आईपीएल ट्रॉफी विवाद में आया नया मोड़, सचिव अमिताभ चौधरी ने अध्यक्ष सीके खन्ना पर लगाए गंभीर आरोप

आईपीएल ट्रॉफी विवाद में आया नया मोड़, सचिव अमिताभ चौधरी  ने अध्यक्ष सीके खन्ना पर लगाए गंभीर आरोप

Mazkoor Alam | Publish: May, 18 2019 10:43:12 PM (IST) क्रिकेट

  • डायना एडुल्जी भी सीके खन्ना पर लगा चुकी हैं आरोप
  • अमिताभ ने कहा- लोगों से मिलने-जुलने के अलावा नहीं करते कोई काम
  • मीटिंग में सीके खन्ना रहते हैं चुप, अहम मुद्दों पर कुछ नहीं बोलते

नई दिल्ली : पिछले कुछ दिनों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना और प्रशासकों की समिति (COA) की सदस्य डायना एडुल्जी के बीच इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) विजेता को ट्रॉफी देने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चल रहा था। अब इस विवाद में एक और नया मोड़ आ गया है। अब बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने पत्र लिखकर सीके खन्ना पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि कार्यवाहक अध्यक्ष के पास बार-बार फोटो खिंचाने के अलावा और कोई काम नहीं है। उन्होंने आज तक काम ही क्या किया है। वह कामकाज पर बहुत कम ध्यान देते हैं।

लोगों से मिलने के अलावा और कोई काम नहीं

अमिताभ चौधरी ने सीके खन्ना पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा लिखा है कि उनके पास लोगों से मिलने-जुलने और सभी से पास लेने के अलावा कोई काम नहीं है। वह अहम बैठकों में भी चुप बैठे रहते हैं। कभी एक शब्द नहीं बोलते। चौधरी ने लिखा है कि पद संभालने के बाद से केवल पास लेने, नया साल, दिवाली, क्रिसमस की बधाई देने के अलावा खन्ना ने किया ही क्या है? हां, फोटो खिंचाने का जरूर एक भी मौका नहीं छोड़ते। वह यह भी नहीं सोचते कि इससे बीसीसीआई की साख और गरिमा को उन्होंने कितना नुकसान पहुंचाया है।
अमिताभ चौधरी यहीं नहीं रुके, उन्होंने पत्र में आगे लिखा है कि उन्हें याद नहीं कि खन्ना ने अहम बैठकों में कभी एक शब्द कहा हो या अहम मुद्दों को लेकर कभी ई-मेल किया हो। चाहे वह लोढ़ा समिति की सिफारिश हो, सर्वोच्च अदालत का 18 जुलाई 2016 को लिया गया फैसला हो या फिर यौन शोषण का मामला हो। यहां तक कि हाल ही में फेमा के मामले में भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी।

किस्मत से मिला अध्यक्ष पद

अमिताभ चौधरी ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि यह शायद किस्मत ही होगी। सर्वोच्च अदालत ने 2 जनवरी 2017 को बोर्ड के अध्यक्ष को हटा दिया था और इसके बाद उसके पास पांच उपाध्यक्षों में से किसी एक को अध्यक्ष बनाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। इसके बाद खन्ना को वह पद मिला जिस पर ग्रांट गोवन, सर सिकंदर हयात खान, विजिनाग्राम, एमए चिदम्बरम, जेडआर ईरानी, एनकेपी साल्वे, राज सिंह डुंगरपुर, जगमोहन डालमिया, शरद पवार और शशांक मनोहर जैसे लोग बैठे। इन सभी ने शानदार काम किया और क्रिकेट जैसे महान खेल में अपना योगदान देकर सम्मान हासिल किया। उन्होंने आगे लिखा कि जब खन्ना इस पद पर बैठे थे, तब सभी ने उम्मीद की थी कि जिस स्थिति में उन्हें जो उन्नति, पद और जिम्मेदारी मिली है, वह उन्हें आगे ले जाने में मदद करेगी, जो पहले कई दिग्गजों के पास रही है और अभी तक के कार्यकाल में उन्हें एक अलग मुकाम पर खड़ा कर देगी।

कहा- चुना नहीं गया है

इसके आगे चौधरी ने खन्ना को याद दिलाया कि उन्हें चुना नहीं गया है, बल्कि हालात ऐसे थे कि इस पद पर आ गए। उनका असल काम बोर्ड का उपाध्यक्ष पद का था। चौधरी ने लिखा कि बीसीसीआई का आखिरी चुनाव 2015 में हुआ था। इसमें चार अधिकारियों को नियुक्त किया गया था, लेकिन उनमें खन्ना नहीं थे। यहां तक कि अधिकारी के रूप में भी नहीं चुने गए थे, क्योंकि उस समय का बोर्ड का संविधान पांच उपाध्यक्षों को अधिकारी नहीं मानता था। उन्होंने लिखा कि इस तरह के प्रावधान इत्तेफाक नहीं थे। उस समय के नियम के मुताबिक, हर जोन से एक उपाध्यक्ष होना था, इसलिए पांच उपाध्यक्ष थे, लेकिन इनके पास करने के लिए ज्यादा कुछ काम नहीं था। खन्ना उनमें से एक थे। उनके अधिकार काफी सीमित थे।

पूछा- राज्य संघ के अध्यक्ष को ट्रॉफी देने की इजाजत कैसे दी

अमिताभ चौधरी ने खन्ना से एक और सवाल पूछा कि क्यों उन्होंने दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान पर भारत-आस्ट्रेलिया के बीच खेले गए अंतिम मैच में ट्रॉफी नहीं दी। अपने बदले एक राज्य संघ के अध्यक्ष को ट्रॉफी देने की इजाजत कैसे दे दी।

आईपीएल ट्रॉफी पर खड़ा किया विवाद

अमिताभ चौधरी ने यह भी लिखा है कि आपने भारत और आस्ट्रेलिया मैच के पुरस्कार वितरण पर किए सवाल का अब तक जवाब नहीं है। शायद यह काफी नहीं था, इसलिए आईपीएल के फाइनल में ट्रॉफी देने को लेकर विवाद खड़ा कर दिया और पूरी दुनिया को इस विवाद के बारे में पता चल गया। ऐसा लगता है कि आपके दिमाग में काफी पहले से यह बात चल रही थी कि आप उस दिन विजेता टीम को ट्रॉफी देंगे।

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