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गोलियों से बचते-बचाते बड़े हुए अकील होसेन, रोजाना गिरती थीं 5-6 लाशें, सुनील नरेन की मदद से ऐसे तय किया IPL तक का सफर

कैरेबियन के सबसे खतरनाक इलाकों में से एक में पला-बढ़ा एक लड़का, जिसने अपनी जिंदगी कभी नहीं छुपाई। जिसने एक साथी का फ्लैट इसलिए इस्तेमाल किया ताकि जिंदा रह सके और क्रिकेट खेल सके। आज वही लड़का CSK के लिए पावरप्ले में गेंदबाजी कर रहा है, ठीक उसी जगह, जहां उसका आदर्श रवींद्र जडेजा गेंदबाजी किया करता था।

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भारत

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Siddharth Rai

Apr 25, 2026

Akeal Hosein

वेस्‍टइंडीज के स्टार स्पिनर आकिल होसेन। (Photo - IPL Official Site)

Akeal Hosein Struggle Story: एक दोपहर त्रिनिदाद के लेवेंटिल इलाके में अकील होसेन अपने दोस्तों के साथ टहल रहे थे। अचानक उनके एक दोस्त की कमीज पर एक लाल रोशनी का धब्बा नज़र आया। पहले तो सबने उसे हटाने की कोशिश की, लेकिन कुछ पलों बाद ही समझ आ गया कि यह बंदूक की लेज़र साइट थी। बस फिर क्या था, सब भाग खड़े हुए।

लेवेंटिल पोर्ट ऑफ स्पेन का वो इलाका है, जिसे एक सड़क दो हिस्सों में बांटती है। एक तरफ मुस्लिम बहुल इलाका है, तो दूसरी तरफ 'रास्ता सिटी' जहां 'सिक्स' नाम के गैंग का आतंक फैला हुआ था। सालों तक इस सड़क पर खून बहता रहा। आज भी दीवारों पर गोलियों के निशान मौजूद हैं, कई खिड़कियां टूटी हुई हैं और जले हुए मकान वीरान पड़े हैं। बुरे दिनों में एक दिन में पांच -छह लाशें गिर जाना आम बात थी।

होसेन ने ईएसपीएन से बात करते हुए कहा, "गैंग वाले महज 100 फुट की दूरी पर एक-दूसरे से लड़ते थे। आपको पता नहीं होता तह कि कब कोन सी गोली आपको आकार लग जाये। यही उनकी दुनिया थी, चारों तरफ बस डर और हिंसा का माहौल था।"

एक बार उन्होंने बिना किसी को कुछ बताए त्रिनिदाद के एक मैच से अपना नाम वापस ले लिया। सिर्फ एक वॉयस नोट भेजा, जिसमें पीछे गोलियों की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी। इसी हिंसक माहौल में एक छोटे से लड़के ने सोशल मीडिया पर रवींद्र जडेजा की तस्वीर पोस्ट की और लिखा, “एक दिन मैं भी उनकी तरह खिलाड़ी बनना चाहता हूँ।" दूसरे पोस्ट में उसने कहा कि वह अपनी भूमिका को उसी इंसान की तरह निभाना चाहता है, जो इस किरदार को इतनी खूबसूरती से निभाता है।

ब्रायन लारा की तरह होसेन ने भी क्वींस पार्क क्रिकेट क्लब का रास्ता चुना। सुनील नरेन और कीरोन पोलार्ड ने उन्हें अपनाया। नरेन ने तो अपने पोर्ट ऑफ स्पेन वाले फ्लैट में रहने की इजाजत दे दी, ताकि होसेन लेवेंटिल से दूर रहकर शांति से क्रिकेट पर ध्यान दे सकें। हालांकि होसेन ने अपने इलाके से कभी पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। आज भी जब वे अपनी कहानी सुनाते हैं, तो सबसे पहले लेवेंटिल से शुरू करते हैं। वे कहते हैं, “बंदूकें लेकर लोग दौड़ते आते थे और हम घरों के अंदर भाग जाते थे। वो बहुत डरावने दिन थे। लेकिन इन सबके बावजूद क्रिकेट से हमारी मोहब्बत कभी कम नहीं हुई। इसने हमारे सपनों को कभी नहीं रोका।”

जिस दिन उन्होंने इंटरनेट पर जडेजा का नाम लिखा था, ठीक तेरह साल बाद अकील होसेन ने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) में जडेजा की जगह ले ली। ती20 क्रिकेट में स्पिनर के लिए पहले छह ओवर सबसे खतरनाक माने जाते हैं, इसलिए ज्यादातर टीमें वहां स्पिनरों को आजमाने से बचती हैं। लेकिन होसेन को पावरप्ले में गेंदबाजी करना पसंद है।

उनकी गेंदबाजी का अंदाज़ काफी हद तक उसी खिलाड़ी जैसा है, जिसे उन्होंने अपना आदर्श माना है। जडेजा की तरह वे सीधी, सटीक और बिल्कुल बिना किसी नाटक के गेंद फेंकते हैं। फर्क सिर्फ एक खास आर्म बॉल का है, जो सीम-अप रिलीज से निकलती है और दाएं हाथ के बल्लेबाज की तरफ देर से अंदर आती है। ठीक वैसे, जैसे कोई इन-स्विंगर आखिरी पल में अपना मन बदल ले।

होसेन ने गुरुवार को मुंबई इंडियंस को ऐसे ही अपनी फिरकी से परेशान किया। उन्होंने चार ओवर में सिर्फ 17 रन देकर चार विकेट चटकाए। उन 24 गेंदों में से 14 गेंदें डॉट रहीं। मैच के बाद CSK के पॉडकास्ट में जब उनसे लेवेंटिल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बात नहीं टाली। मुस्कुराते हुए बोले, “अब उन किस्सों को याद करके हंसा जा सकता है। बच्चों को सुनाया जा सकता है कि मेरे पास भी एक अच्छी कहानी है।”

कैरेबियन के सबसे खतरनाक इलाकों में से एक में पला-बढ़ा एक लड़का, जिसने अपनी जिंदगी कभी नहीं छुपाई। जिसने एक साथी का फ्लैट इसलिए इस्तेमाल किया ताकि जिंदा रह सके और क्रिकेट खेल सके। आज वही लड़का CSK के लिए पावरप्ले में गेंदबाजी कर रहा है, ठीक उसी जगह, जहां उसका आदर्श रवींद्र जडेजा गेंदबाजी किया करता था। लेवेंटिल में दोस्त की कमीज पर लाल लेजर की रोशनी… और चेपॉक पर 14 डॉट गेंदें। यह एक ही इंसान की दो अलग-अलग दुनियाएं हैं।