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इस स्पिनर को देखकर छुप जाते थे कपिल देव, खौफ़ इतना कि ब्रेकफास्ट भी कोने में होता था

कपिल देव जब नए-नए टीम में शामिल हुए थे तब वे एक गेंदबाज से बहुत डरते थे। कपिल उस गेंदबाज से इतना खौफ खाते थे कि अपना ब्रेकफास्ट भी छुप-छुप कर करते थे। उस गेंदबाज का नाम श्रीनिवासाराघवान वेंकटराघवन था। जो भारतीय टीम के कप्तान थे और बाद में एक सफल अंपायर भी बने।  

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महान ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान कपिल देव जब बल्लेबाजी करने आते थे तो दुनिया का हर गेंदबाज कांपने लगता था। लेकिन एक गेंदबाज ऐसा भी था जिसे देख कपिल की हालत खराब हो जाती थी। उस गेंदबाज का नाम श्रीनिवासाराघवान वेंकटराघवन था। अब कपिल टीम में नए-नए आए थे तब वेंकटराघवन टीम के सीनियर खिलाड़ी थे। ऐसे में कपिल उनसे बहुत डरते थे।

एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए कपिल ने बताया, 'मैं उनसे बहुत डरता था। इसकी दो वजह थीं। पहले तो वे अंग्रेजी में बात करते थे और दूसरा, हम सभी को उनके गुस्से के बारे में पता था। वो अंपायरिंग के वक्त नॉटआउट ऐसे देते थे, जैसे गेंदबाज को डांट रहे हों। जब मैं साल 1979 में इंग्लैंड गया, वो मेरे कप्तान थे और मैं वहां ऐसी जगह ढूंढ़ता था, जहां वो मेरा चेहरा देख ना पाएं।'

कपिल ने आगे कहा, 'उस समय हमारी टीम में बिशन बेदी, इरापल्ली प्रसन्ना, बी.एस चंद्रशेखर थे। हम युवा प्लेयर्स सीनियर्स से ज्यादा कुछ कह नहीं सकते थे और जब आप बलि का बकरा ढूंढ रहे होते हो तो वो मेरा चेहरा देखते थे। कई बार वे आग बबूला हो जाते थे। मैं उनके सामने ब्रेकफास्ट भी नहीं कर सकता था। मैं एक कोने में बैठता था, किसी खंभे के पीछे और वहां ब्रेकफास्ट करता था, जिससे वो मेरा चेहरा ना देख पाए। क्योंकि मैं ज्यादा खाता था और फिर वो कहते थे- वो पूरे टाइम खाता रहता है और खेलता नहीं है।'

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कपिल ने बाते की जब वेंकटराघवन रिटायर हो रहे थे तब तक वे उनसे डरते रहे। लेकिन अंत में उनके बीच रिश्ते अच्छे हो गए थे। कपिल वेंकटराघवन के व्यक्तित्व की तुलना जॉन मैकेनरो, डिएगो माराडोना से करते थे। वेंकटराघवन भारत के सबसे अच्छे स्पिन गेंदबाजों में से एक थे। वेंकटराघवन ने 57 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है। इस दौरान उन्होंने 156 विकेट लिए। क्रिकेट के सबसे बड़े प्रारूप में 72 रन देकर 8 विकेट आउट करना उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। टेस्ट क्रिकेट में उऩ्होंने 5 बार तीन विकेट और 7 बार 4 विकेट लिए। इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए 15 वनडे मैच भी खेले जिनमें 5 विकेट लिए। एकदिवसीय क्रिकेट में 34 रन पर 2 विकेट आउट करना उनका बेस्ट प्रदर्शन है।

टेस्ट कप्तान के रूप में वेंकटराघवन बहुत सफल नहीं हुए। उन्होंने 1974 से लेकर 1979 के दरम्यान 5 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की जिनमें 3 मुकाबले हारे और 2 ड्रॉ रहे। वह भारत के 17वें टेस्ट कप्तान थे. इसके अलावा वह 7 वनडे मैचों में भारत के कप्तान रहे जिनमें एक जीते और 6 मैच हारे। वेंकटराघवन भारत के दूसरे एकदिवसीय कप्तान थे।

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एस वेंकटराघवन भले ही आज क्रिकेट में सक्रिय न हो लेकिन देश के नंबर-1 अंपायर का खिताब उन्हीं के पास है। उन्होंने साल 1993 से लेकर 2004 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बखूबी अंपायर की भूमिका निभाई। इस दौरान वह 73 टेस्ट मैचों में अंपायर रहे। भारत के किसी भी अंपायर ने आज तक इतने टेस्ट मैचों में अंपायरिंग नहीं की है। वह दुनिया के 11वें अंपायर हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की। 52 वनडे मैचों को अगर जोड़ दिया जाए तो वेंकटराघवन कुल मिलाकर 125 इंटरनेशनल मैचों में अंपायर रहे।