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भारतीय स्पिनरों का स्तर देखकर दुखी हैं मुरली कार्तिक, ऐसे जताया अफसोस

पूर्व भारतीय स्पिन गेंदबाज मुरली कार्तिक ने स्पिन गेंदबाजी में आ रही गिरावट को लेकर अफसोस जताते हुए कहा कि कभी गेंदबाजी टीम की ताकत हुआ करती थी।

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नई दिल्ली। पूर्व भारतीय स्पिन गेंदबाज मुरली कार्तिक (Murli Karthik) ने घरेलू क्रिकेट की स्पिन गेंदबाजी में हो रही गिरावट को लेकर अफसोस जताया है। उनका कहना है कि मुझे लगता है कि पहले के मुकाबले घरेलू क्रिकेट की स्पिन गेंदबाजी में काफी गिरावट आई है। एक समय अनिल कुंबले और हरभजन सिंह जैसे दिग्गज स्पिन गेंदबाज होते थे। जो भातरीय टीम की स्पिन गेंदबाजी की ताकत हुआ करते थे।

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बेदी से स्पिन के गुुर सिख चुके हैं कार्तिक
मुरली कार्तिक ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में भारतीय टीम के लिए खेला है और वह खुद को उस युग में खेलने के लिए भाग्यशाली मानते हैं। कार्तिक का कहना है कि वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें उस दौर में खेलने का मौका मिला, जब स्पिन भारतीय टीम की ताकत होती थी। बिशन सिंह बेदी ने उन्हें स्पिन के कई गुर सिखाए और साथ ही वनडे मैचों में भी स्लिप और सिली पॉइंट के साथ आक्रमण करने के लिए मजबूर किया।

2000 में ताकत थी स्पिन गेंदबाजी
मुरली का कहना है कि वर्ष 2000 में स्पिन गेंदबाजी भारतीय टीम की ताकत हुआ करती थी। कार्तिक का कहना है कि कुछ स्पिनरों को छोड़कर, घरेलू सर्किट में युवा क्रिकेटरों में पास रेड बॉल क्रिकेट में घरेलू नाम बनने के लिए स्पिन बॉलिंग वाले उत्तराधिकारी नहीं है। ऐसे में कार्तिक ने आने वाले स्पिनरों को सीमित ओवरों के प्रारूप में अपना नाम बनाने की बजाय लाल गेंद वाले क्रिकेट को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

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कार्तिक का क्रिकेट कॅरियर
गौरतलब है कि मुरली कार्तिक ने भारत के लिए 8 टेस्ट मैचों में 2.54 की इकोनॉमी से 24 विकेट झटके हैं। वहीं 37 वनडे मैचों में 5.07 की इकोनॉमी से 37 विकेट हासिल किए हैं। उन्होंने सिर्फ एक टी20 इंटरनेशनल खेला है, जिसमें उन्हें कोई विकेट नहीं मिला है। मुरली रिटायर होने से पहले आईपीएल में भी खेले। अब वे कॉमेंटेटर की भूमिका में नजर आते हैं।