
sourav ganguly did not get captaincy easily
नई दिल्ली : भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ कप्तान माने जाने वाले सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने जब कप्तानी संभाली थी, तब टीम इंडिया (Team India) बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही थी। भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग (Match Fixing Scandal) के भंवर में फंसा था और सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था। काफी समझाने-बुझाने के बाद भी वह टीम इंडिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार नहीं हुए थे। ऐसे वक्त में दादा का टीम का कप्तान बनाया गया था और उन्होंने टीम में नया आत्मविश्वास भरा और उसे बुलंदियों पर ले गए। गांगुली ने ऐसी टीम तैयार की, जिसने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल दी। लेकिन गांगुली का कप्तान बनना आसान नहीं रहा। उन्हें अनिल कुंबले (Anil Kumble) और अजय जडेजा (Ajay Jadeja) से काफी जोरदार टक्कर मिली।
कोच नहीं चाहते थे गांगुली को
तत्कालीन चयन समिति (Team India Selection Committee) का हिस्सा और टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज अशोक मल्होत्रा (Ashok Malhotra) ने बताया कि कप्तान बनना तो दूर, सौरव गांगुली को उपकप्तान बनाना भी बेहद मुश्किल रहा था, लेकिन अचानक सचिन तेंदुलकर ने कप्तानी छोड़ दी, तब दादा की राह हो गई। इंडियन क्रिकेटर एसोसिएशन (Indian Cricketer Association) के मौजूदा अध्यक्ष अशोक मल्होत्रा ने बताया कि तत्कालीन कोच सौरव गांगुली को उपकप्तान बनाना नहीं चाहते थे। मल्होत्रा ने फेसबुक लाइव के दौरान कहा कि उन्हें ठीक से याद है तो सौरव गांगुली को उपकप्तान बनाना मुश्किल काम था। हमने कोलकाता में उपकप्तान बनाने का निर्णय लिया था।
कोल्ड ड्रिंक्स बनी थी दादा की राह की बाधा
अशोक मल्होत्रा ने कहा कि टीम इंडिया के तत्कालीन कोच ने तब कहा था कि गांगुली बहुत ज्यादा कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं। इसके अलावा विकेटों के बीच उनकी दौड़ पर भी सवाल उठाया था। कहा था कि वह सिर्फ सिंगल्स लेते हैं, डबल्स नहीं लेते। मल्होत्रा ने कहा कि इस पर उन्होंने कहा था कि कोल्ड ड्रिंक्स की वजह से कोई उपकप्तान बनने से डिस्क्वॉलिफाई नहीं हो जाता। इसके बाद दादा को उपकप्तान बनाने को लेकर हमारी बहुत लंबी बात हुई। काफी चर्चा के बाद सौरव गांगुली के पक्ष में 3-2 से निर्णय हुआ था।'
चेयरमैन ने दोबारा विचार करने को कहा
अशोक मल्होत्रा ने आगे कहा कि दादा की उपकप्तानी के मुद्दे पर तत्कालीन चेयरमैन भी सामने आ गए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह चेयरमैन का नाम नहीं लेंगे, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कोच और चेयरमैन ने हमसे इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने को कहा था। इसके बाद भी उनके समेत चयन समिति के दो सदस्य अपने फैसलों पर अडिग थे, लेकिन एक चयनकर्ता ने कहा कि अध्यक्ष ने कह दिया तो वह उनके साथ जाएंगे। इस कारण उस समय गांगुली को उप कप्तान नहीं बनाया जा सका। हालांकि बाद में वह कप्तान बने। अशोक मल्होत्रा ने कहा कि वह जानते हैं कि गांगुली एक लीजेंड्री कप्तान हैं। लेकिन उन्हें कप्तान और उपकप्तान बनाने में उनकी भी थोड़ी-सी भूमिका है।
कोई नहीं जानता था कि गांगुली बन जाएंगे कप्तान
अशोक मल्होत्रा ने कहा कि उस समय हम में से कोई नहीं जानता था कि सौरव कप्तान बन जाएंगे। तब सचिन कप्तान थे, लेकिन उन्होंने अचानक कप्तानी से इस्तीफा दे दिया तो हम सब इस बात पर सहमत हो गए कि गांगुली को टीम की बागडोर सौंप दी जाए। मल्होत्रा ने कहा कि तब अनिल कुंबले और अजय जडेजा भी लाइन में थे। इसलिए उन्हें उस समय बहुत काम करना पड़ा। बता दें कि सौरव गांगुली के कप्तान बनने के बाद टीम इंडिया ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के 16 जीत के विजयरथ को रोक दिया और स्टीव वॉ के नेतृत्व वाली अपराजेय चल रही ऑस्ट्रेलियाई टीम को 2-1 से टेस्ट सीरीज में मात दी। 2002 में भारत ने इंग्लैंड में त्रिकोणीय नेटवेस्ट सीरीज जीती। 2003 आईसीसी एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में पहुंची। 2004 में इंग्लैंड से उसके देश में सीरीज ड्रॉ कराई और पाकिस्तान से सीरीज जीती।
Updated on:
23 Jul 2020 07:03 pm
Published on:
23 Jul 2020 06:58 pm
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