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22 साल बाद कबूली अपनी गलती: अंपायर स्टीव बकनर ने सचिन तेंदुलकर को गलत आउट देने पर तोड़ी चुप्पी

अंपायर स्टीव बकनर ने 22 साल बाद सचिन तेंदुलकर को गलत आउट देने पर तोड़ी चुप्पी। आखिर क्यों 'क्रिकेट के भगवान' को बिना गलती के लौटना पड़ा था पवेलियन? जानिए बकनर ने इसपर क्या कहा...
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भारत

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Anshika Verma

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Updated: 24 Feb 2026, 11:30 AM IST

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सचिन तेंदुलकर ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। (photo - espncricinfo)

Steve Bucknor vs Sachin Tendulkar: क्रिकेट की दुनिया में अंपायर स्टीव बकनर का नाम आते ही हर भारतीय क्रिकेट फैन को वो पल याद आ जाते हैं जब उनके गलत फैसलों ने 'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर को पवेलियन लौटने पर मजबूर किया था। अब करीब 22 साल बाद, स्टीव बकनर ने अपनी उन गलतियों को स्वीकार किया है और उन्हें मानवीय भूल बताया है।

जब अंपायर बन गया था विलेन

पुराने क्रिकेट फैंस अच्छी तरह जानते हैं कि स्टीव बकनर के कई फैसले सचिन तेंदुलकर के खिलाफ गए थे। उस समय DRS (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) नहीं होता था, इसलिए अंपायर का फैसला ही आखिरी फैसला होता था। सचिन ने हमेशा मर्यादा बनाए रखी और बिना विरोध किए क्रीज छोड़ी, लेकिन फैंस ने बकनर को कभी माफ नहीं किया। अब एक हालिया इंटरव्यू में बकनर ने माना है कि उन फैसलों का मलाल उन्हें आज भी है।

दो बड़ी गलतियां जिन्होंने इतिहास बदल दिया

बकनर ने विशेष रूप से दो मैचों का जिक्र किया जहां उनसे भारी चूक हुई थी। पहला ब्रिस्बेन टेस्ट (2003), जिसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गाबा के मैदान पर जेसन गिलेस्पी की गेंद पर बकनर ने सचिन को एलबीडब्ल्यू (LBW) आउट दे दिया था। रिप्ले में साफ दिखाई दे रहा था कि गेंद स्टंप्स के काफी ऊपर से जा रही थी। दूसरा ईडन गार्डन (2005), जहां पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अब्दुल रज्जाक की गेंद पर बकनर ने सचिन को कैच आउट दिया, जबकि गेंद बल्ले के पास से भी नहीं गुजरी थी।

बकनर ने कबूला अपराध

अंपायर स्टीव बकनर ने कहा, 'मुझसे दो बड़ी गलतियां हुईं। पहली बार गेंद स्टंप्स के ऊपर से जा रही थी और दूसरी बार गेंद ने बल्ले को छुआ तक नहीं था। जब आप इतने बड़े खिलाड़ी के खिलाफ गलत फैसला देते हैं, तो वह आपके दिमाग में घर कर जाता है।'

सचिन की महानता और बकनर का पछतावा

बकनर का यह कबूलनामा भले ही इतिहास को नहीं बदल सकता और न ही सचिन के वो रन वापस ला सकता है, लेकिन यह सचिन तेंदुलकर की महानता को जरूर दिखता है। उन्होंने कभी भी अंपायर के साथ बदतमीजी नहीं की। दशकों बाद एक अंपायर का अपनी गलती स्वीकार करना यह बताता है कि खेल में गलतियां किसी से भी हो सकती हैं, लेकिन उन गलतियों की कीमत कभी-कभी बहुत बड़ी होती है।