
nanuram
कैलाश शर्मा
सुजानगढ़.
कहते है अगर मनुष्य के दिल में सच्ची लगन और मजबूत इरादा हो तो कोई भी मंजिल पाना मुश्किल नहीं है। चाहे व्यक्ति शारीरिक व कुदरती मुश्किलों से कितना भी परेशान क्यों न हो। लेकिन मनोबल ऐसा हथियार है, जिससे व्यक्ति बड़े से बड़े लक्ष्य को भी भेद सकता है। कुछ ऐसा ही करने का जज्बा है लोढ़सर गांव में रहने वाले दिव्यांग नानूराम जाट का। नेत्रहीन के बावजूद भी उसने आईएएस प्री परीक्षा पास कर ली।
ज्ञातव्य हो कि नानूराम के जन्म से ही एक आंख नहीं थी और दूसरी भी कुदरत ने धीरे-धीरे छीन ली जिससे नानूराम को दिखना बंद हो गया। कैंसर से पीडि़त पिता की भी कुछ दिन पहले मौत हो गई। कुदरत नानूराम पर एक न एक कहर बरपाती रही लेकिन नानूराम अपनी बहनों और जीजा के हौसले के दम पूरी लगन के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटा है। इसी जज्बात की बदौलत वह आईएएस की तैयारी में जुटा है। हाल ही में जारी आईएएस प्री परीक्षा परिणाम में उसका भी चयन हो गया। लेकिन आईएएस का तमगा पहनने के लिए नानूराम को अभी दो सीढ़ी और चढऩा है। जिसके लिए वह पूरी लगन से लगा हुआ है। उसका कहना है कि वह जल्द ही आईएएस मुख्य परीक्षा देकर आईएएस बनेगा।
पिता का निधन
नानूराम के पिता टीकूराम राव सार्वजनिक निर्माण विभाग में बेलदार थे, जो लम्बे समय से लीवर में कैंसर के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते-करते 18 जुलाई को दम तोड़ दिया। नर्सिंग एसोसिएशन बीकानेर के जिलाध्यक्ष मदनलाल राव ने बताया कि टीकूराम को मुखाग्नि बड़े पुत्र नानूराम ने दी। नानूराम की माता अमरीदेवी घरेलू महिला है, जो अपने बच्चों का लालन पालन कर रही हैं। कुल छह भाई बहनों वाले इस परिवार में शिक्षा के प्रति जागरुकता भी देखने को मिली। सबसे बड़ी लड़की पूनम है जो द्वितीय श्रेणी शिक्षक की तैयारी कर रही है। उससे छोटी नीलम जो नेट की तैयारी में जुटी है। उसके बाद भगवती बीएड, नानूराम आईएएस की तैयारी कर रहा है। तो उनसे छोटी मंजू व सुनील स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत हैं।
ब्रेल लिपि बनी हथियार
22 वर्षीय नानूराम जाट की प्राथमिक शिक्षा लोढ़सर के ही राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। उसके बाद उसने सातवी गंगानगर से पास की और ब्रेल लिपि सीखी। उसके बाद स्टेट ओपन की परीक्षा से 10वीं और 12वीं पास की। इसके बाद सीकर के एसके कॉलेज से अर्थशास्त्र, भूगोल और इतिहास विषय से स्नातक किया। इसके बाद वहीं से आईएएस की तैयारी में जुट गया। खास बात यह है कि नानूराम ने केवल आईएएस में ही रुचि दिखाई और किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में आवेदन नहीं किया। नानूराम ने दूसरी बार में ही प्री परीक्षा पास कर ली।
बहनें तैयार करती हैं ऑडियो कैसेट
नानूराम ने ब्रेल लिपि से अपनी फाइल में नोट्स बना रखे हैं। आईएएस जैसी कठिनतम परीक्षा की तैयारी के लिए उसकी चार बहने उसकी ढाल बनी। अध्ययन में रुचि रखने वाली चारों बहने नानूराम को उसकी तैयारी से संंबंधित किताबों व नोट्स की ऑडियो रिकॉर्डिंग करके कैसेट्स बनाकर देती हैं, जिसको सुनकर नानूराम आईएएस की तैयारी करता है। नानूराम का कहना है कि मेरी सरकार से मांग है कि हम जैसे दिव्यांगो के लिए ऑडियो सेलेबस तैयार करवाए, ताकि हमें किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में दिक्कत न हो।
जीजा करवाते हैं कोचिंग
सीकर के कोचिंग सेंटर की मुख्य भूूमिका को बताते हुए नानूराम जाट ने बताया कि उसका लक्ष्य है कि वह आईएएस बनकर देश, समाज व परिवार का नाम रोशन करेगा। साथ ही दिव्यांगो के लिए की जाने वाली सुविधाओं से भी सरकार को अवगत करवाएगा। नानूराम को कोचिंग सेंटर तक लाने ले जाने का जिम्मा उठाने वाले उसके जीजा राजूराम सारण व दीनदयाल ने बताया कि नानूराम की कामयाबी के प्रति लगन से साफ जाहिर होता है कि उसको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। बचपन से ही क्रिकेट का शौक रखने वाले नानूराम ने बताया कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके से वह प्रभावित है। ऐसे पीएम को कम से कम देश में 10 साल और शासन चलाना चाहिए, तब कहीं जाकर हमारे देश में पूरा आमूलचूल परिवर्तन होगा। नानूराम की इस सफलता पर आज उसके काका मदनलाल, जीजा राजूराम, जगदीश कस्वां, दीनदयाल उसकी बहनों, माता व अन्य ग्रामीणों ने स्वागत किया और खुशी जाहिर की।
Published on:
24 Jul 2018 11:20 am
