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खत्म हो सकता था यशस्वी जायसवाल का करियर, इस हरकत की वजह से होने वाले थे बैन, अजिंक्य रहाणे ने ऐसे बचाया

यशस्वी जायसवाल को अनुशासनहीनता की वजह से अजिंक्य रहाणे ने मैदान से बाहर भेज दिया था। उनकी विपक्षी बल्लेबाज रवि तेजा के साथ कहासुनी हुई थी और इसके लिए यशस्वी को 2-3 बार रोका गया। जब वॉर्निंग के बाद भी यशस्वी नहीं माने तो कप्तान ने उन्हें मैदान के बाहर जाने को कहा।
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भारत

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Siddharth Rai

Aug 09, 2026

Ajinkya Rahane captaincy record

अजिंक्य रहाणे (Photo - IANS)

Ajinkya Rahane on Yashasvi Jaiswal: टेस्ट डेब्यू करने से एक साल पहले ही, खब्बू समाली बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी शानदार प्रतिभा का परिचय दे दिया था। दिलीप ट्रॉफी 2022 के फ़ाइनल में वेस्ट ज़ोन की ओर से खेलते हुए, उन्होंने साउथ ज़ोन के ख़िलाफ़ शानदार 265 रन की पारी खेली थी और अपनी टीम को ख़िताब जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, उसी मैच में एक विवाद हुआ था, जिसकी वजह से वह चर्चा में आ गए थे।

अजिंक्य रहाणे ने जायसवाल को मैदान से बाहर किया

इस मुक़ाबले में वेस्ट जोन के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने जायसवाल को मैदान से बाहर कर दिया था। जिसके चलते वे सस्पेंशन से बच गए थे। फ़ाइनल मुक़ाबले के पांचवे दिन माहौल तब गरमा गया जब जायसवाल की साउथ ज़ोन के ऑलराउंडर तेलुकुपल्ली रवि तेजा के साथ तीखी बहस हो गई। हालात बिगड़ते देख रहाणे ने दखल दिया और जायसवाल से मैदान छोड़ने को कहा। उस समय सिर्फ़ 20 साल के जायसवाल शायद इस फ़ैसले से नाराज़ हुए हों, लेकिन यह उनके करियर के लिए फ़ायदेमंद साबित हुआ।

रहाणे ने बताया घटना का पूरा सच

'द इंडियन एक्सप्रेस' के 'आइडिया एक्सचेंज' कार्यक्रम में उस घटना को याद करते हुए रहाणे ने कहा, "मुझे लगा कि उस समय हालात शायद हाथ से निकल सकते थे। हां, शायद उस दिन यशस्वी को बुरा लगा होगा, लेकिन मैंने ऐसी कई स्थितियां देखी हैं जहां खिलाड़ियों पर बैन लगा है। मैंने स्थिति को समझा और मुझे लगा कि दोनों खिलाड़ी आपा खो रहे थे। अपने साथी खिलाड़ी को नियंत्रित करना मेरी ज़िम्मेदारी थी। आपको अंपायरों और मैदान पर मौजूद अधिकारियों का सम्मान करना चाहिए जो खेल को नियंत्रित कर रहे हैं। हर कोई गलती कर सकता है, लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर आपको अपनी सीमाओं में रहना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "इसलिए, मेरा फ़ैसला उन्हें मैदान से बाहर भेजने का था। एक खिलाड़ी के तौर पर मुझे लगा कि उन्हें बुरा लग सकता है, लेकिन यह ठीक था। उस समय, यह उनके लिए अच्छी बात थी। मैंने उनसे पांच-छह ओवर के लिए बाहर जाने को कहा, मैंने कहा बाहर जाओ सिर पर बर्फ़ लगाओ, थोड़े ठंडे हो जाओ और फिर वापस आ जाना।"

मैच रेफ़री लगाने वाले थे चार मैच का बैन

उस समय न तो रहाणे और न ही जायसवाल को यह पता था कि मैच रेफ़री नारायणन कुट्टी ने जायसवाल के लिए चार मैचों के सस्पेंशन की तैयारी कर ली थी, जिसे रहाणे के समय पर किए गए दखल के कारण रद्द कर दिया गया। रहाणे ने कहा, "मुझे पता चला कि मैच रेफरी ने चार मैचों का बैन लगाने की तैयारी कर ली थी। लेटर भी लिख दिया गया था। वह मेरे पास आए और बोले, ‘ये रहा लेटर, लेकिन चूंकि तुमने वो किया (यशस्वी को बाहर भेजा), इसलिए मैं इसे फाड़ रहा हूं।"

रहाणे ने आगे कहा, "उन्होंने मेरे सामने ही लेटर फाड़ दिया। एक लीडर के तौर पर, आपको हालात की समझ होनी चाहिए। यह आपकी ज़िम्मेदारी है। इसलिए आखिर में, मैं खुश था। उस पर कोई बैन नहीं लगा और अब वह भारत के लिए खेल रहे हैं। वह एक बेहतरीन खिलाड़ी है। मैं उसका क्रेडिट नहीं छीन रहा, लेकिन कोई नहीं जानता कि अगर जायसवाल पर बैन लग जाता तो क्या होता।"