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‘ड्रिंक्स के दौरान स्क्रीन के पीछे…’, इंजमाम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बारे में किया बड़ा खुलासा

Inzamam-ul-Haq on Mohammed Shami : पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इंजमाम उल-हक ने अनुभव साझा करते हुए कहा, रोजे के दौरान जब मैच होता था तब वाटर ब्रेक के दौरान पाकिस्तान की टीम स्क्रीन के पीछे चली जाती थी। स्क्रीन के पीछे पानी पीना या जो भी करना है, करते थे।

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Inzamam-ul-Haq on Mohammed Shami fasting row: भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 4 विकेट से करारी शिकस्त देकर आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब अपने नाम कर चुका है, लेकिन इस टूर्नामेंट के दौरान भारतीय स्पीड स्टार मोहम्मद शमी को लेकर सोशल मीडिया पर खूब बहस हुई। दरअसल, चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान 34 वर्षीय मोहम्मद शमी को लोगों ने माहे रमजान में पानी या जूस पीते देख लिया था। चूंकि इस्लाम में रमजान को पवित्र महीने के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में कई लोगों ने यह कहकर मोहम्मद शमी की आलोचना करनी शुरू कर दी कि माहे रमजान में रोजा नहीं रखना अपराध है। यहां यह बता दें कि माहे रमजान में रोजा रखने का मतलब है सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना खाए-पिए रहना।

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माहे रमजान में मोहम्मद शमी के पानी या जूस पीने की चर्चा सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में गूंजी। इसी कड़ी में पाकिस्तान की एक टीवी चैनल की एंकर ने जब पूर्व पाक क्रिकेटर इंजमाम-उल-हक से इस संबंध में सवाल किए तो उन्होंने अपने टीम के बार में जो खुलासा वह बेहद हैरान करने वाला था। इंजमाम उल-हक ने कहा, खेल के वक्त रोजा छोड़ना कोई वैसी बात नहीं है। मुझे लगता है कि ज्यादा आपत्ति इस बात से हुई कि उसे सार्वजिनक रूप से पानी पी लिया।

उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, रोजे के दौरान जब मैच होता था तब वाटर ब्रेक के दौरान पाकिस्तान की टीम स्क्रीन के पीछे चली जाती थी। स्क्रीन के पीछे पानी पीना या जो भी करना है, करते थे। इस दौरान उन्होंने शमी को सलाह दी कि स्क्रीन पर पानी नहीं पिएं, पीछे पानी पिए।

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टीवी चैनल से बातचीत के दौरान पूर्व पाकिस्तान क्रिकेटर ने माना कि खेल के दौरान रोजा रखना बेहद मुश्किल काम है। किसी को ना तो खुश करने के लिए रोजा रखा जाता है और ना ही छोड़ा जाता है। यदि आप सफर में हैं तो रोजा छोड़ने की इजाजत है।

वहीं, इस संबंध में पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर सकलैन मुश्ताक ने कहा, इन चीजों पर क्यों ध्यान देते हैं, मुझे यह समझ में नहीं आता है। हमें अच्छे इंसान बनने पर ध्यान देना चाहिए। सकारात्मक चीजों को लेकर आगे बढ़ें। सोशल मीडिया की किन बातों को लेकर हम बहस कर रहे हैं। ऐसी बातों से रत्ती भर किसी का फायदा नहीं है।

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