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228 नंबर की जर्सी पहन कर Hardik Pandya ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में क्यों किया था डेब्यू, खुला राज

Hardik Pandya पांड्या ने चार साल पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया है। इतने कम समय में ही वह क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में Team India के स्थायी सदस्य बन गए हैं।

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Hardik Pandya

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नई दिल्ली : बहुत कम समय में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया (Team India) में हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) अपना स्थायी जगह बना चुके हैं। इस दौरान उन्होंने अपने जबरदस्त प्रदर्शन से एक बड़ा फैन फॉलोइंग भी बना रखा है। उन्होंने महज चार साल पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया है। 2016 में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे मैच के जरिये अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। इस दौरान उन्होंने एक ऐसी अजीबो-गरीब नंबर की जर्सी पहन रखी थी, जो सामान्यत: कोई क्रिकेटर नहीं पहनता है। उन्होंने 228 नंबर की जर्सी पहन रखी थी। लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने अपनी जर्सी का नंबर बदलकर 33 कर लिया। पांड्या के 228 नंबर के जर्सी को लेकर तब से अब तक नाना प्रकार के कयास लगते रहे हैं। पांड्या के प्रशंसक ने अब इस राज पर से पर्दा उठा दिया है।

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आईसीसी ने पूछा था सवाल

हाल ही में आईसीसी (ICC) ने हार्दिक पांड्या की जर्सी नंबर 228 की तस्वीर शेयर कर प्रशंसकों से यह सवाल पूछा था कि 'क्या आप बता सकते हैं कि हार्दिक पांड्या जर्सी नंबर 228 क्यों पहनते थे?' आईसीसी के इस ट्वीट पर कुछ प्रशंसकों ने जो जवाब दिया, उससे इस राज पर से पर्दा हट गया कि वह 228 नंबर की जर्सी क्यों पहनते थे। उन्होंने बताया कि 'जब हार्दिक पांड्या अंडर-16 की बड़ौदा टीम की ओर से खेलते थे, तब उन्होंने बतौर कप्तान शानदार दोहरा शतक लगाया था। इस दौरान उन्होंने 391 गेंदों पर 228 रन की पारी खेली थी। हार्दिक ने 2009 में मुंबई की अंडर-16 के खिलाफ खेली थी।

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मुश्किल परिस्थितियों में निकाला था टीम को

हार्दिक पांड्या ने अपने इस दोहरे शतक से बड़ौदा को संकट से निकाला था। जब वह बल्लेबाजी करने आए थे, तब टीम के चार विकेट महज 60 रनों पर गिर चुके थे। इस दोहरे शतक के अलावा पांड्या ने पहली पारी में मुंबई के पांच बल्लेबाजों को पैवेलियन भी भेजा था। बता दें कि यह दोहरा शतक पांड्या के करियर का इकलौता दोहरा शतक है। इसलिए जब उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की, तब उन्होंने इतने नंबर की ही जर्सी पहनी थी।