
रवींद्र...राजपूत...तरलवारबाजी: जानें कहां से सिखा जश्न मनाने का ये तरीका
नई दिल्ली। आधुनिक समय में तलवारबाजी देखने का मौका कम ही मिलता है। लेकिन यदि आप क्रिकेट के दीवाने हैं और रवींद्र जडेजा की बल्लेबाजी को देखते हैं तो आपको तलवारबाजी देखने को जरूर मिलेगी। शर्त बस ये है कि जडेजा अर्धशतक या शतक बना ले। शुक्रवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ रवींद्र जडेजा की बल्लेबाजी के दौरान दो बार तरवारबाजी देखने को मिली। एक तो तब जब उन्होंने अपना अर्धशतक लगाया और दूसरा तब जब उन्होंने पहला शतक जमाया। अपने घरेलू मैदान राजकोट में खेले जा रहे पहले टेस्ट के दूसरे दिन रवींद्र ने टेस्ट करियर का पहला शतक जमाया। शतक लगाने के बाद रवींद्र अपने अंदाज में जश्न मनाया।
रवींद्र की तलवारबाजी-
बल्लेबाजी के दौरान कोई बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद रवींद्र जडेजा तलवारबाजी कर जश्न मनाते है। जश्न मनाने का ये अंदाज उन्हें बाकी सभी खिलाड़ियों से अलग करता है। जश्न के दौरान रवींद्र बल्ले को तलवार की तरफ घुमाते है। इस दौरान रवींद्र दो-तीन बार बल्ले को हवा में घुमाते है। और फिर ड्रेसिंग रूम की तरफ अपना बल्ला दिखाते है।
राजपूत होने के कारण-
रवींद्र के रगों में राजपूती खून है। वे राजपूत होने के कारण इस तरीके से जश्न मनाते हैं। तलवारबाजी के अलावा रवींद्र के पास और भी कई राजपूती शौक है। मसलन घुड़सवारी करना, जानवरों के साथ समय बिताना, मंहगी कारें रखना और भी कई सारी। इन शौकों को राजपूती शौक इस लिए कहा जाता है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से और खास कर हिंदी फिल्मों में राजपूत को ऐसे ही दिखाया गया है।
सर जडेजा का जवाब नहीं-
रवींद्र जडेजा को सर जडेजा के निकनेम से जाना जाता है। लंबे समय से भारतीय टीम में बतौर स्टार ऑल राउंडर खेल रहे हैं। अपने क्रिकेट करियर के दौरान रवींद्र ने कई यादगार पारियां खेली है। मैदान के बाहर भी रवींद्र अपने कारनामों के कारण जाने जाते है। इसी साल जब भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गई थी, तब भारतीय क्रिकेटर जोहानिसबर्ग के जगलों में घुमने गए थे। इस दौरान जडेजा एक चीते को आवाज देने लगे। जिसके चलते रोहित शर्मा की हालत खराब हो गई थी। इस बात की पुष्टि खुद रोहित ने ब्रेकफास्ट विथ चैंपियन शो के दौरान कही थी।
Updated on:
05 Oct 2018 04:11 pm
Published on:
05 Oct 2018 04:07 pm
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