
rameshwar prajapati
चूरू.
महंगाई के इस दौर में आज रुपए खर्च करने के बावजूद बाजार में आम आदमी कैमिकल युक्त सब्जियों के साथ बीमारी खरीद रहे हैं। शुद्धता के नाम पर मनमाने रुपए देने के बाद भी शुद्ध सब्जियां मिलना मुश्किल है। ऐसे दौर में चूरू के गांव रामसरा के किसान रामेश्वर प्रजापति आमजन के लिए काफी मददगार साबित हो रहे हैं।
वे गत 14 वर्षों से चूरू ही नहीं बल्कि आस-पास के अन्य जिलों के लोगों को घर में बेलदार हरी सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए वे स्वयं प्रतिवर्ष करीब 10 हजार रुपए खर्च कर लोगों को सब्जियों के बीज बांटते हैं और सब्जियां लगाने का तरीका भी बताते हैं। प्रजापति बताते हैं कि बारिश के मौसम की शुुरुआत से पहले हर साल एक मई को बीज वितरण शुरू करते हैं। जो अगस्त तक चलता है। बाद में जनवरी व फरवरी माह में बीज वितरित करते हैं। बीज वितरण के लिए प्रजापति कोई विशेष आयोजन नहीं करते हैं। बल्कि बीज अपने साथ रखते हैं।
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सरकारी कार्यालय, विद्यालय या अन्य किसी भी जगह जहां जाते हैं। वहां जान-अनजान लोगों को इसके फायदे बताते हुए बीज बांटना शुरू कर देते हैं। अच्छी गुणवत्ता के बीज वे रुपए खर्च कर खरीदते हैं। इसके अलावा हर वर्ष जिन्हें बीज वितरित करते हैं वे लोग भी वापस उन्हें बांटने के लिए बीज मुहैया करवा देते हैं। प्रतिवर्ष करीब दो-ढाई हजार के हिसाब से अब तक करीब 30 हजार लोगों को बीज वितरित कर चुके हैं।
इन सब्जियों के बांटते बीज
घीया, तौरूं, करेला, बाड़ करेला, कंकेडू़, सेमफळी, आरिया, हरी ककड़ी, मतीरी, काचरा, टींडसी, ग्वार, भिंडी, चवला, चुकंदर, पालक, मक्का, हरी बाड़, खेरी, देसी बबूल, निमोली, बेर, इमली के बीज के अलावा अनेक सब्जियों की पौध तैयार करके भी निशुल्क वितरित करते हैं।
गांव के हर घर में होता सब्जी का उत्पादन
रामेश्वर प्रजापति की बदौलत आज इनके गांव रामसरा के हर घर में कहीं थोड़ी तो कहीं अधिक मात्रा में सब्जी का उत्पादन हो रहा है। घर में कच्ची जमीन उपलब्ध नहीं होने पर ये बेलदार सब्जियां गमलों में भी लगाई जा सकती है। अब तक प्रजापति चूरू के अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, नागौर सहित अन्य जिलों के लोगों को बीज वितरित कर चुके हैं। प्रजापति बताते का मानना है कि हर घर में सब्जियों का उत्पादन होने से स्वस्थ रहा जा सकता है।
ये हैं फायदे
आम आदमी को घर में सब्जी मिलने से प्रतिदिन सब्जी पर होने वाला खर्चा बचता है। बिना केमिकल जैविक खाद से तैयार बीजों की शुद्ध सब्जी मिलती है।
Published on:
24 Jul 2018 11:46 am
