
सादुलपुर। ममता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। क्रूर हाथों ने दो दिन पहले पैदा हुई नवजात बच्ची को ट्रेन के शौचालय के पास छोड़ दिया। यह तो गनीमत रही कि आरपीएफ के जवान की उस पर नजर पड़ गई। सर्द रात में ठिठर रही बालिका को श्रीगंगानगर - दिल्ली ट्रेन से जीआरपी के जवानों ने सादुलपुर में रात 12 बजे उतारा। बाद में उसे यहां के राजकीय अस्पताल उपचार के लिए ले जाया गया, जहां से उसके चूरू रैफर कर दिया गया। मासूम कन्या का राजकीय डीबी अस्पताल में उपचार जारी है। जीआरपी थाना अधिकारी ने लक्ष्मण सिंह ने बताया कि दिल्ली- तिलक ब्रिज ट्रेन में नवजात बालिका को आरपीएफ के सिपाही संजय कुमार यादव ने सबसे पहले देखा।
मासूम जनरल कोच में शौचालय के आगे रखी हुई थी। आरपीएफ के जवान ने जीआरपी थाने में सूचना दी। जीआरपी पुलिस ने बालिका को राजकीय रेफरल अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाया। चिकित्सकों ने बालिका को राजकीय भरतिया अस्पताल के पालना गृह में भिजवा दिया। जीआरपी थाने में मामला दर्ज कर जांच शरू कर दी गई है। थाना अधिकारी बताया कि इस संबंध में पुलिस परिजनों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। तथा आसपास के सभी रेलवे और सिविल थानों को इस बारे में सूचना भी दी गई है। चिकित्सकों के अनुसार कन्या का जन्म संभवत: दो दिन पहले ही हुआ है। उसका वजन दो किलो दो सौ ग्राम है। कन्या वैसे स्वस्थ बताई जा रही है।
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लावारिस कन्या मिलने के कई मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। अंचल के सीकर, झुंझुनूं व चूरू में कई नवजात बच्चे जिंदा मिलने के बावजूद पुलिस आज तक किसी भी मामले में उसके परिजनों का पता नहीं लगा पाई। ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका मामला दर्ज कर बच्चे को संबंधित विभाग को सौंपने तक की होती है। हालांकि बाद में ऐसे बच्चों को नियमानुसार गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
Published on:
30 Dec 2023 10:48 am
