
भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज तिलक वर्मा (फोटो- IANS)
Tilak Verma Testicular Torsion surgery, T20 world Cup 2026: भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज तिलक वर्मा को राजकोट में इमरजेंसी सर्जरी करानी पड़ी है। विजय हजारे ट्रॉफी (VHT) में हैदराबाद का प्रतिनिधित्व करने के दौरान तिलक को पेट के निचले हिस्से में अचानक तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। स्कैन से पता चला कि उन्हें 'टेस्टिकुलर टॉर्शन' की समस्या है, जिसके लिए फौरन ऑपरेशन जरूरी था।
बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की मेडिकल टीम की सलाह पर राजकोट के एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में तिलक का सफल ऑपरेशन किया गया। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और वे अच्छी तरह रिकवर कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें शुक्रवार तक अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। इस तरह की इमरजेंसी सर्जरी के बाद एथलीट को पूरी तरह फिट होने में आमतौर पर दो से चार हफ्ते लगते हैं, हालांकि ठीक होने का समय इस बात पर भी निर्भर करता है कि टिशू डैमेज कितना ज्यादा हुआ है।
इस चोट के कारण तिलक का इस महीने के अंत में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज में खेलना लगभग असंभव हो गया है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि टी20 विश्व कप 2026 में उनकी भागीदारी पर संदेह के बादल छा गए हैं। विश्व कप की शुरुआत 7 फरवरी से हो रही है और भारत का पहला मैच इसी दिन अमेरिका के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा।
शुरुआत में खबरें ग्रोइन इंजरी की थीं, लेकिन मशहूर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट विक्रांत गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि तिलक को टेस्टिकुलर टॉर्शन की समस्या थी। उन्होंने लिखा, "तिलक वर्मा की अभी-अभी 'टेस्टिकुलर टॉर्सन' सर्जरी हुई है। रिकवरी में 2-4 हफ्ते लग सकते हैं और टी20 विश्व कप चार हफ्ते में शुरू हो रहा है, इसलिए उनके लिए यह स्थिति थोड़ी मुश्किल है।"
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, टेस्टिकुलर टॉर्सन एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें अंडकोष को रक्त पहुंचाने वाली स्पर्मेटिक कॉर्ड मुड़ जाती है, जिससे रक्त प्रवाह रुक जाता है। इससे अंडकोष में अचानक तेज दर्द होता है, साथ ही सूजन, लालिमा और कभी-कभी उल्टी भी हो सकती है। दर्द आमतौर पर एक तरफ के अंडकोष में होता है और यह इतना तीव्र होता है कि तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है। यदि 6 घंटे के अंदर उपचार नहीं किया गया, तो रक्त की कमी से अंडकोष में स्थायी क्षति हो सकती है, जिसके कारण टिशू मर जाता है और अंडकोष को सर्जरी से निकालना पड़ सकता है। इससे प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। यह समस्या जन्मजात कारणों (जैसे बेल क्लैपर डिफॉर्मिटी) से होती है, जहां अंडकोष ठीक से जुड़ा नहीं होता। यह सबसे ज्यादा 12-18 साल के किशोरों में देखी जाती है, लेकिन नवजात शिशुओं और वयस्कों में भी हो सकती है, हालांकि वयस्कों में कम आम है। यह व्यायाम, चोट या बिना किसी स्पष्ट कारण के हो सकती है।
Published on:
08 Jan 2026 05:33 pm
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