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‘अगर ड्रॉप कर देता तो उनका करियर ही खत्म हो जाता’, इस खिलाड़ी का ODI करियर बचाने के लिए BCCI के खिलाफ चले गए थे गांगुली

Sourav Ganguly on Rahul Dravid: भारतीय क्रिकेट इतिहास का वो सबसे बड़ा सच, जब कप्तान सौरव गांगुली ने राहुल द्रविड़ का वनडे करियर बचाने के लिए BCCI के खिलाफ जाकर एक ऐसा हैरान करने वाला फैसला लिया, जिसने टीम इंडिया को साल 2003 के वर्ल्ड कप फाइनल तक पहुंचा दिया।

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भारत

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Anshika Verma

May 17, 2026

Sourav Ganguly on Rahul Dravid , Ganguly saved Dravid ODI career , India 2003 World Cup team combination, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़

सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ (Photo - IANS)

Sourav Ganguly on Rahul Dravid: भारतीय क्रिकेट में कप्तानी तो बहुतों ने की, लेकिन सौरव गांगुली जैसा जिगर बहुत कम कप्तानों में देखने को मिला। दादा अपनी टीम के खिलाड़ियों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते थे। हाल ही में गांगुली ने राज शमानी के पॉडकास्ट पर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे बड़े और साहसी फैसलों में से एक की यादें ताजा कर दी हैं।

जब द्रविड़ के करियर पर मंडरा रहा था खतरा

बात 2000 के शुरुआती दशक की है। जब राहुल द्रविड़ टेस्ट क्रिकेट के तो बेताज बादशाह थे, लेकिन वनडे क्रिकेट तेजी से बदल रहा था। उस वक्त सिलेक्टर्स और बीसीसीआई (BCCI) के कुछ लोगों का मानना था कि द्रविड़ का स्ट्राइक रेट वनडे के हिसाब से सही नहीं है और उन्हें टीम से ड्रॉप कर देना चाहिए। इस पर बात करते हुए गांगुली ने कहा, 'एक दौर था जब राहुल द्रविड़ को वनडे में चुना तो जा रहा था, लेकिन लोग कहने लगे थे कि उनका स्ट्राइक रेट अच्छा नहीं है। सिलेक्टर्स का मानना था कि शायद उनकी जगह किसी और को मौका दिया जाना चाहिए। लेकिन मैंने उन्हें टीम से बाहर नहीं होने दिया, क्योंकि अगर मैं उस वक्त उन्हें ड्रॉप कर देता, तो शायद उनका वनडे करियर वहीं खत्म हो जाता।'

वो एक जुआ, जिसने बदल दिया इतिहास

दादा जानते थे कि द्रविड़ के पास तकनीक है, बस उन्हें वनडे टीम में फिट करने के लिए एक अनोखे आईडिया की जरूरत थी। उस समय ऑस्ट्रेलिया के पास एडम गिलक्रिस्ट, साउथ अफ्रीका के पास मार्क बाउचर और श्रीलंका के पास कुमार संगकारा जैसे विकेटकीपर-बल्लेबाज थे, जो निचले क्रम में आकर मैच का पासा पलट देते थे।

भारत के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं था और टीम की बल्लेबाजी नंबर 6 पर ही खत्म हो जाती थी। तभी गांगुली ने एक बड़ा रिस्क लिया, जो BCCI को भी हैरान करने वाला था। उन्होंने द्रविड़ को विकेटकीपिंग सौंपने का फैसला किया। गांगुली ने समझाया, 'हमारे पास ऐसा विकेटकीपर नहीं था जो अच्छी बल्लेबाजी भी कर सके। हमारी बैटिंग 6 नंबर पर खत्म हो जाती थी। इसलिए हमने द्रविड़ को कीपर बनाया। इसका फायदा यह हुआ कि हम मोहम्मद कैफ को टीम में शामिल कर पाए और हमारी बल्लेबाजी नंबर 7 तक मजबूत हो गई।'

बिना ऑलराउंडर के खड़ी की वर्ल्ड क्लास टीम

गांगुली ने यह भी बताया कि उस दौर में भारत के पास कोई बड़ा जेन्युइन ऑलराउंडर नहीं था, इसलिए उन्हें जुगाड़ करना पड़ता था। वो खुद, सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह मिलकर पार्ट-टाइम गेंदबाजी करते थे और ओवर पूरे करते थे। द्रविड़ को विकेटकीपर बनाना एक बहुत बड़ा रिस्क था क्योंकि वह रेगुलर कीपर नहीं थे। लेकिन गांगुली की इस जिद और मास्टरस्ट्रोक का ही नतीजा था कि टीम इंडिया ने 2002-2003 में एक बेहद संतुलित वनडे टीम बनाई और साल 2003 में जोहान्सबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में खेले गए वर्ल्ड कप के फाइनल तक का सफर तय किया।