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मैं पूरी रात फूट-फूटकर रोता रहा… देश को 2 वर्ल्ड कप जिताने वाले गौतम गंभीर का बड़ा खुलासा

टीम इंडिया के हेड कोच की रेस में सबसे आगे चल रहे गौतम गंभीर ने वर्ल्‍ड कप को याद करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। उन्‍होंने बताया कि उस रात वह फूट-फूटकर रोते रहे और तभी ठाना कि वह भारत को विश्‍व कप जिताएंगे।

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gautam gambhir

टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने देश को दो वर्ल्‍ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाई है। गंभीर ने टी20 वर्ल्ड कप 2007 में भारत की जीत में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इसके बाद वर्ल्ड कप 2011 में भी टीम का अहम हिस्‍सा रहे। राहुल द्रविड़ का टीम इंडिया के हेड कोच का कार्यकाल टी20 वर्ल्‍ड कप 2024 के बाद खत्‍म हो गए है। ऐसे में गौतम गंभीर टीम इंडिया नए हेड कोच की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। उम्‍मीद है कि वे ही भारतीय टीम के अगले हेड कोच होंगे। इससे पहले गौतम गंभीर ने एक इंटरव्‍यू के दौरान एक वर्ल्‍ड कप को याद करते हुए बताया कि उस दौरान वह भावानात्‍मक रूप से टूट गए थे और भारत की हार के बाद पूरी रात-रात फूट-फूटकर रोते रहे, उसी रात उन्‍होंने ठान लिया था कि वह भारत को विश्‍व कप जिताएंगे। 

जब फूट-फूट कर रोये गौतम गंभीर

गौतम गंभीर ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि 1992 के विश्व कप में ब्रिस्बेन में भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला था। उस रोमांचक मुकाबले में भारतीय टीम महज एक रन से हार गई। जिस हार के बाद वह इतने निराश हुए कि पूरी रात रोते रहे। उसी रात भारत के इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने ठान लिया कि वह भारत के लिए खेलेंगे और विश्व कप जीतकर भी लाएंगे।

आज भी याद है वह मैच

गौतम गंभीर ने स्पोर्ट्सकीड़ा से बातचीत में बताया कि उससे पहले या उसके बाद वह कभी ऐसे ही रोये मुझे नहीं पता। उस एक मैच को देखने के बाद वह भारत के लिए विश्व कप जीतना चाहते थे। मुझे ब्रिस्बेन में 1992 का भारत-ऑस्ट्रेलिया विश्व कप मैच आज भी याद है, जिसे टीम इंडिया एक रन से हार गई थी और मुझे वास्तव में याद है कि मैं पूरी रात फूट-फूटकर रोता रहा।

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2011 में सफल हुआ सपना

गंभीर ने बताया कि ये एकमात्र मौका था, जब वे क्रिकेट मैच देखने के बाद इतनी बुरी तरह रोए। उन्होंने बताया कि उस समय वह सिर्फ 11 साल के थे। मैं पूरी रात रोया और फैसला किया मैं भारत के लिए विश्व कप जीतूंगा। मैंने ये 1992 में कहा था और 2011 में मैं उस सपने को पूरा करने में सफल रहा। उस मैच से पहले या बाद में मैं दुखी हुआ था, लेकिन कभी उस तरह नहीं रोया था।