उक्त आदेश तत्कालीन सहायक शासन सचिव आरएन भार्गव ने २८ सितंबर १९७७ को जारी किया था। जिसे आज तक किसी ने चैंलेंज नहीं किया है। फिर भी वर्तमान निदेशक इस आदेश को दरकिनार कर रहे हैं।


वहीं, शिक्षा विभाग के शासन उप सचिव घनश्याम लाल शर्मा ने समिति में जिन विषय विशेषज्ञों को शामिल करने का आदेश दिया था उन्हे समिति में नहीं लिया गया। जिन विश्वविद्यालयों की डिग्रियों को लेकर निदेशालय ने आपत्ति जताई थी उन विश्वविद्यालयों के विषय विशेषज्ञ प्रतिनिधियों को आदेश के बाद भी नहीं लिया गया। राजस्थान के ही अलग-अलग विषय विशेषज्ञों को लेकर 'समकक्षता निर्धारण समिति' गठित कर अंग्रेजी विषय की समकक्षता का निर्धारण कर दिया गया। निदेशक की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि समिति द्वारा यह निर्णय लिया गया कि स्नातक स्तर पर अध्ययन किए गए कम्पलसरी, जनरल व फाउंडेशन विषय को इलेक्टिव/ ऑप्शनल विषय के समान नहीं माना जा सकता। अत: स्नातक स्तर पर कम्पलसरी, जनरल व फाउंडेशन विषय के रूप में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती लेवल द्वितीय अंग्रेजी के लिए अपात्र हैं। बहरहाल समकक्षता का अड़ंगा लगाने से परीक्षा उत्तीर्ण १०७ अभ्यर्थियों को नौकरी से बाहर कर दिया गया, जबकि बीकानेर में अंग्रेजी अनिवार्य विषय से स्नातक तीन विद्यार्थियों को नियुक्ति दे दी।

 

शासन उप सचिव ने समकक्षता समिति में इन्हे शामिल करने का आदेश दिया था

 

- निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा बीकानेर - अध्यक्ष
- अकादमिक शिक्षाविद, माध्यमिक, शिक्षा बोर्ड राजस्थान - सदस्य
- विषय विशेषज्ञ आईएएसई - सदस्य
- संबंधित विश्वविद्यालय का अकादमिक
विषय विशेषज्ञ व शिक्षाविद - सदस्य
- संबंधित विषेय विशेषज्ञ, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय स्तर पर - सदस्य

निदेशक द्वारा बनाई गई समिति

- डा. अनिल कुमार जैन, सेवानिवृत्त प्रो., राजस्थान विवि. जयपुर
- डा. संजय अरोड़ा, एसो. प्रो. अंग्रेजी, केन्द्रीय विश्व वि. अजमेर
- डा. तनुजा माथुर, विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी, राजस्थान वि.वि.
- डा. अशीष सिसोदिया, सहायक आचार्य, हिन्दी, मो.ला.सु. विवि. उदयपुर
- डा. रामगोपाल शर्मा, रीडर, राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान बीकानेर
- डा. रोहताश कुमार, प्रधानाचार्य (अंगे्रजी) सार्दुल स्पोट्र्स स्कूल बीकानेर, प्रतिनिधि निदेशक, माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर
- आद्या बोहरा, रीडर, राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान, बीकानेर
- आशा पारीक व्याख्याता(हिन्दी) रा.के.ने. बाउमावि जयपुर

निदेशक ने साधी चुप्पी
वहीं इस संबध में बीकानेर प्राथमिक शिक्षा निदेशक श्यामङ्क्षसह राजपुरोहित से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन पर कोई जवाब नहीं दिया।

 

''शासन उप सचिव ने समिति बनाने के लिए क्या आदेश दिया था क्या नहीं हम नहीं जानते। समिति में कौन आया क्या निर्णय हुआ सब वेबसाइट पर उपलब्ध है।''
किशनदान चारण, सहायक निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, बीकानेर

Rakesh gotam Reporting
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