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भारत को एशिया कप दिलाने वाले अथर्व की जिंदगी नहीं रही आसान, मां को करनी पड़ी कंडक्‍टर की नौकरी

एशिया कप के फाइनल मैच में बांग्लादेश के खिलाफ बांग्लादेश के जबड़े से जीत निकाल कर अथर्व ने भारत को बनाया चैम्पियन।

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atharva ankolekar

नई दिल्ली : भारत की युवा क्रिकेट टीम सातवीं बार अंडर-19 एशिया कप जीतने में कामयाब रही। लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ फाइनल में भारतीय टीम जब महज 106 रनों पर सिमट गई थी तो उस समय ऐसा लग रहा था कि भारत की हार महज समय की बात है, लेकिन यहां से मुंबई का एक युवा स्पिनर अथर्व अंकोलेकर ने ऐसी शानदार गेंदबाजी की कि बांग्लादेश के लिए 106 रन का स्कोर भी पहाड़ बन गया। उन्होंने 28 रन देकर पांच विकेट लिए और बांग्लादेश की पूरी टीम को 101 रन पर ऑलआउट करने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस खिलाड़ी का यह सफर कितना मुश्किल रहा है। उनके पिता की जल्दी मृत्यु हो गई थी और उसके बाद एक समय उनके पूरे परिवार के जीवन-यापन पर भी संकट आ गया था, लेकिन इसके बावजूद अथर्व की मां ने अपने बेटे के सपने को मरने नहीं दिया।

अथर्व की मां ने की बस कंडक्टर की नौकरी

अंडर-19 एशिया कप 2019 में सबसे अधिक 12 विकेट लेने वाले अथर्व के लिए निजी जीवन इतना आसान नहीं रहा। 2010 में जब वह महज 9 साल के थे तो उनके पिता का निधन हो गया। उनके पिता मुंबई की बेस्ट बस सेवा में कंडक्टर थे। इसके बाद उनकी मां वैदेही ने अपने बेटे की परवरिश और उनके सपने को पूरा करने के लिए बस कंडक्टर की नौकरी कर ली और बेटे की परवरिश में कोई कमी नहीं रहने दी।

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बड़े भाई के नक्शेकदम पर चलना चाहता है छोटा भाई

अथर्व फिलहाल बी.कॉम सेकेंड ईयर के छात्र हैं। वह भी अपने बड़े भाई की तरह क्रिकेटर बनना चाहता है और वह फिलहाल अंडर-14 टीम में खेलता है। पिता के निधन के बाद से अभाव को झेल रहे इस परिवार को उनकी मां चला रही है। इसके बावजूद उन्होंने अपने दोनों बेटे की परवरिश में कोई कोताही नहीं की।

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सचिन भी हैं प्रभावित

अथर्व बेहद कम उम्र से क्रिकेट की कोचिंग ले रहे हैं। उन्‍होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि 2010 में उनकी गेंदबाजी से प्रभावित होकर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने उन्हें बतौर इनाम ग्लव्स भेंट किए थे। इतना ही नहीं, उन्होंने ग्लव्स पर अपना ऑटोग्राफ भी दिया था।

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