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यौन उत्पीड़न मामले में बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी की जांच लोकपाल से कराने की मांग खारिज

सामाजिक कार्यकर्ता रश्मि नायर ने की थी दोबारा जांच की मांग याचिका में कहा था जांच समिति एकमत नहीं थी एक सदस्य ने राहुल जौहरी को बताया था दोषी
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राहुल जौहरी

यौन उत्पीड़न मामले में बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी की जांच लोकपाल से कराने की मांग खारिज

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राहुल जौहरी से संबंधित यौन उत्पीड़न मामले के लिए विशेष सुनवाई की मांग खारिज कर दी।

रश्मि नायर ने लोकपाल से जांच कराने की मांग की थी
सामाजिक कार्यकर्ता रश्मि नायर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग थी कि राहुल जौहरी पर लगे यौन उत्पीड़न आरोप की जांच एक बार फिर से कराई जाए और जांच के लिए यह मामला बीसीसीआई लोकपाल को दिया जाए। इसके पक्ष में तक देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा था कि जौहरी का अतीत दागदार रहा है। उन्होंने पहले जहां भी काम किया है, उन पर इस तरह के आरोप लगते रहे हैं और हर बार वह अपने रसूख का इस्तेमाल कर बचते रहे हैं।

याचिका में कहा गया था कि जांच समिति एकमत नहीं थी
याचिकाकता ने लोकपाल से जांच कराने की मांग के पक्ष में यह तर्क दिया था कि बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी पर तीन महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। एक महिला किसी कारणवश सामने नहीं आई थी, जबकि दो ने जौहरी के खिलाफ बयान दिया था। इसके बावजूद जांच समिति ने उन्हें संदेह का लाभ देकर क्लीन चिट दे दी थी। इस जांच समिति में तीन सदस्य राकेश शर्मा, बरखा सिंह और वीना गौड़ा थे और तीनों की राय अलग-अगल थी। राकेश और बरखा ने अपनी जांच रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दी थी तो एक सदस्य वीणा गौड़ा ने उन्हें दोषी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि बर्मिघम में महिला के साथ राहुल जौहरी का व्यवहार बीसीसीआई जैसे संस्थान के सीईओ जैसे पद पर रहते हुए बेहद गैरपेशेवर था। इससे संस्थान की छवि धूमिल होती है।