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“अगर मैं मैच रेफरी होता तो गांगुली पर बैन लगा देता”, दादा की इस हरकत पर जवागल श्रीनाथ ने 25 साल बाद कही ऐसी बात?

श्रीनाथ ने कहा कि अगर वह 2001 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ईडन गार्डन्स टेस्ट के दौरान मैच रेफरी होते, तो टॉस के लिए ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को इंतजार कराने के लिए सौरव गांगुली को कुछ मैचों के लिए बैन कर देते।
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भारत

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Siddharth Rai

Aug 09, 2026

Sourav Ganguly

BCCI के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली(फोटो-ANI)

Javagal Srinath, Sourav Ganguly,Eden Gardens Test 2001: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2001 की यादगार टेस्ट सीरीज से जुड़ी कई बातें क्रिकेट की कहानियों का हिस्सा बन चुकी हैं। इनमें से एक बात यह भी है कि तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव वॉ को टॉस के समय इंतजार करवाते थे। उस समय गांगुली नए-नए भारतीय कप्तान बने थे। वॉ ने कई बार कहा है कि इससे उन्हें चिढ़ होती थी।

जवागल श्रीनाथ ने कहा वे दादा को बैन कर देते

उसी टीम का हिस्सा और पूर्व तेज़ गेंदबाज़ जवागल श्रीनाथ ने अब इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। श्रीनाथ ने कहा कि अगर वह उस सीरीज में मैच रेफरी होते, तो शायद गांगुली पर बैन लगा देते। चेन्नई में एक कार्यक्रम में श्रीनाथ ने कहा, “मैं सौरव पर कुछ मैचों का बैन लगा देता।” श्रीनाथ 2003 में रिटायर होने के बाद से आईसीसी मैच रेफरी के तौर पर सफल करियर बना चुके हैं।

ब्लेजर नहीं मिल रहा था इसलिए देरी हुई

हालांकि सौरव गांगुली ने बाद में इसके पीछे अलग वजह बताई थी। उनका कहना था कि उन्हें अपना ब्लेजर नहीं मिल रहा था और इसी कारण टॉस के लिए पहुंचने में देरी हुई। श्रीनाथ सीरीज के उस इकलौते मैच में खेले थे जिसमें भारत को मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बुरी तरह हराया था। ऑस्ट्रेलिया सीरीज शुरू होने से पहले ही जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

लक्ष्मण और द्रविड़ की ऐतिहासिक पारी

इसके बाद भारत ने कोलकाता में खेले गए दूसरे टेस्ट में शानदार वापसी की। वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ की जबरदस्त साझेदारी और हरभजन सिंह के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ‘फॉलो-ऑन’ मिलने के बाद मैच जीतने वाली तीसरी टीम बन गई। इसके बाद उन्होंने सीरीज 2-1 से जीती।

दादा ने फिक्सिंग के बाद टीम को संभाला

यह वह सीरीज थी जिसने भारतीय टीम के निर्विवाद लीडर के तौर पर गांगुली की पहचान पक्की की। इसे व्यापक रूप से उस सीरीज के तौर पर देखा जाता है जिसने 1990 के दशक के आखिर में हुए मैच-फिक्सिंग स्कैंडल के बाद देश का खेल से भरोसा फिर से बहाल किया।

श्रीनाथ ने याद करते हुए कहा, “मैच-फिक्सिंग स्कैंडल के बाद हमारे लिए कई चीजें बेहतर हुईं। मुझे लगता है कि हर खिलाड़ी में अपनी छवि सुधारने और दुनिया को यह साबित करने का पक्का इरादा था कि क्रिकेट साफ-सुथरा खेल है। हर खिलाड़ी ने लीडरशिप दिखाई। फिर टीम न सिर्फ भारत में, बल्कि विदेशों में भी जीतने लगी।” श्रीनाथ आईसीसी मैच रेफरी के तौर पर 500 से ज्यादा मैचों में अंपायरिंग कर चुके हैं।